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शंकराचार्य को आधी जमीन देने पहुंचे मेला प्रशासन के अधिकारी
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Mon, 08 Jan 2018 01:07 AM IST
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शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती
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माघ मेला में भूमि न मिलने से आहत शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के इलाहाबाद हाईकोर्ट जाने के निर्णय से मेला प्रशासन में खलबली मच गई है। रविवार को एडीएम सिटी अतुल सिंह, पूर्व एडीएम सिटी सतीश शर्मा और मेलाधिकारी राजीव कुमार राय मनकामेश्वर मंदिर पहुंचे। अधिकारियों ने शंकराचार्य के शिष्य स्वामी श्रीधरानंद ब्रह्मचारी से मिलकर पिछले वर्षों के मुकाबले आधी भूमि देने की बात कही। हालांकि श्रीधरानंद ने इतनी कम भूमि लेने से इंकार कर दिया। कहा, मेला प्रशासन जितनी भूमि देना चाह रहा है, उसमें शंकराचार्य का पंडाल भी नहीं लग सकेगा।
मेला प्रशासन त्रिवेणी मार्ग पर शंकराचार्य को 160/160 फीट भूमि देने की बात कह रहा है। जबकि शंकराचार्य को पिछले वर्षों में 360/200 फीट भूमि आवंटित होती थी। इसमें पंडाल के साथ कई शिविर होते थे। जिसमें शंकराचार्य के साथ बड़ी संख्या में उनके शिष्य रहकर कल्पवास करते थे। पंडाल में ही विभिन्न धार्मिक, सांस्कृतिक और विभिन्न मुद्दों पर संगोष्ठियां होती थीं। धर्म संसद का भी आयोजन होता था। श्रीधरानंद ने कहा कि कम भूमि मिलने से यह सारे आयोजन नहीं हो सकेंगे। मेला प्रशासन को यह बातें बता दी गई हैं। इसके बावजूद मेला प्रशासन कम भूमि देने की बात कह रहा है। बातचीत का कोई हल नहीं निकला और मेला प्रशासन के अधिकारी लौट गए। शंकराचार्य स्वरूपानंद फिलहाल वाराणसी गए हुए हैं। वे यहां 11 जनवरी को आएंगे।
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मेला प्रशासन त्रिवेणी मार्ग पर शंकराचार्य को 160/160 फीट भूमि देने की बात कह रहा है। जबकि शंकराचार्य को पिछले वर्षों में 360/200 फीट भूमि आवंटित होती थी। इसमें पंडाल के साथ कई शिविर होते थे। जिसमें शंकराचार्य के साथ बड़ी संख्या में उनके शिष्य रहकर कल्पवास करते थे। पंडाल में ही विभिन्न धार्मिक, सांस्कृतिक और विभिन्न मुद्दों पर संगोष्ठियां होती थीं। धर्म संसद का भी आयोजन होता था। श्रीधरानंद ने कहा कि कम भूमि मिलने से यह सारे आयोजन नहीं हो सकेंगे। मेला प्रशासन को यह बातें बता दी गई हैं। इसके बावजूद मेला प्रशासन कम भूमि देने की बात कह रहा है। बातचीत का कोई हल नहीं निकला और मेला प्रशासन के अधिकारी लौट गए। शंकराचार्य स्वरूपानंद फिलहाल वाराणसी गए हुए हैं। वे यहां 11 जनवरी को आएंगे।
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