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मेला प्रशासन चाहता है शंकराचार्य से न मिलें लोग
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Thu, 04 Jan 2018 01:20 AM IST
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शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती
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माघ मेला क्षेत्र में शंकराचार्य को भूमि न मिलने का मामला एक बार फिर गरमाएगा। शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती बृहस्पतिवार को मनकामेश्वर मंदिर पहुंच रहे हैं। उन्होंने मेला प्रशासन पर कई आरोप लगाए हैं। कहा, यह मेला प्रशासन की साजिश है कि शंकराचार्य से लोग न मिलें।
स्वरूपानंद पखवारा भर रुकेंगे। फोन पर हुई बातचीत में उन्होंने कहा कि उनकी उपेक्षा जानबूझ कर की जा रही है। जबकि तीर्थों के महत्व में शंकराचार्य अहम हैं। लोग उनके पास जुटते हैं तो सनातन परंपरा और समृद्धि होती है और उसके आगे का मार्ग भी प्रशस्त होता है। उनके द्वारा लगातार ऐसे कई कदम उठाए गए, जिससे सनातन परंपरा मजबूत हुई है। जैसे दलितों को दीक्षा देना, धर्म परिवर्तन कर चुके लोगों को फिर से सनातन परंपरा में वापस लाना। साथ ही सनातन परंपरा में घुसपैठ कर रहे फर्जी भगवानों का विरोध करना आदि। मेला प्रशासन में लगे अधिकारी सनातन धर्म के विषय में अनुभव हीन हैं और कुछ लोग ऐसे हैं जो उनके खिलाफ अधिकारियों को भड़काए हुए हैं। इसके चलते मेले में उन्हें भूमि आवंटित नहीं की गई है। यह सनातनियों को सोचना चाहिए कि उनके धर्माचार्यों का कहां तक अनादर होगा?
शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के प्रयाग पहुंचने अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि उनका स्वागत करेंगे। शंकराचार्य के स्वागत की तैयारी उनके शिष्यों एवं भक्तों द्वारा की जा रही है। मनकामेश्वर मंदिर के व्यवस्थापक एवं शंकराचार्य शिष्य स्वामी श्रीधरानंद ब्रह्मचारी के मुताबिक शंकराचार्य माघ मेला क्षेत्र में प्रवेश नहीं करेंगे। शनिवार को वे काशी जाएंगे और 11 जनवरी को पुन: प्रयाग आएंगे। वे स्नान पर्व पर त्रिवेणी स्नान करेंगे।
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स्वरूपानंद पखवारा भर रुकेंगे। फोन पर हुई बातचीत में उन्होंने कहा कि उनकी उपेक्षा जानबूझ कर की जा रही है। जबकि तीर्थों के महत्व में शंकराचार्य अहम हैं। लोग उनके पास जुटते हैं तो सनातन परंपरा और समृद्धि होती है और उसके आगे का मार्ग भी प्रशस्त होता है। उनके द्वारा लगातार ऐसे कई कदम उठाए गए, जिससे सनातन परंपरा मजबूत हुई है। जैसे दलितों को दीक्षा देना, धर्म परिवर्तन कर चुके लोगों को फिर से सनातन परंपरा में वापस लाना। साथ ही सनातन परंपरा में घुसपैठ कर रहे फर्जी भगवानों का विरोध करना आदि। मेला प्रशासन में लगे अधिकारी सनातन धर्म के विषय में अनुभव हीन हैं और कुछ लोग ऐसे हैं जो उनके खिलाफ अधिकारियों को भड़काए हुए हैं। इसके चलते मेले में उन्हें भूमि आवंटित नहीं की गई है। यह सनातनियों को सोचना चाहिए कि उनके धर्माचार्यों का कहां तक अनादर होगा?
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शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के प्रयाग पहुंचने अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि उनका स्वागत करेंगे। शंकराचार्य के स्वागत की तैयारी उनके शिष्यों एवं भक्तों द्वारा की जा रही है। मनकामेश्वर मंदिर के व्यवस्थापक एवं शंकराचार्य शिष्य स्वामी श्रीधरानंद ब्रह्मचारी के मुताबिक शंकराचार्य माघ मेला क्षेत्र में प्रवेश नहीं करेंगे। शनिवार को वे काशी जाएंगे और 11 जनवरी को पुन: प्रयाग आएंगे। वे स्नान पर्व पर त्रिवेणी स्नान करेंगे।
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