Mahakumbh : गूगल मैप से नहीं, आज भी यजमान झंडे से करते हैं पंडों की पहचान
प्रयागवाल के पंडा राजू पांडेय ने बताया कि केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान उनके यजमान हैं। शिवराज के दादा, परदादा और उनके पूर्वज राजू पंडा के पूर्वजों के पास आते थे। एमपी के पूर्व मंत्री राजकुमार पटेल भी उनके यजमान हैं।
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महाकुंभ में हर पंडों के झंडों की अपनी अलग कहानी है। कोई रेलगाड़ी तो कोई झंडे पर दो सांपों का निशान बनवाए है। यही नहीं, इनके नाम भी आकर्षक हैं। किसी ने लल्ला परगन पंडा रेलगाड़ी का झंडा तो किसी ने सोने के नारियल वाले के रूप में अपनी पहचान बनाई है। कोई नागफनी वाले के नाम से तो कोई पीतल के घोड़े वाले और कोई तेगा तलवार के नाम से जाना जाता है।
पंडे कहते हैं कि कंपनियों की तरह ई झंडा हमार ट्रेडमार्क है। इसका निर्माण हमारे पूर्वजों ने यजमानों की सुविधा के लिए किया था, ताकि कोई नाम भूल जाए तो निशान से पहुंच जाए। पंडा सोमेश्वर नाथ तिवारी ने बताया कि उनको दो नागों के फन का निशान केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के दादा ने उनके बाबा को दिया था। तब से उनका परिवार यजमानी कर रहा है।
प्रयागवाल के पंडा राजू पांडेय ने बताया कि केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान उनके यजमान हैं। शिवराज के दादा, परदादा और उनके पूर्वज राजू पंडा के पूर्वजों के पास आते थे। एमपी के पूर्व मंत्री राजकुमार पटेल भी उनके यजमान हैं। राजू बताते हैं कि उनके शिविर में नर्मदा पुरम, सिहोर, रायसेन और बैतूल के यजमान आते हैं। पंडा राजकुमार मिश्रा के झंडे का निशाना सोने का नारियल है। उनका दावा है कि कई यजमान दस पीढि़यों से लगातार इन्हीं के यहां आ रहे हैं।
श्रद्धालु बोले - पहचान करने में होती है आसानी
पंडा सोमेश्वर नाथ तिवारी के यहां ग्वालियर से माता की अस्थियां लेकर आए यजमान विवेक देशमुख बताते हैं, झंडों से पहचान करने में आसानी होती है। हम अपने पंडों के यहां आसानी से पहुंच जाते हैं। इससे हम ठगे भी नहीं जाएंगे। कोई दूसरा व्यक्ति हमें अपना पंडा बताकर ले नहीं जा सकेगा, क्योंकि एक निशान एक ही पंडे के पास होता है।