prayagraj : बीमा की रकम हड़पने के लिए मृत महिला को जिंदा दिखाया, चार गिरफ्तार
सिविल लाइंस पुलिस ने बीमा फ्रॉड गिरोह का पर्दाफाश करते हुए चार लोगों को गिरफ्तार किया है। इसके सदस्यों ने मृत महिला को जिंदा बताकर जीवन बीमा पॉलिसी कराई और करीब 34 लाख हड़पने की साजिश रची।
विस्तार
सिविल लाइंस पुलिस ने बीमा फ्रॉड गिरोह का पर्दाफाश करते हुए चार लोगों को गिरफ्तार किया है। इसके सदस्यों ने मृत महिला को जिंदा बताकर जीवन बीमा पॉलिसी कराई और करीब 34 लाख हड़पने की साजिश रची। कंपनी के चीफ मैनेजर एजेंसी राहुल बनर्जी की शिकायत पर सेल्स मैनेजर व पूर्व ब्रांच मैनेजर समेत सात पर नामजद रिपोर्ट दर्ज की गई है। चार आरोपियाें को गिरफ्तार कर लिया गया है।
मृत महिला के नाम पर बीमा, जीवित महिला की फोटो लगाई गई : मैनेजर की शिकायत के मुताबिक, खुशबू विश्वकर्मा पत्नी अजय कुमार विश्वकर्मा निवासी कोलमई, पिंडी, करछना के नाम पर दो बीमा पॉलिसी कराई गईं। इनमें से एक 13,12,480 और दूसरी 21,58,894 रुपये की थी। दोनों पॉलिसी के लिए प्रीमियम ऑनलाइन भरा गया और नामित व्यक्ति अजय कुमार था।
मैनेजर का आरोप है कि जांच में यह पाया गया कि जिस महिला के नाम पर बीमा कराया गया, उसकी मौत पहले ही हो चुकी थी। साजिशन उसके स्थान पर एक अन्य महिला की तस्वीर लगाकर बीमा आवेदन किया गया। बीमा पॉलिसी जारी होने के कुछ ही महीनों बाद मृत्यु दावा भी प्रस्तुत कर दिया गया।
जांच में खुलीं साजिश की परतें
मैनेजर का कहना है कि कंपनी की नीति के तहत पॉलिसी जारी होने के दो वर्षों के भीतर किए गए मृत्यु दावों की जांच अनिवार्य होती है। उपरोक्त मामले में भी ऐसा ही हुआ। जब दावा इन्वेस्टिगेशन एजेंसी ने जांच शुरू की तो सामने आया कि आवेदन में प्रस्तुत महिला असली खुशबू नहीं बल्कि उसकी जगह रिश्तेदार सत्या देवी पत्नी मुकेश कुमार को पेश किया गया था। सत्या अभी भी जीवित है और आरोप है कि साजिश में वह भी शामिल है।
अजय के भाई विजय ने उपलब्ध कराए थे दस्तावेज
दोनाें पॉलिसी कंपनी के सेल्स मैनेजर अंकुर कुमार श्रीवास्तव ने जारी करवाई थीं। तहरीर के मुताबिक, जांच के क्रम में हुई पूछताछ में उन्होंने बताया कि उन्हें यह काम पूर्व शाखा प्रबंधक विजय उपाध्याय ने सौंपा था। उन्होंने ही अजय के भाई विजय विश्वकर्मा से उनकी पहचान कराई। विजय विश्वकर्मा ने सभी फर्जी दस्तावेज व्हाट्सएप के माध्यम से उपलब्ध कराए, जिन्हें इस्तेमाल कर बीमा पॉलिसी कराई गई।
एक नहीं, कई फर्जी पॉलिसियों का नेटवर्क
एफआईआर के मुताबिक, जांच में पाया गया कि अजीत कुमार विश्वकर्मा और सोनम विश्वकर्मा के नाम पर भी फर्जी पॉलिसी कराई गईं। अजीत की पॉलिसी पर 6,43,998 रुपये का मृत्यु दावा भी प्रस्तुत किया जा चुका है। इन सभी मामलों में दस्तावेज विजय विश्वकर्मा ने सेल्स मैनेजर अंकुर को उपलब्ध कराए। इतना ही नहीं, इन पॉलिसी का कमीशन विजय की परिचित नीलम विश्वकर्मा के खाते में गया, जिसे अंकुर ने ही कंपनी में रखवाया था।
महिला समेत दो की तलाश जारी
सिविल लाइंस थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। थाना प्रभारी रामाश्रय यादव ने बताया कि इनमें विजय विश्वकर्मा, अजय के अलावा विवेचना से सामने आए दो अन्य आरोपी सुजीत व राजकुमार विश्वकर्मा शामिल हैं। पांच अन्य नामजद आरोपी सत्या, अंकुर श्रीवास्तव, विजय उपाध्याय, राकेश पांडेय व नीलम विश्वकर्मा की तलाश की जा रही है। पुलिस का कहना है कि इनकी तलाश में टीमें गठित की गई हैं।
2021 में भी सामने आया था ऐसा ही मामला
वर्ष 2021 में भी सिविल लाइंस थाने में बीमा धोखाधड़ी का मामला सामने आया था। इस मामले में जांच के बाद पुलिस ने चंडीगढ़ निवासी पुनीत अरोड़ा को गिरफ्तार किया था। उसके पास से नकदी और भारी मात्रा में फर्जी दस्तावेज बरामद हुए थे।