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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Following religion is allowed in the Constitution, but conversion is not allowed.

हाईकोर्ट: संविधान में धर्म पालन की अनुमति है, धर्मांतरण की नहीं, धर्म परिवर्तन कराने वाले की जमानत अर्जी खारिज

Thu, 11 Jul 2024 04:48 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 11 Jul 2024 04:48 PM IST
सार

महाराजगंज के थाना निचलौल में श्रीनिवास राव नायक पर अनुसूचित जाति के लोगों को बहला-फुसला कर हिंदू से ईसाई बनाने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया था।

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Following religion is allowed in the Constitution, but conversion is not allowed.
अदालत। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अनुसूचित जाति के लोगों को हिंदू से ईसाई बनाने वाले आरोपी की जमानत खारिज कर दी है। कहा कि संविधान नागरिकों को अपने धर्म को मानने, उसका पालन करने और प्रचार करने की स्वतंत्रता देता है। लेकिन, किसी को धर्म परिवर्तन कराने की अनुमति नहीं देता। धर्मांतरण कराना गंभीर अपराध है। न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की कोर्ट ने श्रीनिवास राव नायक की जमानत याचिका खारिज कर दी।

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महाराजगंज के थाना निचलौल में श्रीनिवास राव नायक पर अनुसूचित जाति के लोगों को बहला-फुसला कर हिंदू से ईसाई बनाने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया था। आरोप था कि उसने लोगों से कहा था कि ईसाई धर्म अपनाने से लोगों के सभी दु:ख-दर्द दूर हो जाएंगे और वे प्रगति करेंगे। सह-अभियुक्त विश्वनाथ ने अपने घर पर 15 फरवरी 2024 को एक कार्यक्रम का आयोजन किया था। इसमें बड़ी संख्या में ग्रामीणों को बुलाया गया था। ग्रामीणों को प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन करने का आरोप लगाते हुए शिकायतकर्ता ने मुकदमा दर्ज कराया था।

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याची के वकील ने दलील दी कि आवेदक का कथित धर्मांतरण से कोई संबंध नहीं है। वह आंध्र प्रदेश का निवासी है। उसे इस मामले में झूठा फंसाया गया है। अपर शासकीय अधिवक्ता ने दलील दी कि आवेदक आंध्र प्रदेश का निवासी है और महाराजगंज में धर्मांतरण कार्यक्रम में आया था। वह धर्मांतरण में सक्रिय रूप से भाग ले रहा था, जो कानून के खिलाफ है।

कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता को धर्म परिवर्तन करने के लिए राजी किया गया था, जो जमानत देने से इन्कार करने के लिए प्रथम दृष्टया पर्याप्त है। ऐसा कोई कारण नहीं है कि शिकायतकर्ता ने आंध्र प्रदेश निवासी आवेदक को गैरकानूनी धर्म परिवर्तन के मामले में झूठा फंसाया। दोनों के बीच कोई दुश्मनी भी नहीं थी। कोर्ट ने जमानत खारिज कर दी।

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