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हाईकोर्ट को नजरअंदाज कर कैसे लखनऊ में बना रहे अधिकरणअध्किरणों के गठन पर सरकार बताए अपनी नीति

Sat, 17 Aug 2019 01:12 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 17 Aug 2019 01:12 AM IST
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Eduacation Tribunal
प्रयागराज। शिक्षा सेवा अधिकरण स्थापित करने के मुद्दे पर इलाहाबाद हाईकोर्ट और लखनऊ खंडपीठ के वकीलों की हड़ताल पर गंभीर रुख अपनाते हुए हाईकोर्ट ने मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए इस पर जनहित याचिका कायम कर ली है। कोर्ट ने हड़ताल के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार मानते हुए प्रमुख सचिव माध्यमिक, बेसिक शिक्षा और प्रमुख सचिव विधि एवं न्याय को नोटिस जारी कर बताने के लिए कहा है कि अधिकरणों के गठन पर सरकार का नजरिया क्या है। कोर्ट ने जानना चाहा है कि हाईकोर्ट की प्रधानपीठ को नजरअंदाज कर दूसरे स्थान पर अधिकरण क्यों बनाया जा रहा है। इसके पीछे सरकार का क्या इरादा है। पीठ ने हाईकोर्ट बार एसोसिएशन और अवध बार एसोसिएशन सहित अन्य अधिवक्ता संगठनों को भी नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। इस मामले को लेकर जनहित याचिका के तौर पर दर्ज करते हुए सुनवाई के लिए मुख्य न्यायाधीश को संदर्भित कर दिया है। याचिका पर 30 अगस्त को अगली सुनवाई होगी।
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शुक्रवार सुबह दस बजे जब न्यायालय की कार्यवाही प्रारंभ हुई तो कक्ष संख्या 34 में बैठे न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति राजीव मिश्र की खंडपीठ की अदालत में कुछ सरकारी वकीलों और स्टाफ को छोड़कर कोई मौजूद नहीं था। कारण पूछने पर कोर्ट को बताया गया कि शिक्षा अधिकरण के गठन को लेकर इलाहाबाद और लखनऊ के वकील शुक्रवार को भी न्यायिक कार्य से विरत हैं। इसे गंभीरता से लेते हुए पीठ ने कहा कि सरकार जब हाईकोर्ट से मुकदमों का भार कम करने के लिए अधिकरण गठित कर रही है तो उसे हाईकोर्ट की प्रधानपीठ से दूर बनाकर वादकारियों की पहुंच से हाईकोर्ट को दूर कर रही है। वादकारियों को ऐसी विपरीत परिस्थिति में नहीं डाला जाना चाहिए। कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि किन परिस्थितियों में अधिकरण सिर्फ एक स्थान पर बनाने का निर्णय लिया गया वह भी हाईकोर्ट की प्रधानपीठ को नजरअंदाज करके। कोर्ट ने जीएसटी न्यायाधिकरण गठन को लेकर दो खंडपीठों में मतभिन्नता के मुद्दे सहित शिक्षा सेवा अधिकरण के मुद्दे पर वृहदपीठ गठित कर विवाद का हल निकालने का आदेश दिया है।
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