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हाईकोर्ट : गिरफ्तारी को सही ठहराने के लिए साक्ष्य गढ़ना निंदनीय, जांच अधिकारी पर एफआईआर का आदेश

Fri, 06 Nov 2026 02:01 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 06 Nov 2026 02:01 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फर्रुखाबाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर तल्ख टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि गिरफ्तारी को सही ठहराने और आरोपी को रिमांड व जमानत की कार्यवाही में राहत से वंचित करने के लिए साक्ष्य गढ़ना एक निंदनीय कृत्य है।

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Fabricating evidence to justify an arrest is condemnable; orders FIR against the investigating officer.
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फर्रुखाबाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर तल्ख टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि गिरफ्तारी को सही ठहराने और आरोपी को रिमांड व जमानत की कार्यवाही में राहत से वंचित करने के लिए साक्ष्य गढ़ना एक निंदनीय कृत्य है। इस टिप्पणी संग कोर्ट ने याची मोहम्मद यासीन की गिरफ्तारी को अवैध करार देते हुए उसे तत्काल रिहा करने का आदेश दिया है।

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कोर्ट ने फर्रुखाबाद के पुलिस अधीक्षक को संबंधित जांच अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने और सात दिन के भीतर अनुपालन रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की खंडपीठ ने दिया है।
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शिकायतकर्ता ने याची के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोप लगाया था कि याची की प्रताड़ना से उसकी बेटी ने आत्महत्या कर ली। याची को पुलिस ने 14 सितंबर को गिरफ्तार दिखाया। हालांकि, उसका कहना था कि वह 13 सितंबर को अपने अधिवक्ता के साथ खुद थाने पहुंचा था और जांच में शामिल हुआ। उसी दिन से उसे हिरासत में ले लिया गया था। अवैध हिरासत का दावा करते हुए याची ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
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राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि गिरफ्तारी के कारण और गिरफ्तारी मेमो अलग-अलग तैयार कर 14 सितंबर को याची को दिए गए थे। इन दस्तावेज पर उसके हस्ताक्षर भी थे। अदालत ने पुलिस की ओर से पेश दस्तावेजों और याची को उपलब्ध कराए गए दस्तावेज का मिलान किया तो उनमें अंतर पाया।


कोर्ट ने पाया कि याची को दिए गए गिरफ्तारी के कारणों वाले दस्तावेज में केवल बीएनएस की धारा-108 का उल्लेख था। उसमें यह जानकारी नहीं थी कि युवती ने कथित प्रताड़ना के कारण आत्महत्या की और जांच में इस संबंध में साक्ष्य सामने आए हैं। जबकि पुलिस की ओर से अदालत में पेश दस्तावेज में ये तथ्य शामिल थे। 

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