फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Effective with the approval of the application to convert the marital restoration case into divorce

हाईकोर्ट : वैवाहिक पुनर्स्थापन केस को तलाक में तब्दील करने की अर्जी मंजूरी से प्रभावी

Mon, 21 Nov 2022 10:14 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 21 Nov 2022 10:14 PM IST
सार

कोर्ट ने कहा परिवार अदालत आगरा की ओर से संशोधन अर्जी निरस्त करना सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विपरीत है। हाईकोर्ट ने प्रधान न्यायाधीश परिवार अदालत आगरा के संशोधन अर्जी खारिज करने के 28 जूलाई 22 के आदेश को रद्द कर दिया।

विज्ञापन
Effective with the approval of the application to convert the marital restoration case into divorce
Allahabad High Court - फोटो : social media

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि परिवार अदालत में विवाह पुनर्स्थापित करने के मुकदमे को तलाक केस में तब्दील करने की संशोधन अर्जी, मंजूर होने की तारीख से प्रभावी होगी। यह कहना सही नहीं है कि संशोधन अर्जी मंजूर हुई तो मुकदमा दाखिल होने की तिथि से संशोधन माना जाएगा। साथ ही परिवार अदालत कानून की धारा 14 में शादी के एक वर्ष के भीतर तलाक अर्जी दाखिल करने पर रोक प्रभावित होगी।

विज्ञापन



कोर्ट ने कहा परिवार अदालत आगरा की ओर से संशोधन अर्जी निरस्त करना सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विपरीत है। हाईकोर्ट ने प्रधान न्यायाधीश परिवार अदालत आगरा के संशोधन अर्जी खारिज करने के 28 जूलाई 22 के आदेश को रद्द कर दिया। मुकद्दमे को तलाक केस में संशोधित करने की अर्जी मंजूर करते हुए अपीलार्थी को तीन हफ्ते में वाद संशोधित करने की छूट दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति एसपी केसरवानी तथा न्यायमूर्ति राजेन्द्र कुमार की खंडपीठ ने विकल्प चतुर्वेदी की अपील को स्वीकार करते हुए दिया है।

विज्ञापन

मामले मेें परिवार अदालत आगरा में अपनी पत्नी शिखा चतुर्वेदी के खिलाफ  वाद दायर किया। दोनों की शादी नौ दिसंबर 20 को हुई थी। 31अगस्त 21 को केस दायर करके धारा 13 तलाक केस मानने की अर्जी दी जिसे परिवार अदालत ने यह कहते हुए 28 जुलाई 22 को खारिज कर दिया कि अर्जी मंजूर हुई तो केस दाखिले की तिथि से तलाक केस माना जाएगा।


धारा 14 शादी के एक वर्ष के भीतर तलाक केस बाधित करती है, इसलिए अर्जी मंजूर नहीं की जा सकती। हाईकोर्ट ने कहा, विचाराधीन वाद में संशोधन अर्जी मंजूर होने की तिथि से प्रभावी होगी न कि केस दाखिल होने की तिथि से। इसलिए धारा 14 इस मामले में लागू नहीं होगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed