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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Each plot will be on a single click, the dispute will be less

एक क्लिक पर होगा हर भूखंड का नक्शा, कम होंगे विवाद

Wed, 07 Feb 2018 11:41 PM IST
इलाहाबाद ब्यूरो
इलाहाबाद ब्यूरो Updated Wed, 07 Feb 2018 11:41 PM IST
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मंडल में हर तरह की जमीन का नक्शा एक क्लिक पर सामने होगा। नक्शा, खतौनी समेत जमीन के अन्य डॉक्यूमेंट ऑनलाइन किए जा रहे हैं। मंडल में 75 फीसदी भूखंडों की खतौनी की स्कैनिंग हो चुकी है। इसके साथ ग्राम सभा के बाउंड्री पीलर की स्थिति भी ऑनलाइन की जा रही है। यह काम इस वर्ष के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे जमीन संबंधी विवाद में कमी आने के दावे किए जा रहे हैं।
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जमीन संबंधी ज्यादातर विवाद सीमांकन को लेकर हैं। ज्यादातर जगहाें पर तो गांव की बाउंड्री को ही लेकर विवाद हैं। ऑनलाइन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ये विवाद खत्म होने के दावे किए जा रहे हैं। अपर आयुक्त प्रथम पीके अग्रवाल ने बताया कि बाउंड्री पीलर ऑनलाइन करने का काम 90 फीसदी तक हो गया है। इस साल के अंत तक ऑनलाइन करने की पूरी प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। इसके बाद नए विवादों में काफी कमी आ जाएगी।
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मौके पर ही तय हो जाएगा मालिकाना हक
मंडल में कुल 7832 राजस्व गांव हैं। इनमें से इलाहाबाद में 3177, कौशाम्बी में 2264, प्रतापगढ़ में 2264 और फतेहपुर में 1552 राजस्व गांव हैं। मंडल में कुल 20923 बाउंड्री पीलर हैं। सर्वे का काम अभी जारी है। ऐसे में यह संख्या अभी बढ़ेगी। पीलर का पोजिशन ऑनलाइन करने के साथ संबंधित गांव की जमीन का पूरा विवरण तय हो जाएगा। इसे ऑनलाइन देखा जा सकेगा। यानी, किसी नंबर की जमीन का वास्तविक स्थिति क्या है यह ऑनलाइन पता चल जाएगा। इसकी मदद से मौके पर ही जमीन की बाउंड्री निर्धारित की जा सकेगी। इससे कानूनगो, लेखपाल की मनमानी पर भी रोक लगेगी।
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दस्तावेज जुटाना है चुनौती
जमीन की खतौनी तथा अन्य दस्तावेज लेखपाल के पास होते हैं। इनके अलावा तहसील और राजस्व परिषद में इनकी प्रति होती है लेकिन वर्षों पुराने कागजातों को खोजना और उनकी स्कैनिंग चुनौती बनी हुई है। बहुत से दस्तावेज गल चुके हैं तो उनमें लकीरें भी पड़ गई हैं। इससे सीमांकन कठिन हो गया है। तकरीबन पांच फीसदी जमीन के दस्तावेज भी नहीं मिल रहे। इसकी वजह से ऑनलाइन की प्रक्रिया में देरी हो रही है।
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