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चुनाव में भी फर्जीवाड़ा, मास्टरमाइंड केएल पटेल ने छिपाया था आपराधिक इतिहास
Sat, 13 Jun 2020 07:21 PM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 13 Jun 2020 07:21 PM IST
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prayagraj news: शिक्षक भर्ती घोटाले का सरगना और मास्टर माइंड केएल पटेल।
- फोटो : prayagraj
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69 हजार शिक्षक भर्ती परीक्षा में धांधली करने वाले गिरोह के सरगना केएल पटेल ने विधानसभा चुनाव में भी फर्जीवाड़ा किया था। 2017 विधानसभा चुनाव में उसने प्रतापपुर सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा था। इस दौरान उसने चुनाव आयोग के समक्ष खुद को पाक-साफ बताया था। आयोग के समक्ष प्रस्तुत शपथ पत्र में उसने खुद पर एक भी केस दर्ज न होने की बात कही थी जबकि, पुलिस का कहना है कि व्यापम मामले में वह 2013 में ही जेल भेजा जा चुका था।
39 साल का पूर्व जिला पंचायत सदस्य डॉ. केएल पटेल मूल रूप से बहरिया के कपसा गांव का रहने वाला है। 2017 में उसने प्रतापपुर विधानसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था। हालांकि इस चुनाव में उसे सफलता नहीं मिली थी। उसने शिक्षक भर्ती परीक्षा में तो धांधली की ही, अब यह जानकारी सामने आई है कि इस नकल माफिया ने चुनाव के दौरान भी फर्जीवाड़ा किया। चुनाव आयोग के समक्ष गलत जानकारी दी।
दरअसल, चुनाव से पहले उसकी ओर से नामांकन के दौरान जो हलफनामा प्रस्तुत किया गया था, उसमें अपना आपराधिक इतिहास शून्य बताया गया था। यानी उसका दावा था कि उसके खिलाफ एक भी आपराधिक केस दर्ज नहीं है। पांच फरवरी 2017 को उसने रिटर्निंग ऑफिसर, इलाहाबाद के समक्ष अपना नामांकन व हलफनामा दिया था।
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खास बात है कि एसएसपी सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज समेत अन्य अफसरों का कहना है कि 2013 में ही व्यापम घोटाले में उसका नाम आने के बाद मामले की जांच में जुटी मप्र एसटीएफ ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा था। जिसमें वह 45 दिनों तक जेल में ही बंद था। बाद में वह जमानत मिलने पर जेल से रिहा हो गया।
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39 साल का पूर्व जिला पंचायत सदस्य डॉ. केएल पटेल मूल रूप से बहरिया के कपसा गांव का रहने वाला है। 2017 में उसने प्रतापपुर विधानसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था। हालांकि इस चुनाव में उसे सफलता नहीं मिली थी। उसने शिक्षक भर्ती परीक्षा में तो धांधली की ही, अब यह जानकारी सामने आई है कि इस नकल माफिया ने चुनाव के दौरान भी फर्जीवाड़ा किया। चुनाव आयोग के समक्ष गलत जानकारी दी।
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दरअसल, चुनाव से पहले उसकी ओर से नामांकन के दौरान जो हलफनामा प्रस्तुत किया गया था, उसमें अपना आपराधिक इतिहास शून्य बताया गया था। यानी उसका दावा था कि उसके खिलाफ एक भी आपराधिक केस दर्ज नहीं है। पांच फरवरी 2017 को उसने रिटर्निंग ऑफिसर, इलाहाबाद के समक्ष अपना नामांकन व हलफनामा दिया था।
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खास बात है कि एसएसपी सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज समेत अन्य अफसरों का कहना है कि 2013 में ही व्यापम घोटाले में उसका नाम आने के बाद मामले की जांच में जुटी मप्र एसटीएफ ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा था। जिसमें वह 45 दिनों तक जेल में ही बंद था। बाद में वह जमानत मिलने पर जेल से रिहा हो गया।