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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   family members of the students who went to study in Ukraine are frightened, after the Russian attack, there is more concern

प्रयागराज : यूक्रेन पढ़ने गए छात्रों के परिजन खौफजदा, रूसी हमले के बाद और बढ़ी चिंता

Sun, 27 Feb 2022 08:12 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 27 Feb 2022 08:12 PM IST
सार

परिवारवालों का दिन बेटे-बेटियों की सलामती के लिए दुआएं करते बीत रहा है। फिलहाल उनकी सरकार से गुहार है कि उनके बच्चों को सुरक्षित वतन वापस लाया जाए। 

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family members of the students who went to study in Ukraine are frightened, after the Russian attack, there is more concern
Prayagraj News : पिछली बार घर आने पर परिजनों के साथ पीछे हरी टी शर्ट में खड़ा सत्येंद्र। - फोटो : प्रयागराज

विस्तार

रूसी हमले से जूझ रहे यूक्रेन में जिले के भी कई छात्र फंस गए हैं। मिसाइल और बमों के हमलों के बीच फंसे लाडलों की चिंता में उनके परिजन खौफजदा हैं। बच्चों की फिक्र में रह-रहकर उनका दिल बैठा जा रहा है। परिवारवालों का दिन बेटे-बेटियों की सलामती के लिए दुआएं करते बीत रहा है। फिलहाल उनकी सरकार से गुहार है कि उनके बच्चों को सुरक्षित वतन वापस लाया जाए। 

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10 दिन बाद आना था वापस, जंग ने रोका रास्ता 
मेजा/उरुवा (संवाद)। यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्रों में मेजा, उरुवा के अर्पित सिंह और अमित मिश्रा भी शामिल हैं। लेहड़ी गांव निवासी सुनील सिंह के दो बेटों में अर्पित छोटा और कठौली गांव निवासी प्रभाश्ंाकर मिश्र का छोटा बेटा अमित यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं। 10 दिन बाद यानी आठ मार्च को उन्हें वापस आना था, लेकिन रूसी हमले ने उनका रास्ता रोक दिया।
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पिता सुनील ने बताया कि अर्पित यूक्रेन के ओडेसा शहर में नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में अंतिम वर्ष का छात्र है। वह जनवरी में गया था और आठ मार्च को उसे वापस आना था। शनिवार दोपहर में व्हॉट्सएप कॉल से बात होने पर उसने बताया कि वह कई छात्रों के साथ किसी ढाबे पर रुका हुआ है।
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उधर अमित के परिजनों ने बताया कि वह चौथे वर्ष का छात्र है। परिजनों के मुताबिक, दोनों ने बताया कि वह जल्द ही रोमानिया के लिए बस से रवाना होंगे। इसके बाद वह सुरक्षित वापस आ सकते हैं। फिलहाल परिजनों को यह भी चिंता सता रही है कि 250 किमी दूर स्थित रोमनिया का सफर जंग के बीच जोखिम भरा हो सकता है। 


बंकर में बितानी पड़ी रात, होती रही बमबारी 
यूक्रेन के ओडेसा मेडिकल यूनिवर्सिटी से चौथे वर्ष की पढ़ाई कर रहे नीवा धूमनगंज के दीक्षांत श्रीवास्तव समेत सैकड़ों भारतीय छात्र अब भी वहीं फंसे हुए हैं। दीक्षांत के पिता रमेशचंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि शनिवार की सुबह बेटे से बात हुई तो उसने बताया कि शुक्रवार को ओडेसा शहर में पूरी रात बमबारी होती रही।



पूरे शहर में अफरा-तफरी का माहौल हो गया। अचानक यूनिवर्सिटी के छात्रों से कहा गया कि उन्हें अपनी जान बचाने के लिए बंकरों में जाना होगा। आननफानन दीक्षांत समेत सैकड़ों छात्रों ने बंकर में जाकर अपनी जान बचाई। बेटे की कुशलता को लेकर परिवार दिनरात भगवान से प्रार्थना कर रहा है।



बेटी की फिक्र में हर पल खौफजदा है दिल

यूक्रेन में फंसे छात्रों में घूरपुर के गौहनिया बाजार निवासी प्रीति साहू भी है। पिता अशोक कुमार साहू ने बताया कि प्रीति इवानो फ्रंकिवस्क नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस द्वितीय वर्ष की छात्रा है। व्यवसायी अशोक ने बताया कि फोन पर हुई बातचीत में बेटी ने बताया कि शनिवार दोपहर में वह बस से रोमानिया जाने के लिए यूक्रेन से रवाना हो चुकी है।



फिलहाल उसकी फिक्र में दिल हर पल खौफजदा है। मां ममता साहू व अन्य तीन भाई-बहनों का भी हाल बेहाल है। माता-पिता व परिवार के लोग काफी चिंतित हैं। 23 अगस्त को वह गौहनिया स्थित घर आई थी 15 सितंबर को वापस यूक्रेन स्थित मेडिकल कॉलेज चली गई थी। 



हॉस्टल में खुद को कैद करने पर मजबूर
यूक्रेन पर रूस के हमले के बीच फंसने वाले भारतीय छात्रों में मीरापुर का शुभांष गिरि भी शामिल है। वर्तमान में यूक्रेन के निप्रापेट्रोस स्टेट मेडिकल फैकल्टी से पढ़ाई कर रहे शुभांष की सलामती को लेकर परिवार के लोग चिंतित हैं। परिजनों ने बताया कि शुभांश 50 भारतीय छात्रों के साथ हॉस्टल में फंसा हुआ है।



