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High Court : पाकिस्तानी नागरिक की संपति की खरीद फरोख्त में धोखाधड़ी, गिरफ्तारी पर रोक से इंकार
Sat, 21 Sep 2024 01:46 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 21 Sep 2024 01:46 PM IST
सार
देश के बंटवारे के समय कानपुर देहात, भोगनीपुर की रहने वाली जाफरी बेगम पाकिस्तान चली गई थी और वहीं की नागरिकता ले ली। वह 2008 मे कुछ दिन के लिए भारत आई थीं और कराची वापस चली गई थी। कराची में 28 जनवरी 11 को अस्पताल में उसकी मौत हो गई।
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कोर्ट
- फोटो : ANI
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पाकिस्तानी नागरिक की मौत का फर्जी प्रमाणपत्र तैयार कर उसकी सम्पत्ति राजस्व अभिलेखों में अपने नाम दर्ज कराने वाले से खरीदने के आरोपियों को राहत देने से इंकार कर दिया है। धोखाधड़ी के आरोपियों की गिरफ्तारी पर रोक वाली याचिका खारिज कर दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति वी के बिड़ला तथा न्यायमूर्ति ए के सिंह देशवाल की खंडपीठ ने फरहाना व सदरूल इस्लाम की याचिका पर दिया है वहीं, एक अन्य खरीदार मोहित सचान की याचिका को कोर्ट ने पोषणीय नहीं माना।
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गौरतलब है कि देश के बंटवारे के समय कानपुर देहात, भोगनीपुर की रहने वाली जाफरी बेगम पाकिस्तान चली गई थी और वहीं की नागरिकता ले ली। वह 2008 मे कुछ दिन के लिए भारत आई थीं और कराची वापस चली गई थी। कराची में 28 जनवरी 11 को अस्पताल में उसकी मौत हो गई । एजाज अहमद ने वारिस के तौर पर जाफरी बेगम की सम्पत्ति अपने नाम दर्ज करा ली। 7 मार्च 2004 को जाफरी की मौत का फर्जी प्रमाणपत्र के जरिए ऐसा किया गया। इस फ्राड में याची सदरूल इस्लाम व इनकी बीबी फरहाना के शामिल होने का आरोप है।
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जाफरी बेगम की मौत के बाद जांच की गई तो पासपोर्ट से पता चला 28 फरवरी 08 को वह भारत आई थीं और 3 अप्रैल 8 को कराची वापस चली गई। 28 जनवरी 11 को कराची के अस्पताल में जाफरी बेगम की मौत हुई है। और 7 मार्च 04 को उसकी झूठी मौत का बयान देकर बड़ा फ्राड किया गया है। जिस पर 5 अगस्त 24 को भोगनीपुर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था।
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याची ने इसके खिलाफ हाइकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। दलील दी कि उसने एजाज अहमद से जमीन खरीदी है। राजस्व अभिलेखों में उनका नाम दर्ज था, उसने कोई अपराध नहीं किया है।
याचिका का विरोध करते हुए शासकीय अधिवक्ता ने कहा कि जाफरी बेगम के पाकिस्तान जाने के कारण निष्क्रांत शत्रु सम्पत्ति हो गई थी। जो सरकार में निहित हो गई थी। फ्राड कर अपने नाम दर्ज कराकर बेची गई, जो अपराध है।