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आधे शहर के बराबर अकेले करेली में ही फुंके ट्रांसफार्मर

Thu, 30 Jun 2016 01:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Thu, 30 Jun 2016 01:20 AM IST
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Equal to half the city alone in Kareli district transformer
अंबेडकरनगर के मीरानपुर में बदलने के लिए शुक्रवार शाम पहुंचा नया ट्रांसफार्मर - फोटो : अमर उजाला
गर्मी के तीन महीनों में शहर में जितने ट्रांसफार्मर जले उसमें से आधे से अधिक करेली के हैं। करेली में अप्रैल, मई और जून, सिर्फ तीन महीनों में कुल 44 ट्रांसफार्मर जले। इसमें 630 केवीए, 400 और 250 केवीए के ट्रांसफार्मर शामिल हैं। ट्रांसफार्मर ज्यादातर गौसनगर, करामत की चौकी, अटाला, मुन्ना मजिस्द, करेली की एबीसीडी कॉलोनियों, अबूबकरपुर समेत अन्य सीमावर्ती इलाके के हैं। लगातार फुंकते ट्रांसफार्मर की वजह से लोग परेशान होने के साथ आक्रोशित भी हैं। सवाल यह भी कि आखिर इसी इलाके में ही इतने ट्रांसफार्मर क्यू फुंक रहे हैं। आए दिन ट्रांसफार्मर के लगातार जवाब देने से जहां लोग बेहाल हैं, वहीं विद्युत अधिकारियों को भी परेशानी हो रही है। तीन महीने में इतने ट्रांसफार्मर शहर के किसी और सबस्टेशनों के इलाके में नहीं खराब हुए।
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करेली सब स्टेशन के अंतर्गत लाखों की आबादी है। इसमें करेली, अकबरपुर, करेलाबाग, अटाला, गौसनगर, मुन्ना मस्जिद, शास्त्रीनगर समेत दर्जनों मोहल्ले शामिल हैं जहां कुल 17624 ने कनेक्शन ले रखा है। इस कनेक्शन पर कुल 33875 किलोवाट का भार है। इनके लिए इलाके में 630 केवीए, 400 और 250 केवीए के 132 ट्रांसफार्मर लगाए गए हैं। करेली और करेलाबाग सबस्टेशन की क्षमता 48 एमबीए (करेली में 30 एमबीए और करेलाबाग में 18 एमबीए) है।

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 पॉवर हाउस विद्युत खंड के अधिशासी अभियंता एमके अग्रवाल कहते हैं, करेली सबस्टेशन को अधिकतम मांग से एक तिहाई फीसदी ज्यादा क्षमता का स्थापित किया गया है। बावजूद इसके लोड इतना बढ़ जाता है कि आपूर्ति को बाधित करना पड़ रहा है। अधिकतम मांग बढ़ने पर करेली और करेलाबाग सबस्टेशन पर 44 एमबीए तक का लोड पड़ जाता है। 18 लाख मिलियन यूनिट की खपत हर महीने हो रही है। राजस्व 1.50 करोड़ रुपये ही मिल पाता है, जबकि 4.50 करोड़ की प्राप्ति होनी चाहिए।

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इलाके में 36 फीसदी उपभोक्ताओं (तकरीबन पांच हजार) का बिल जमा हो पा रहा है। इलाहाबाद मंडल में सबसे ज्यादा करेली सबस्टेशन में ही 76 फीसदी लाइनलॉस है। इलाके में विद्युत चोरी जबरदस्त है। लोग हीटर का खूब इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसके चलते इस इलाके में घाटे का सामना करना पड़ रहा है। उधर, स्थानीय लोगों का आरोप है कि  जिन इलाकों में ट्रांसफार्मर जल रहे हैं, वहां से नए स्थापित हो रहे इलाकों में कनेक्शन दे दिया जाता है। इसके चलते ट्रांसफार्मर पर लोड बढ़ जाता है और वह जल जाता है। आए दिन ट्रांसफार्मर फुंकने से लोगों की  परेशानी बढ़ गई है।

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