हाईकोर्ट : केवल मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर रद्द नहीं हो सकती दहेज हत्या की एफआईआर, आरोपी को लगा झटका
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि विवाह के सात वर्षों में संदिग्ध मौत होने पर केवल दिल के दौरे की चिकित्सा रिपोर्ट से कार्रवाई रद्द नहीं होगी।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि विवाह के सात वर्षों में संदिग्ध मौत होने पर केवल दिल के दौरे की चिकित्सा रिपोर्ट से कार्रवाई रद्द नहीं होगी। यह टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने दहेज हत्या के मामले में लंबित मुकदमे की पूरी कार्यवाही, चार्जशीट और समन आदेश को रद्द करने की मांग में दायर याचिका खारिज कर दी। यह आदेश न्यायमूर्ति चवन प्रकाश की एकल पीठ ने निर्मला देवी की याचिका पर दिया है।
फिरोजाबाद निवासी याची के बेटे के साथ प्रतिभा यादव उर्फ पूजा का विवाह 4 मई 2021 को हुआ था। शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप था कि शादी के समय और बाद में कुल 23.25 लाख रुपये से अधिक का दहेज दिए जाने के बावजूद प्रतिभा को प्रताड़ित किया जाता रहा था। फरवरी 2025 की रात प्रतिभा अपने ससुराल में बेहोश पाई गई। इसके बाद उसे इलाज के लिए आगरा के अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 25 फरवरी 2025 को उसकी मृत्यु हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण हार्टअटैक बताया गया था। इस आधार पर आरोपी पक्ष ने हाईकोर्ट ने याचिका दायर कर मुकदमे की पूरी कार्यवाही रद्द करने की मांग की।
याची का तर्क था कि यह एक प्राकृतिक मौत थी और इस पर दहेज हत्या की धाराएं लागू नहीं होतीं। ऐसे में पूरी कार्यवाही रद्द की जानी चाहिए। हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए टिप्पणी की कि यदि शादी के कुछ ही वर्षों के भीतर किसी युवती को प्रताड़ना के बीच अस्पताल लाया जाता है, तो शुरुआती चरण में यह मान लेना सही नहीं होगा कि मौत पूरी तरह प्राकृतिक थी। शारीरिक तनाव और मानसिक प्रताड़ना भी हृदय संबंधी आघात (कार्डियोजेनिक शॉक) का कारण बन सकती है। अदालत ने कहा कि मेडिकल परिस्थितियां प्राकृतिक थीं या प्रताड़ना से उत्पन्न हुई थीं, यह विषय साक्ष्य और ट्रायल की प्रक्रिया का हिस्सा है।