ईद-उल-अजहा : बकरीद के बाजार में आकर्षण का केंद्र बना रहा 100 किलो का बकरा
बाजार में दस हजार से लेकर एक लाख रुपये तक के बकरे बिके। शनिवार को मंडियों में सुबह से ही खरीदारों की भारी भीड़ जुटी। लोगों ने अपनी पसंद और हैसियत के मुताबिक बकरों की खरीदारी की। बाजार में चारों ओर खरीदारों और व्यापारियों के बीच मोलभाव का सिलसिला जारी रहा।
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कई दिनों से जो लोग कई-कई बकरा मंडियों का चक्कर लगा रहे थे, उन्होंने आखिर मोलभाव के बाद शनिवार को बकरा खरीद ही लिया। कुर्बानी के एक दिन पहले बकरों का बाजार परवान चढ़ा। बकरों के ऊंची कीमत से लोग आंख चुराते नजर आए लेकिन जैसे-जैसे शाम ढलती गई, बाजार में बकरों की कीमतों में कुछ कमी आई। हालांकि तब भी बकरों की कीमतें बीते वर्ष की तुलना में सवा से डेढ़ गुना तक ज्यादा ही रहीं।
बाजार में दस हजार से लेकर एक लाख रुपये तक के बकरे बिके। शनिवार को मंडियों में सुबह से ही खरीदारों की भारी भीड़ जुटी। लोगों ने अपनी पसंद और हैसियत के मुताबिक बकरों की खरीदारी की। बाजार में चारों ओर खरीदारों और व्यापारियों के बीच मोलभाव का सिलसिला जारी रहा।
इस बीच हटिया की बकरा मंडी में लगभग 100 किलो वजन का राजस्थानी तोतापरी बकरा सभी के बीच आकर्षण का केंद्र बना रहा। बाजार में बकरों के साथ ही दुंबा की भी तलाश होती रही। चौक नखासकोहना, हटिया, दरियाबाद, करेली और रसूलपुर के बाजारों में आधी रात के बाद तक भीड़ जुटी रही। मुहंमांगी कीमतों पर बकरे बिके तो गांव से आए छोटे कारोबारियों ने थोड़े से फायदे पर भी बकरे बेचे।
बकरा मंडियों से इतर मोहल्लों के सड़क-चौराहों पर गांव से आए छोटे कारोबारी अपने-अपने बकरों को साथ लेकर घूमते रहे। बकरा मंडियों में ग्रामीण क्षेत्रों सहित कौशाम्बी, प्रतापगढ़, भदोही, राजस्थानी तोतापरी नस्लों के बकरों की खरीदारी जारी रही।
महंगाई का भी दिखा असर
बकरा मंडी में मौजूद खरीदारों पर बढ़ती मंहगाई का भी असर साफ दिखा। हटिया स्थित बकरा मंडी में यमुनापार से बकरा खरीदने आए सैफ मोहम्मद ने बताया कि बाजार चढ़ी हुई है। बीते वर्ष जो बकरा 15 हजार में आसानी से मिल जाया करता था, इस बार उसकी कीमत 20 हजार रुपये तक पहुंच चुकी है। वहीं स्थानीय बकरा मंडी के कारोबारियों का कहना है कि महंगाई की वजह से बीते वर्ष तक जो ग्राहक चार बकरे खरीदते थे, इस बार वही ग्राहक दो ही बकरे खरीद रहे हैं। दर्असल ज्यादातर बकरा व्यापारी दूर-दराज से आते हैं। ऐसे में ट्रांसपोर्ट तथा ट्रेड टैक्स के साथ यहां रुकने और जानवरों के चारे के दाम आदि को जोड़ने के बाद बकरे की कीमत बढ़ जाती है। यही वजह है कि बकरे के दाम बीते वर्षों की तुलना में अधिक बढ़ गए हैं।
सेवंई और मेवे मसाले भी खरीदे गए
बकरीद पर मेहमानों की खातिरदारी के लिए कुर्बानी के गोश्त के साथ-साथ लजीज सेवइंयां और अन्य तरह के पकवान भी पकाए जाएंगे। ऐसे में बकरों के अतिरिक्त तरह तरह की सेवइंयंा, मेवे-मसाले भी खरीदे गए। इसके अतिरिक्त मेहमानों की खातिर प्लेट, प्यालियां, डिनर सेट की भी खरीद की गई। ज्यादातर घरों के पर्दे और सोफे के कुशन भी बदले गए।
चाकू, छुरिंयों पर धार चढ़वाने को रही बेताबी
बकरीद के पहले हर कोई चाकू, छुरियों पर धार चढ़वाने को बेताब दिखा। पूरे दिन नूरुल्लाह रोड, गुलाबबाड़ी, खुल्दाबाद आदि जगहों पर चाकू, छुरियों पर धार चढ़वाने के लिए दुकानों पर भीड़ जमा रही। यहां लोग चाकू, छुरियों पर धार चढ़वाने के लिए बेताब दिखे। वहीं अधिकतर लोगों ने कुर्बानी के लिए नई चाकू और छुरियां खरीदीं। बकरा मंडियों के बाहर चाकू, छुरी की दुकानें सजी रहीं।
हिस्से के लिए मदरसों में हुई बुकिंग
बकरों के अतिरिक्त बड़े जानवरों की कुर्बानी भी कराई जाएगी। इसके लिए खासतौर पर मदरसों की ओर से हिस्सा की बुकिंग की गई है। वैसे भी सभी जानवरों की खाल पर मदरसों का हक होता है, सो खालें मदरसों को ही तकसीम की जाएंगी।
होती रही चिकवों की बुकिंग
बकरों को जिबह करने के लिए चिकवों की बुकिंग के लिए शनिवार को मारामारी रही। हर कोई एडवांस देकर बुकिंग तय कर लेना चाहता था ताकि ऐन वक्त पर कोई दिक्कत न आने पाए।