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केशव का उत्तराधिकारी तलाशना आसान नहीं

Sun, 23 Jul 2017 02:10 AM IST
राहुल शर्मा, अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
राहुल शर्मा, अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Sun, 23 Jul 2017 02:10 AM IST
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Finding the successor of Keshav is not easy
उप मुख्यमंत्री केशव मौर्य - फोटो : amar ujala
राष्ट्रपति चुनाव होने के बाद अब कयास लगाए जा रहे हैं कि डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य लोकसभा की सदस्यता से किसी भी दिन इस्तीफा दे सकते हैं। उनके इस्तीफा दिए जाने की अटकलों और विधानसभा चुनाव लड़ने की खबर ने एक बार फिर से सियासी माहौल गरमा दिया है। यह भी कहा जा रहा है कि अगर केशव इस्तीफा देते हैं तो कांग्रेस, सपा और बसपा महागठबंधन कर इस सीट को जीतने के लिए अपना संयुक्त उम्मीदवार खड़ा सकती है। भाजपा भी इससे भलीभांति वाकिफ है, लेकिन उसके सामने सबसे बड़ी समस्या इस सीट से उम्मीदवार चयन की है। क्योंकि केशव का उत्तराधिकारी तलाशना पार्टी के लिए आसान नहीं है।
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दरअसल वर्ष 2014 में फूलपुर सीट पर भाजपा के पास पहली बार आई। तब केशव ने रिकार्ड मतों से जीत हासिल कर राजनीतिक गलियारे में हलचल मचा दी थी। इस चुनाव के बाद केशव का कद लगातार बढ़ता ही गया। पहले प्रदेश अध्यक्ष और उसके बाद वे अब डिप्टी सीएम बन गए हैं। मार्च 2017 में योगी सरकार के सत्ता संभालने के बाद से ही केशव के इस्तीफे के बाद फूलपुर सीट से प्रत्याशी और खुद केशव कौन सी सीट से लड़ेंगे इसकी चर्चा सियासी गलियारों में जोरशोर से हो रही है। विधायक विक्रमाजीत मौर्य ने केशव के लिए फाफामऊ सीट छोड़ने तक का भी एलान बीते दिनों कर दिया है।
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स्थानीय स्तर पर पार्टी के कई ऐसे नेता है जो फूलपुर सीट पर अपना दावा प्रदेश में योगी सरकार बनने के बाद से कर रहे हैं, लेकिन इसमें से कोई ऐसा चेहरा नहीं है जिसका कद केशव के बराबर हो। संभावना इस बात की है कि केशव के इस्तीफा देने की स्थिति में भाजपा यहां से पॉयलट प्रत्याशी भी उतार सकती है। हालांकि पार्टी के वरिष्ठ नेता अभी इस बारे में कुछ भी कहने से बच रहे हैं। प्रदेश प्रवक्ता मनीष शुक्ला से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य लोकसभा से इस्तीफा देंगे या नहीं यह निर्णय पार्टी की संसदीय कमेटी को करना है। खुद केशव प्रसाद मौर्य ने भी गेंद पार्टी की संसदीय कमेटी के पाले में डाल दी है। उनका कहना है कि इस तरह के निर्णय पार्टी की संसदीय कमेटी लेती है।
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मायावती सामने आई तो होगी मुश्किल

केशव के फूलपुर संसदीय सीट से इस्तीफा देने और बसपा सुप्रीमो मायावती के इसी सीट से चुनाव लड़ने की खबर इन दिनों सोशल मीडिया में भी छाई हुई है। मायावती के कद और विपक्ष द्वारा उनको समर्थन दिए जाने के कयास ने भारतीय जनता पार्टी में खलबली मचा दी है। इन परिस्थितियों में भाजपा के सामने मुश्किल ये है कि वह फूलपुर संसदीय सीट से आखिर केशव के कद का नेता कहां से लाए जो बसपा सुप्रीमो को सीधी टक्कर दे सके। उधर केशव मौर्य भी पिछले दो रोज से दिल्ली में ही जमे हुए हैं। चर्चा है कि पार्टी की संसदीय कमेटी के सदस्यों ने उनसे शनिवार को मुलाकात कर फूलपुर संसदीय सीट से टिकट का दावा करने वालों के बारे में जानकारी ली है।
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