{"_id":"6a6a070331eca4e382089f54","slug":"excuse-of-an-slp-will-not-work-comply-with-the-court-order-first-2026-07-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"High Court : एसएलपी का बहाना नहीं चलेगा, पहले अदालत का आदेश मानें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
High Court : एसएलपी का बहाना नहीं चलेगा, पहले अदालत का आदेश मानें
Wed, 29 Jul 2026 07:28 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 29 Jul 2026 07:28 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दाखिल करने की तैयारी या उसकी मंजूरी का इंतजार हाईकोर्ट के आदेश का पालन न करने का आधार नहीं बन सकता।
विज्ञापन
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दाखिल करने की तैयारी या उसकी मंजूरी का इंतजार हाईकोर्ट के आदेश का पालन न करने का आधार नहीं बन सकता। जब तक सुप्रीम कोर्ट से कोई राहत नहीं मिलती, तब तक हाईकोर्ट के आदेश का अनुपालन करना संबंधित अधिकारियों की कानूनी जिम्मेदारी है।
विज्ञापन
यह आदेश न्यायमूर्ति विकास बुधवार की एकल पीठ ने मुख्तार अंसारी के चचेरे भाई मंसूर अंसारी की अवमानना अर्जी पर दिया है। गाजीपुर निवासी मंसूर अंसारी ने गैंगस्टर मामले में कुर्क की गई संपत्ति को मुक्त करने की मांग में हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। 12 मार्च 2026 के आदेश से हाईकोर्ट ने याची की कुर्क संपत्ति को मुक्त करने का निर्देश दिया था। इस आदेश का पालन न होने पर मंसूर अंसारी ने वर्तमान अवमानना याचिका दाखिल की।
विज्ञापन
सुनवाई के दौरान गाजीपुर के डीएम ने बताया कि हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल करने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है,लेकिन अभी तक मंजूरी नहीं मिली है। कोर्ट ने कहा कि फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट में कोई एसएलपी दाखिल नहीं हुई है और न ही वहां से कोई स्थगन या राहत मिली है। ऐसे में हाईकोर्ट के आदेश का पालन किया जाना चाहिए।
विज्ञापन
हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त 2026 निर्धारित करते हुए आदेश दिया कि तब तक या तो सुप्रीम कोर्ट से कोई अनुकूल आदेश अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया जाए या फिर आदेश के अनुपालन का शपथपत्र दाखिल किया जाए। यदि ऐसा नहीं हुआ तो संबंधित अधिकारियों को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना होगा।