UPPSC : आयोग में प्रधानाचार्य पद पर नियुक्ति के लिए फर्जीवाड़ा, दो चयनित अभ्यर्थियों पर केस दर्ज
प्रधानाचार्य पद पर नियुक्ति के मामले में फर्जीवाड़े की बात प्रकाश में आई है। इस मामले में यूपीपीएससी की ओर से दो अभ्यर्थियों के खिलाफ सिविल लाइंस थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है। प्रथम दृष्टया फर्जी हस्ताक्षर और अनुभव प्रमाण पत्र के साक्ष्य मिले हैं।
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उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में प्रधानाचार्य पद पर नियुक्ति के लिए दो अभ्यर्थियों ने फर्जीवाड़ा किया। सम्मिलित राज्य/प्रवर अधीनस्थ सेवा भर्ती 2021 में जाली अनुभव प्रमाणपत्र लगाकर चयन पा लिया। सत्यापन में फर्जीवाड़े का खुलासा होने पर आयाेग अफसरों ने सिविल लाइंस थाने में दोनों के खिलाफ धोखाधड़ी, दस्तावेजों की कूटरचना के आरोप में एफआईआर दर्ज करा दी है।
रिपोर्ट अनुभाग अधिकारी अजय कुमार सिंह ने दर्ज कराई है। तहरीर में उन्होंने बताया है कि सम्मिलित राज्य/प्रवर अधीनस्थ सेवा (सामान्य चयन) परीक्षा-2021 के आधार पर रश्मिकला व रामप्रकाश नाम के दो अभ्यर्थियों का चयन प्रधानाचार्य पद पर हुआ। रश्मिकला के अध्यापन अनुभव प्रमाण पत्र के सत्यापन के संबंध में पत्राचार करने पर आयुक्त विंध्याचल मंडल, मिर्जापुर के पत्र के साथ संलग्न संंबंधित विभागाध्यक्षों की ओर से सत्यापन आख्या प्राप्त हुई।
इसमें बताया गया कि विद्यासागर इंटरमीडिएट काॅलेज पूरेखुशहाल, अभियां, भदोही के कार्यालय रिकॉर्ड के मुताबिक, प्रधानाचार्य पद के लिए अभ्यर्थी का अनुभव प्रमाण पत्र विद्यालय के कार्यालय से निर्गत नहीं किया गया और उन्होंने जो प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया, वह फर्जी है। इस संबंध में 31 जुलाई 2023 को आयोग कार्यालय में उपस्थित होकर अभ्यर्थी ने बताया कि उन्हें अनुभव प्रमाण पत्र विद्यालय के प्रबंधक से प्राप्त हुआ। इसके सही होने या न होने के संबंध में विद्यालय ही स्थिति स्पष्ट कर सकता है।
आरोप है कि इसके बाद प्रकरण की विस्तृत जांच में यह बात सामने आई कि रश्मिकला का प्रमाणपत्र विद्यालय प्रबंध समिति के सदस्य बृजेश पाठक ने मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक, कामता राम पाल का फर्जी हस्ताक्षर कराकर एवं फर्जी सरकारी पदनाम (संयुक्त शिक्षा निदेशक, विंध्याचल मंडल, मिर्जापुर) की मुहर बनाकर बनाया है। इस संबंध में प्राप्त आख्या के मुताबिक, अंशकालिक सहायक अध्यापिका को 10 जुलाई 2016 से 31 मार्च 2020 तक कार्यरत दर्शाया गया है, जो कूटरचित है। प्रधानाचार्य पद के लिए अनुभव प्रमाण पत्र इस कार्यालय से निर्गत नहीं किया गया है। साथ ही जो अनुभव प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया गया है, वह कूटरचित व फर्जी है।
खुद कर लिया जेडी का हस्ताक्षर
तहरीर में अभ्यर्थी राम प्रकाश के संबंध में बताया गया है कि उनके अनुभव प्रमाणपत्र के सत्यापन के संबंध में पत्राचार पर संबंधितों की ओर से अवगत कराया गया कि रामप्रकाश के अनुभव प्रमाण पत्र की छायाप्रति में संयुक्त शिक्षा निदेशक, प्रयागराज मंडल का जो हस्ताक्षर है, वह कूटरचित है। इस क्रम में अभ्यर्थी रामप्रकाश ने बताया कि उक्त अनुभव प्रमाण पत्र उन्होंने स्वयं संयुक्त शिक्षा निदेशक कार्यालय से प्राप्त किया है।
प्रमाण पत्र पर कूटरचित हस्ताक्षर हैं, इस संबंध में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। इसके बाद विस्तृत जांच में यह बात सामने आई कि अभ्यर्थी के अनुभव प्रमाण पत्र के सत्यापन के संबंध में पूर्व में ही जिला विद्यालय निरीक्षक, फतेहपुर के माध्यम से आख्या प्राप्त की गई थी। इसमें तत्कालीन जिला विद्यालय निरीक्षक फतेहपुर के हस्ताक्षर की पुष्टि की गई थी, लेकिन अभ्यर्थी के अनुभव प्रमाण पत्र में संयुक्त शिक्षा निदेशक, प्रयागराज मंडल, प्रयागराज के हस्ताक्षर को कूटरचित होने के कारण असत्यापित किया गया था।
इस प्रकार यह आशंका है कि संबंधित अभ्यर्थी के अनुभव प्रमाण पत्र पर संयुक्त शिक्षा निदेशक, प्रयागराज मंडल, प्रयागराज के कूटरचित हस्ताक्षर संबंधित अभ्यर्थी के ही स्तर पर किया गया है। प्रभारी सिविल लाइंस रामाश्रय यादव ने बताया कि तहरीर के आधार पर एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।