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शंकराचार्यों की उपेक्षा कर रहा मेला प्रशासन
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Mon, 01 Jan 2018 12:59 AM IST
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शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती
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सनातन परंपरा की अगुवाई करने वाले शंकराचार्यों का इससे बुरा समय पहले कभी नहीं रहा। शासन की छोड़िए अब मेला प्रशासन भी उनकी कदर नहीं कर रहा है। मेला क्षेत्र में शंकराचार्यों को भूमि और सुविधाएं देने के मामले में सबसे उपेक्षित कर दिया गया। उक्त बातें माघ मेला क्षेत्र में आए पुरी पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती के शिष्य और शिविर प्रभारी डा. राजेश चैतन्य ब्रह्मचारी ने कही। वह मेला क्षेत्र त्रिवेणी मार्ग स्थित शंकराचार्य निश्चलानंद के शिविर में कल्पवास के लिए काशी से आए हैं। मेला प्रशासन का रवैया देखकर उन्होंने हैरानी जताई।
उन्होंने कहा कि स्वामी निश्चलानंद पुरी पीठ के शंकराचार्य हैं। बावजूद इसके मेला प्रशासन ने उन्हें कम भूमि आवंटित की। जो कि पिछले वर्षों के मुकाबले बहुत कम है। इसके अलावा संगम के करीब नहीं है। संगम के करीब संस्थाओं को भूमि आवंटित की गई है। जबकि मेला प्रशासन को चाहिए था कि वह शंकराचार्यों की संगम के करीब भूमि आवंटित करे। और उनको स्थान निश्चित कर दे ताकि उन्हें हर वर्ष उसी स्थान को शंकराचार्यों के नाम आवंटित किया जा सके।
0 शंकराचार्य स्वरूपानंद को भूमि न देना दुर्भाग्य पूर्ण
डा. चैतन्य ने शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती को भूमि न मिलने पर अफसोस जताया। कहा वे दो पीठ के शंकराचार्य है इसके बावजूद मेला प्रशासन उन्हें उपयुक्त और पर्याप्त भूमि आवंटित नहीं कर रहा है। जबकि भूमि के लिए मेला प्रशासन के समक्ष पहले ही आवेदन किए गए थे। उन्होंने मेला प्रशासन पर आरोप लगाया कहा, शंकराचार्य के बगैर मेले में रौनक नहीं होती है और उन्हें ही मेले से बाहर रखने की साजिश की जा रही है। कहा, यह सनातन परंपरा का दुर्भाग्य है कि यह अपने देश में ही हाशिए पर है।
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उन्होंने कहा कि स्वामी निश्चलानंद पुरी पीठ के शंकराचार्य हैं। बावजूद इसके मेला प्रशासन ने उन्हें कम भूमि आवंटित की। जो कि पिछले वर्षों के मुकाबले बहुत कम है। इसके अलावा संगम के करीब नहीं है। संगम के करीब संस्थाओं को भूमि आवंटित की गई है। जबकि मेला प्रशासन को चाहिए था कि वह शंकराचार्यों की संगम के करीब भूमि आवंटित करे। और उनको स्थान निश्चित कर दे ताकि उन्हें हर वर्ष उसी स्थान को शंकराचार्यों के नाम आवंटित किया जा सके।
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0 शंकराचार्य स्वरूपानंद को भूमि न देना दुर्भाग्य पूर्ण
डा. चैतन्य ने शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती को भूमि न मिलने पर अफसोस जताया। कहा वे दो पीठ के शंकराचार्य है इसके बावजूद मेला प्रशासन उन्हें उपयुक्त और पर्याप्त भूमि आवंटित नहीं कर रहा है। जबकि भूमि के लिए मेला प्रशासन के समक्ष पहले ही आवेदन किए गए थे। उन्होंने मेला प्रशासन पर आरोप लगाया कहा, शंकराचार्य के बगैर मेले में रौनक नहीं होती है और उन्हें ही मेले से बाहर रखने की साजिश की जा रही है। कहा, यह सनातन परंपरा का दुर्भाग्य है कि यह अपने देश में ही हाशिए पर है।
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