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हर साल बसता है मेला तो उजड़ते हैं 300 दुकानदार
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Every year the fair settles, ?300 shopkeepers destroy
- फोटो : CITY DESK
माघ मेला बसता है तो उजड़ जाते हैं 300 दुकानदार
-एक महीना अस्थायी दुकानदारों को नहीं मिलता है रोजगार
-कई बार प्रशासन से स्थायी व्यवस्था करने की मांग कर चुके हैं
प्रयागराज। देश विदेश में प्रसिद्ध माघ मेला जब संगम किनारे बसता है तो कई परिवारों के लिए बेरोजगारी लेकर आता है। माघ मेला बसने के साथ ही करीब 300 अस्थायी दुकानदारों को मेला प्रशासन उजाड़ देता है। इनका दर्द यह है कि वह वर्षों से दुकान लगाते हैं, लेकिन प्रशासन उनको स्थायी दुकान आवंटित नहीं करता है।
संगम तट पर वीआईपी घाट से लेकर लोअर संग मार्ग पर झोपड़ी डालकर करीब 300 अस्थायी दुकानदार अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं। ये सभी दुकानदार प्रयागराज के आसपास के रहने वाले हैं। इनका कारोबार 11 माह तक ठीक चलता है। जब माघ मेला शुरू होता है तो इनका रोजगार छिन जाता है।
रविवार को मेला अधिकारी से मिलने पहुंचे राजकुमार चौहान, ऊषा चौहान, गोलू, रेखा देवी, चंपा देवी, राजेश, सीमा, कल्लू, शांति, राधे, सुगिया आदि का कहना था कि उनके परिवार संगम तट पर वर्षों से अस्थायी दुकान चलाते हैं। इन दुकानों से ही उनके परिवार की रोजी रोटी चलती है। लेकिन माघ मेला जैसा बड़ा आयोजन शुरू होने के साथ ही उनके लिए रोजी रोटी का संकट खड़ा हो जाता है। प्रशासन अस्थायी दुकानदारों को अतिक्रमण मानकर हटा देता है। माघ मेला में शुल्क देकर रोजगार करने के लिए उनके पास पूंजी नहीं जुट पाती है। वर्षों से प्रशासन से कोई स्थायी करने की मांग करते रहे हैं, लेकिन कोई समाधान नहीं हो रहा है।
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-एक महीना अस्थायी दुकानदारों को नहीं मिलता है रोजगार
-कई बार प्रशासन से स्थायी व्यवस्था करने की मांग कर चुके हैं
प्रयागराज। देश विदेश में प्रसिद्ध माघ मेला जब संगम किनारे बसता है तो कई परिवारों के लिए बेरोजगारी लेकर आता है। माघ मेला बसने के साथ ही करीब 300 अस्थायी दुकानदारों को मेला प्रशासन उजाड़ देता है। इनका दर्द यह है कि वह वर्षों से दुकान लगाते हैं, लेकिन प्रशासन उनको स्थायी दुकान आवंटित नहीं करता है।
संगम तट पर वीआईपी घाट से लेकर लोअर संग मार्ग पर झोपड़ी डालकर करीब 300 अस्थायी दुकानदार अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं। ये सभी दुकानदार प्रयागराज के आसपास के रहने वाले हैं। इनका कारोबार 11 माह तक ठीक चलता है। जब माघ मेला शुरू होता है तो इनका रोजगार छिन जाता है।
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रविवार को मेला अधिकारी से मिलने पहुंचे राजकुमार चौहान, ऊषा चौहान, गोलू, रेखा देवी, चंपा देवी, राजेश, सीमा, कल्लू, शांति, राधे, सुगिया आदि का कहना था कि उनके परिवार संगम तट पर वर्षों से अस्थायी दुकान चलाते हैं। इन दुकानों से ही उनके परिवार की रोजी रोटी चलती है। लेकिन माघ मेला जैसा बड़ा आयोजन शुरू होने के साथ ही उनके लिए रोजी रोटी का संकट खड़ा हो जाता है। प्रशासन अस्थायी दुकानदारों को अतिक्रमण मानकर हटा देता है। माघ मेला में शुल्क देकर रोजगार करने के लिए उनके पास पूंजी नहीं जुट पाती है। वर्षों से प्रशासन से कोई स्थायी करने की मांग करते रहे हैं, लेकिन कोई समाधान नहीं हो रहा है।
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