उन्हें किसी प्रकार की मदद अभी तक उपलब्ध नहीं हो पाई है। यूक्रेन सरकार ने निर्देश दिए हैं कि  छात्र हॉस्टल से बाहर न निकलें। 10 से 15 दिनों तक का ही राशन उनकेपास है। परिजनों ने बताया कि फोन पर हुई बातचीत में शुभांष ने कहा कि हमले होते ही सायरन की आवाज सुन कर सभी को बंकरों की शरण लेनी पड़ती है। 



रोमानिया सीमा पर पहुंची संस्कृति
यूक्रेन में जंग के बीच अल्लापुर की संस्कृति सिंह भी फंस गई थी। फिलहाल शनिवार को वह किसी तरह से रोमानिया सीमा पर पहुंच गई है। परिजनों को उम्मीद है कि वह जल्द ही सकुशल भारत लौट आएगी। अल्लापुर में रहने वाले उमेश सिंह की बेटी संस्कृति इवानो मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस प्रथम वर्ष की छात्रा है।



परिजनों ने बताया कि फोन पर हुई बातचीत में बेटी ने बताया कि इवानो शहर का हवाई अड्डा 24 फरवरी को रूस की ओर से की गई बमबारी में नष्ट हो गया। जिसके बाद छात्र-छात्राओं में दहशत फैल गई। किसी तरह से खुद से वाहन की व्यवस्था कर बेटी अन्य छात्र-छात्राओं संग रोमानिया सीमा पर पहुंच गई, जिसके बाद परिजनों ने राहत की सांस ली। 




रोमानिया पहुंचा झूंसी का सत्येंद्र, बोला जल्द लौटूंगा
‘मम्मी-पापा परेशान मत होना, मैं रोमानिया पहुंच गया हूं। मेरे साथ प्रयागराज के दो दोस्त भी रोमानिया पहुंच गए हैं। अब खतरे की कोई बात नहीं हैं। रविवार तक हम सभी भारत में होंगे।’ ये उन बातों के कुछ अंश हैं जो शनिवार को यू्क्रेन में फंसे झूंसी के छात्र सत्येंद्र यादव ने व्हाट्सएप पर अमर उजाला से साझा किए हैं। सत्येंद्र ने परिजनों से कहा कि भगवान से दुआ करो कि हम सभी सकुशल अपने वतन पहुंच जाएं। सबकुछ ठीकठाक रहा तो सोमवार को वह अपने दो अन्य भारतीय दोस्तों के साथ दिल्ली होते हुए प्रयागराज पहुंच जाएगा। 



मूलत: हनुमानगंज के कोटवा गांव निवासी मार्केटिंग इंसपेक्टर वीरेंद्र वीर यादव झूंसी त्रिवेणीपुरम कॉलोनी में रहते हैं। उनका बेटा सत्येंद्र यूक्रेन के इवानो शहर स्थित इवानो फ्रैंकीस नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में तीसरे वर्ष का छात्र है। वह पिछले साल नवंबर में गया था। सत्येंद्र के साथ प्रयागराज के ऋतिक दिवाकर, हेमंत वर्मा और वैभव तिवारी भी यूक्रेन में फंसे हुए हैं।



सत्येंद्र ने अमर उजाला को बताया कि शनिवार को यूनिवर्सिटी की ओर से सभी छात्रों को बस के जरिए सकुशल रोमानिया के रास्ते उनके वतन भेजने की बात कही गई थी। पर बाद में योजना स्थगित कर दी गई। इस पर  28 छात्रों समेत उन्होंने दो टैक्सी कीं और सड़क के रास्तेे रोमानिया बार्डर पर पहुंच गए।



सत्येंद्र के साथ झूंसी के मायापुरी कालोनी का वैभव तिवारी तथा सुलेमसराय का हेमंत वर्मा भी हैं। साथी ऋतिक भी दूसरी टैक्सी से रोमानिया पहुंच रहा था। बताया कि बार्डर पर भारी भीड़ है। लोगों में अफरातफरी का माहौल है। उधर पिता वीरेंद्र वीर यादव बोले कि भगवान से बस यही दुआ कर रहा हूं कि बेटा सकुशल घर वापस आ जाए। सत्येंद्र की मां शशि देवी, बहन प्रतिमा, स्नेहलता, सुमन, वंदना और भाई अभेंद्र भी परेशान हैं। सभी उसके सकुशल घर लौटने की दिनरात दुआ कर रहे हैं।   



खुद चला आया, अब दोस्तों की चिंता
यूक्रेन में रहकर मेडिकल की पढ़ाई करने वालों में नवाबगंज के कसारी मसारी निवासी लालजी द्विवेदी का बेटा शलभ भी शामिल है। हालांकि वह 18 फरवरी को ही वापस आ गया था। उसने बताया कि वह 2019 में यूक्रेन गया था।




15 फरवरी को भारत सरकार की एडवाइजरी जारी होने के बाद वह 16 फरवरी की रात यूक्रेन से सऊदी अरब पहुंचा। सऊदी अरब से वह 18 फरवरी को इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट से दिल्ली पहुंचा और फिर प्रयागराज लौटा। उसने यह भी बताया कि उसके साथ पढ़ने वाली प्रिया सिंह व सुभांश गिरी भी प्रयागराज के रहने वाले हैं जो यूक्रेन में फंसे हुए हैं। उसे दोनों की चिंता है। 

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