अन्न, जल त्याग कर विश्व कल्याण के लिए संगम की रेती पर अग्नि के घेरे में पंच अग्नि तपस्या (देखें तस्वीरें)
संगम की रेती मंगलवार को ऋतुराज वसंत के आगमन के साथ महात्यागी संतों की निराली तपस्या की साक्षी बनी। इसका केंद्र बना खाक चौक में बसा तपस्वी नगर। तपस्वी नगर केशिविरों में त्यागी परंपरा के संतों ने पंच अग्नि तपस्या आरंभ की। अग्नि के घेरे में अन्न-जल का परित्याग तक लोक कल्याण के लिए संत माघी पूर्णिमा तक सूर्योदय से सूर्यास्त तक तप करेंगे। जेष्ठ महीने की शुक्ल पक्ष की दशमी यानी गंगा दशहरा पर इस तपस्या की पूर्णाहुति होगी।
महावीर पांटून पुल पार होने के बाद खाक चौक के तपस्वीनगर में दो सौ से अधिक संतों ने अग्नि तपस्या आरंभ की। समूहों में एक साथ कई संत अग्नि के घेरे में सिर पर घड़ा रखकर ध्यान मग्न नजर आए। वसंत पंचमी पर संगम में पुण्य की डुबकी लगाने के बाद सर्व मंगल और लोक कल्याण की कामना से तपस्वी संतों ने पंच अग्नि साधना आरंभ की है।
इस तरह छह प्रकार की अग्नि साधना तपस्वीनगर में माघी पूर्णिमा तक चलेगी। युवा तपस्वी संत गोपाल दास बताते हैं कि संगम पर माघ मेले में आने वाले संतों ने पूरे जीव जगत के कल्याण के लिए पंच अग्नि तप का संकल्प लिया है। इस तपस्या के दौरान सुबह से शाम तक संत नियमित साधना करेंगे।