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UP : सरकारी सहायता प्राप्त निजी विद्यालयों के कर्मचारी भी पेंशन के हकदार, चार माह में लाभ देने का आदेश

Mon, 22 Jul 2024 04:15 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 22 Jul 2024 04:15 PM IST
सार

कोर्ट ने बीएसए के आदेश के खिलाफ हाइकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याची के अधिवक्त राम कृष्ण यादव में दलील दी कि मैनपुरी स्थित मन्नी लाल पांडेय शिक्षा निकेतन जूनियर हाइस्कूल मार्च 1997 से सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालय है।

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Employees of government aided private schools are also entitled to pension, order to give benefits in four mon
अदालत - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि 1964 की पेंशन नियमावली के दायरे में आने वाले राजकीय वित्तीय सहायता प्राप्त निजी विद्यालयों के कर्मचारी भी पेंशन पाने के हकदार है। यह फैसला न्यायमूर्ति प्रकाश पाड़िया की एकल पीठ ने मैनपुरी के एक जूनियर हाइस्कूल से सेवानिवृत लिपिक धामी लाल शाक्य याचिका स्वीकार करते हुए सुनाया है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) मैनपुरी ने याची को पेंशन योजना का लाभ देने से यह कहते हुए इंकार कर दिया कि 1997 से पहले विद्यालय स्व वित्तपोषित था। इस दौरान वर्ष 1982 से 1997 तक याची का प्रबंधकीय अंशदान भी जमा नहीं है।

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कोर्ट ने बीएसए के आदेश के खिलाफ हाइकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याची के अधिवक्त राम कृष्ण यादव में दलील दी कि मैनपुरी स्थित मन्नी लाल पांडेय शिक्षा निकेतन जूनियर हाइस्कूल मार्च 1997 से सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालय है। याची की नियुक्ति 1972 में लिपिक के पद पर हुई थी। अक्टूबर 1982 में इनकी सेवाएं स्थाई हो गई। इसके बाद 20 मार्च 1997 में विद्यालय की सरकारी सहायता प्राप्त होने के बाद याची का प्रबंधकीय अंशदान 1998 से 2001 यानि सेवानिवृति तक कटा गया था। लेकिन 1982 से 1997 तक तक प्रबंधकीय अंशदान जमा नहीं हुआ।
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नतीजन, सेवानिवृति के बाद बीएसए ने उसे पेंशन में योजना के लाभ से वंचित कर दिया। जबकि याची अंशदान अदा करने को तैयार है। सरकार ने 5 फरवरी 2017 को जारी शासनादेश के जरिए अंशदान जमा करने की समय सीमा भी बढ़ाई है। याची पेंशन नियमावली 1964 के दायरे में आता है। फिर भी याची को अंशदान जमा करने की इजाजत और पेंशन योजना का लाभ न दिया जाना अवैधानिक और मनमाना है।

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लिहाजा, कोर्ट ने बुद्धिराम के मामले में स्थापित विधि व्यवस्था का हवाला देते हुए याचिका स्वीकार कर ली। कहा कि पेंशन योजना का लाभ पाने के हकदार वह सभी लोग हैं जो 1964 की पेंशन नियमावली के दायरे में आते हैं। कोर्ट ने याची को दो माह के भीतर ब्याज समेत अंशदान जमा करने की मोहलत दी है। साथ ही सरकार को आदेश दिया है कि अंशदान जमा होने के बाद चार माह में याची की पेंशन योजना का लाभ प्रदान किया जाए।

उत्तर प्रदेश सरकार ने 1964 से ऐसे शासकीय सहायता प्राप्त निजी विद्यालयों के अध्यापकों व कर्मचारियों को भी पेंशन देने का निर्णय लिया था जो मान्यता प्राप्त थे। इस बबात 22 मई 2006 के शासनादेश में अंशदान जमा करने के लिए कट ऑफ डेट जारी की गई थी। इसके बाद हाइकोर्ट के आदेश के अनुपालन में यह समय सीमा 5 फरवरी 2017 के शासनादेश से बढ़ा दी गई थी। गौरतलब है कि अंशदान (जीपीएफ/सीपीएफ) जमा करने वाले कर्मचारी ही पेंशन योजना का लाभ पा सकते है। सरकारी सहायता प्राप्त निजी विद्यालयों के शैक्षणिक और गैर शैक्षणिक कर्माचरियों की समान रूप इस योजना का लाभ पाने के अधिकारी है।

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