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लोककलाएं विलुप्त होने की कगार पर, संरक्षण जरूरी: कमलेश

Sat, 05 Sep 2026 02:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज Updated Sat, 05 Sep 2026 02:09 AM IST
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Folk arts on the verge of extinction; preservation essential: Kamlesh
फूलपुर के चिरौड़ा गांव में लोक कलाकारों को संबोधित करते भारतीय लोक कला महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष
भारतीय लोक कला महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष कमलेश चंद्र यादव ने चिरौड़ा गांव में लोक कलाकार जनजागरूकता गोष्ठी को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आल्हा, कजरी और नौटंकी जैसी लोककलाएं विलुप्त होने की कगार पर हैं, कुशल कलाकारों की संख्या भी कम हो रही है। इन प्राचीन विधाओं को जीवंत रखना और नई पीढ़ी से जोड़ना हमारी जिम्मेदारी है।
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कमलेश चंद्र यादव ने लोक कलाकारों की उपेक्षा पर सरकार से सहयोग की उम्मीद जताई। सांसद प्रवीण पटेल ने उनके हित में सहयोग दिलाने का भरोसा दिया। महासंघ के जिलाध्यक्ष गुलाब चंद्र मौर्य ने बताया कि लोक गायकों ने प्राचीन कथाओं को पीढ़ी-दर-पीढ़ी सहेजा। पराधीनता के दौर में भी लोक कलाओं ने युवाओं में आजादी की अलख जगाई।
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आज अनेक लोक विधाएं मंच से दूर हो रही हैं, इनका संरक्षण आवश्यक है। इस मौके पर वरिष्ठ लोक गायक भागीरथी पाल, रामचंद्र तूफानी, जिला प्रभारी कमल चंद्र यादव, निगम लाल, अशोक कुमार सरोज, प्यारेलाल, ननकू राम, नरसिंह बहादुर, राधेश्याम आदि रहे।
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