गजब हाल : बाथरूम जाने के लिए 14 घंटे तक रेलमंत्री से गुहार लगाता रहा परिवार, बच्चों के पेट में आ गई सूजन
आजमगढ़ के राजू विश्वकर्मा का अर्णाकुलम एक्सप्रेस में वाराणसी से रिजर्वेशन था। मंगलवार की रात 8.50 बजे वाराणसी जंक्शन से वह ट्रेन में अपनी पत्नी, तीन बच्चों के साथ सवार हुए। हालांकि वाराणसी में ही ट्रेन में काफी भीड़ हो गई थी।
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केरल के एर्णाकुलम जा रही पटना-एर्णाकुलम एक्सप्रेस में सफर कर रहा एक बेबस पिता रातभर अपने बच्चों को तड़पता देखता रहा। कहने केे लिए उसके पास ट्रेन के एस-4 कोच में चार कंफर्म बर्थ थीं, लेकिन संबंधित कोच में भीड़ इतनी थी कि वह चाहकर भी अपनी बच्चों को बाथरूम तक नहीं पहुंच सकता था। पिता ने ट्विटर के माध्यम से रेलमंत्री से भी मदद मांगी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। 14 घंटे के बाद इटारसी में जीआरपी पहुंची, इसके बाद परिवार को बाथरूम की सुविधा मिल सकी। तब तक बच्चों के पेट में सूजन आ गई थी।
आजमगढ़ के राजू विश्वकर्मा का एर्णाकुलम एक्सप्रेस में वाराणसी से रिजर्वेशन था। मंगलवार की रात 8.50 बजे वाराणसी जंक्शन से वह ट्रेन में अपनी पत्नी, तीन बच्चों के साथ सवार हुए। हालांकि वाराणसी में ही ट्रेन में काफी भीड़ हो गई थी। किसी तरह से वह अपनी बर्थ तक पहुंच सके। उसके बाद राजू की बच्चों ने बाथरूम जाने के लिए कहा, लेकिन कोच में यात्रियों की इस कदर भीड़ थी कि वहां तक पहुंचना ही संभव नहीं था।
इसे देखते हुए रात दस बजे राजू ने रेलमंत्री को संबोधित एक ट्वीट किया। कुछ ही देर में जीएम एनसीआर, डीआरएम प्रयागराज, सीनियर डीसीएम प्रयागराज, सीपीआरओ एनसीआर, आरपीएफ एनसीआर तक उसका ट्वीट पहुंच गया। ट्रेन रात में प्रयागराज जंक्शन भी पहुंची, लेकिन राजू को कोई मदद नहीं मिली। इसके बाद पूरी रात राजू ने लगातार पांच ट्वीट कर मदद की गुहार लगाई।
इस दौरान ट्रेन सतना, जबलपुर से भी आगे निकल गई। सुबह करीब 11.30 बजे ट्रेेन जब इटारसी पहुंची तो तब जाकर जीआरपी और आरपीएफ पहुंची। उसकेे बाद बच्चों को शौचालय ले जाया गया। राजू ने बताया कि उसका यह सफर कड़वे अनुभव वाला रहा। कहा कि रेलवे का ट्विटर पर त्वरित कार्रवाई का दावा हवा हवाई है। रास्ते भर स्लीपर कोच में भीड़ रही। शौचालय में भी यात्रियों का कब्जा था।