ड्रॉप्सी का प्रकोप : एसआरएन में गहन चिकित्सा कक्ष में भर्ती मरीजों की 24 घंटे निगरानी, मरीजों की फूल रही सांस
मिलावटी तेल खाने से ड्रॉप्सी नामक खतरनाक बीमारी से जूझ रहे दो सगे भाइयों की हालत में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। शुक्रवार को इंद्र कुमार की सांस फूलने लगी। जबकि उसके भाई रामकुमार को बोलने दिक्कतें हो रही हैं।
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मिलावटी तेल खाने से ड्रॉप्सी नामक खतरनाक बीमारी से जूझ रहे दो सगे भाइयों की हालत में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। शुक्रवार को इंद्र कुमार की सांस फूलने लगी। जबकि उसके भाई रामकुमार को बोलने दिक्कतें हो रही हैं। हालांकि चिकित्सकों की टीम की कोशिशों के बाद उनकी हालत स्थिर हो गई है। उधर, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. आशु पांडेय ने महानिदेशक स्वास्थ्य को इस मामले की रिपोर्ट भेज दी है।
मऊआइमा और सोरांव के बीच स्थित हरखपुर जोगीपुर गांव में ड्राप्सी से एक ही परिवार के मुखिया समेत तीन लोगों की मौत को लेकर स्वास्थ्य विभाग में लखनऊ तक हड़कंप मचा हुआ है। इस मामले में महानिदेशक स्वास्थ्य डॉ. लिली सिंह ने मुख्य चिकित्साधिकारी से मरीजों की स्थिति के साथ ही बीमारी फैलने के कारणों की जानकारी ली है। सीएमओ ने गोरखपुर की प्रयोगशाला में पीड़ित परिवार के घर से लिए गए सरसो तेल के नमूने की जांच रिपोर्ट से अवगत करा दिया है।
उन्होंने महानिदेशक को जांच रिपोर्ट भेज दी। महानिदेशक को भेजी गई सीएमओ की रिपोर्ट में भी घरेलू सरसों के तेल में भटकटैया (आर्जीमोन) के बीज का अंश मिलने की बात कही गई है। खेत में राई के बीच भटकटैयी के बीज किसी तरह आकर मिलने की बात कही गई है। जिससे पेराई के बाद सरसो के तेल में आर्जीमोन टॉक्सीन मिल गया। इसी तेल से बनी सब्जी खाने से सहदेव और उसके परिवार के आठ सदस्यों की हालत बिगड़ने की बात कही जा रही है।
उधर, शुक्रवार को स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल के मेडिसिन विभाग के आईसीयू में गहन चिकित्सा निगरानी में भर्ती रामकुमार और उसके भाई इंद्र कुमार की सांसें फूलने लगीं। रामकुमार को बोलने में दिक्कत हो रही थी। इन मरीजों का उपचार करने वाले चिकित्सा दल का नेतृत्व कर रहे डॉ. जितेंद्र शुक्ला ने बताया कि अब उनकी हालत में सुधार आ रहा है। इसी के साथ रामकुमार की पत्नी और दो बच्चों की भी हालत में सुधार आने की बात कही जा रही है, लेकिन उन्हें भी निगरानी में रखा गया है।
क्या है ड्रॉप्सी के लक्षण
डॉ. जितेंद्र शुक्ला के मुताबिक सांस फूलना, शरीर में सूजन, मांसपेसियों में दर्द के साथ ही त्वचा पर चकत्ते आना और खून की कमी हो जाना और विपर खराब हो जाना इस बीमारी के लक्षण हैं। इसका कोई इलाज भी नहीं है। धीरे -धीरे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने के साथ ही मरीज का हालत में सुधार आता है।