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गांधी प्रतिमा को गंगाजल से धुलने पहुंचे छात्र
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sun, 04 Dec 2016 01:47 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय के गांधी भवन में 30 नवंबर को बारात ठहराने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। मामले की जानकारी होने पर शनिवार को बड़ी संख्या में छात्र गंगाजल लेकर गांधी प्रतिमा धुलने पहुंच गए। निदेशक को जानकारी देने के बाद भी जब गांधी भवन का मुख्य द्वार नहीं खुला तो छात्र वहीं धरने पर बैठ गए। छात्रों ने आरोप लगाया कि गांधी भवन में बारात ठहराने के दौरान वहां मद्यपान किया गया। यह गांधी के मूल्यों के खिलाफ है।
‘गांधी भवन में ठहरा दी बारात’ शीर्षक से अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद छात्र आक्रोशित हो गए। बड़ी संख्या में छात्र जितेंद्र उपाध्याय के नेतृत्व में गांधी भवन पहुंच गए। छात्रों ने निदेशक को मोबाइल पर जानकारी दी कि वह अपवित्र हुए परिसर एवं गांधी जी की प्रतिमा को गंगाजल से धुलना चाहते हैं। छात्रों की ओर से जानकारी देने के बाद निदेशक प्रो. योगेश्वर तिवारी ने उन्हें बताया कि वह पीवीआर में फिल्म देखने आए हैं। इस समय नहीं आ सकते। छात्रों ने निदेशक के न पहुंचने पर सांकेतिक धरना दिया।
धरना देने वाले छात्रों शिवम शुक्ल आशू, रजनीश तिवारी, कीर्तिमान सिंह, मधुकर राय, सुभाष दुबे का कहना था कि गांधी भवन इविवि की ओर से स्थापित वैचारिक केंद्र है। गांधी मात्र एक संस्थान नहीं विचार हैं। जिसका हमें आदर करना चाहिए। छात्रों ने कुलपति से आग्रह किया है कि इस मामले की जांच करके दोषी लोगों को दंडित करें नहीं तो अहिंसक आंदोलन शुरू होगा।
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गांधी भवन में बारात ठहराने के लिए उन्होंने अपनी ओर से कोई लिखित अनुमति नहीं दी है, यदि कोई इस प्रकार का कृत्य किया है तो वह इस बारे में कुछ नहीं कर सकते हैं।’’
प्रो.योगेश्वर तिवारी
निदेशक गांधी विचार एवं शांति अध्ययन संस्थान
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‘गांधी भवन में ठहरा दी बारात’ शीर्षक से अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद छात्र आक्रोशित हो गए। बड़ी संख्या में छात्र जितेंद्र उपाध्याय के नेतृत्व में गांधी भवन पहुंच गए। छात्रों ने निदेशक को मोबाइल पर जानकारी दी कि वह अपवित्र हुए परिसर एवं गांधी जी की प्रतिमा को गंगाजल से धुलना चाहते हैं। छात्रों की ओर से जानकारी देने के बाद निदेशक प्रो. योगेश्वर तिवारी ने उन्हें बताया कि वह पीवीआर में फिल्म देखने आए हैं। इस समय नहीं आ सकते। छात्रों ने निदेशक के न पहुंचने पर सांकेतिक धरना दिया।
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धरना देने वाले छात्रों शिवम शुक्ल आशू, रजनीश तिवारी, कीर्तिमान सिंह, मधुकर राय, सुभाष दुबे का कहना था कि गांधी भवन इविवि की ओर से स्थापित वैचारिक केंद्र है। गांधी मात्र एक संस्थान नहीं विचार हैं। जिसका हमें आदर करना चाहिए। छात्रों ने कुलपति से आग्रह किया है कि इस मामले की जांच करके दोषी लोगों को दंडित करें नहीं तो अहिंसक आंदोलन शुरू होगा।
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गांधी भवन में बारात ठहराने के लिए उन्होंने अपनी ओर से कोई लिखित अनुमति नहीं दी है, यदि कोई इस प्रकार का कृत्य किया है तो वह इस बारे में कुछ नहीं कर सकते हैं।’’
प्रो.योगेश्वर तिवारी
निदेशक गांधी विचार एवं शांति अध्ययन संस्थान