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पितरों को पूजने आए परिजन
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sun, 18 Sep 2016 01:03 AM IST
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allahabad
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इलाहाबाद। अश्विन मास कृष्णपक्ष प्रतिपदा शनिवार को पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए देश के कोने-कोने से परिजन आए। रेती पर जुटे परिजनों ने तीर्थपुरोहितों की देखरेख मेेें पितरों के निमित्त श्राद्ध तर्पण, पिडंदान किया। इससे पहले क्षौरकर्म कराया और गंगा स्नान किया। गया जाने वाले श्रद्धालुओं का प्रयाग आकर पिंडदान, तर्पण पूजन करने का क्रम जारी रहा। पितरों के निमित्त पिंडदान के लिए संगम समेत गंगा के विभिन्न तटों पर परजिनों के आने का क्रम पूरे दिन बना रहा।
परंपरागत रीति से पितरों के निमित्त पिंडदान, तर्पण और श्राद्धकर्म के बाद परिजनों ने तीर्थपुरोहितों को सामर्थ्य एवं श्रद्धा के अनुसार गोदान, वस्त्र अन्न दान दिया। सभी पुरोहितों के पास संबंधित क्षेत्रों के परिजनों का जमावड़ा लगा रहा। तीर्थपुरोहित हीरामणि भारद्वाज निशान राधाकृष्ण की देखरेख में छत्तीसगढ़ से आए परिजनों और अनूप त्रिपाठी निशान पीली कोठी की देखरेख में राजस्थान से आए परिजनों ने श्राद्ध तर्पण किया और गया के लिए रवाना हो गए। वहीं घरों में भी पितरों के निमित्त खाना निकाला गया, तिलांजलि दी गई।
उपलब्ध रही पिंडदान की सामग्री
फूल-माला, दूध के अतिरिक्त पिंडदान के लिए अन्य सामग्री भी संगम तट पर ही उपलब्ध रही। संगम क्षेत्र में फूल, माला, दूध, पत्तल, जौ, तिल बेचने वालों की दुकानें रहीं और वे घूमकर भी बेचते रहे।
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कम नजर आए कौए, बछिया भी
परंपरानुसार पितरों के लिए दिए जाने वाले पिंडांश का मुख्य भाग कौओं को मिलना चाहिए क्योंकि कौओं से ही पितृ शृंखला बनती है। कौओं ने ग्रास ले लिया तो श्राद्धकर्म को पूर्ण माना जाता है लेकिन शनिवार को संगम तट पर कौओं की संख्या कम ही दिखी। इसी तरह तीर्थपुरोहितों के पास बछिया भी नहीं दिखी। लोग संगमक्षेत्र में बछिया तलाशते रहे।
पितृदोष निवारण के लिए करें दान
आचार्य विद्याकांत पांडेय के अनुसार पितृपक्ष के दौरान दक्षिण की ओर मुंह करके दान देने से पितृदोष का निवारण होता है। पितरों के निमित्त ब्राह्मणों को भोजन कराने, वस्त्र, दक्षिणा आदि देने से परिवार में सुख-समृद्धि आती है।
पितामह के प्रतिमास्थल पर जलाए दीप
अश्विनी कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा शनिवार को पितामह के प्रति श्रद्धा अर्पित की गई। पं.देवीदत्त शुक्ल, पं.रमादत्त शुक्ल शोध संस्थान की ओर से नागवासुकि मंदिर, दारागंज के प्रवेश द्वार के करीब स्थित भीष्म पितामह के प्रतिमास्थल पर दीप जलाए गए। भोलाशंकर पांडेय के नेतृत्व में पितामह के पूजन सहित विविध अनुष्ठान पूरे किए गए। चंडी पत्रिका के संपादक ऋतुशील शर्मा ने पितृपक्ष की महत्ता को रेखांकित किया। संचालन बजरंगबली गिरि और स्वागत अनामिका चौधरी ने किया। कार्यक्रम में सुरेश भट्ट, वासुदेव प्रभु, अरुण गुप्त, रवींद्र मिश्र, शिवनारायण, राम मिलन गिरि, अवनीश पांडेय, व्रतशील शर्मा, अजय निषाद, जगदीश निषाद मधुकर मिश्र आदि मौजूद थे।
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परंपरागत रीति से पितरों के निमित्त पिंडदान, तर्पण और श्राद्धकर्म के बाद परिजनों ने तीर्थपुरोहितों को सामर्थ्य एवं श्रद्धा के अनुसार गोदान, वस्त्र अन्न दान दिया। सभी पुरोहितों के पास संबंधित क्षेत्रों के परिजनों का जमावड़ा लगा रहा। तीर्थपुरोहित हीरामणि भारद्वाज निशान राधाकृष्ण की देखरेख में छत्तीसगढ़ से आए परिजनों और अनूप त्रिपाठी निशान पीली कोठी की देखरेख में राजस्थान से आए परिजनों ने श्राद्ध तर्पण किया और गया के लिए रवाना हो गए। वहीं घरों में भी पितरों के निमित्त खाना निकाला गया, तिलांजलि दी गई।
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उपलब्ध रही पिंडदान की सामग्री
फूल-माला, दूध के अतिरिक्त पिंडदान के लिए अन्य सामग्री भी संगम तट पर ही उपलब्ध रही। संगम क्षेत्र में फूल, माला, दूध, पत्तल, जौ, तिल बेचने वालों की दुकानें रहीं और वे घूमकर भी बेचते रहे।
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कम नजर आए कौए, बछिया भी
परंपरानुसार पितरों के लिए दिए जाने वाले पिंडांश का मुख्य भाग कौओं को मिलना चाहिए क्योंकि कौओं से ही पितृ शृंखला बनती है। कौओं ने ग्रास ले लिया तो श्राद्धकर्म को पूर्ण माना जाता है लेकिन शनिवार को संगम तट पर कौओं की संख्या कम ही दिखी। इसी तरह तीर्थपुरोहितों के पास बछिया भी नहीं दिखी। लोग संगमक्षेत्र में बछिया तलाशते रहे।
पितृदोष निवारण के लिए करें दान
आचार्य विद्याकांत पांडेय के अनुसार पितृपक्ष के दौरान दक्षिण की ओर मुंह करके दान देने से पितृदोष का निवारण होता है। पितरों के निमित्त ब्राह्मणों को भोजन कराने, वस्त्र, दक्षिणा आदि देने से परिवार में सुख-समृद्धि आती है।
पितामह के प्रतिमास्थल पर जलाए दीप
अश्विनी कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा शनिवार को पितामह के प्रति श्रद्धा अर्पित की गई। पं.देवीदत्त शुक्ल, पं.रमादत्त शुक्ल शोध संस्थान की ओर से नागवासुकि मंदिर, दारागंज के प्रवेश द्वार के करीब स्थित भीष्म पितामह के प्रतिमास्थल पर दीप जलाए गए। भोलाशंकर पांडेय के नेतृत्व में पितामह के पूजन सहित विविध अनुष्ठान पूरे किए गए। चंडी पत्रिका के संपादक ऋतुशील शर्मा ने पितृपक्ष की महत्ता को रेखांकित किया। संचालन बजरंगबली गिरि और स्वागत अनामिका चौधरी ने किया। कार्यक्रम में सुरेश भट्ट, वासुदेव प्रभु, अरुण गुप्त, रवींद्र मिश्र, शिवनारायण, राम मिलन गिरि, अवनीश पांडेय, व्रतशील शर्मा, अजय निषाद, जगदीश निषाद मधुकर मिश्र आदि मौजूद थे।