Doctors Day :चिकित्सक दंपती बने सेवा की मिसाल, घर से बेहतर बनाया अस्पताल
डॉक्टर्स डे पर ऐसे चिकित्सक दंपती की कहानियां दूसरों के लिए प्रेरक साबित होंगी।जिस तरह हर मरीज को उम्मीद होती है, कि डॉक्टर उनके जीवन की रक्षा करेंगे और उन्हें बीमारी से बचाएंगे, उसी तरह शहर के कुछ चिकित्सकों ने मरीजों की देखभाल में अपना जीवन समर्पित कर दिया है।
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सेवा -समर्पण की मिसाल शहर के कुछ चिकित्सक दंपतियों से मिलिए। इनके लिए घर-परिवार बाद में अस्पताल और मरीज सर्वोपरि हैं। पति-पत्नी के रूप में जितना बेहतर घर-परिवार चलाते हैं, उससे कई गुना अधिक उनका समर्पण अस्पताल के प्रति होता है। डॉक्टर्स डे पर ऐसे चिकित्सक दंपती की कहानियां दूसरों के लिए प्रेरक साबित होंगी।जिस तरह हर मरीज को उम्मीद होती है, कि डॉक्टर उनके जीवन की रक्षा करेंगे और उन्हें बीमारी से बचाएंगे, उसी तरह शहर के कुछ चिकित्सकों ने मरीजों की देखभाल में अपना जीवन समर्पित कर दिया है।
इसका जीता-जागता उदाहरण कोरोना संक्रमण के दौरान देखने को मिल चुका है। प्रयागराज में ऐसे चुनिंदा चिकित्सक पति-पत्नी लोगों के लिए मिसाल हैं। उनके सामने कई प्रकार की चुनौती भी होती है। कई ऐसे मौके आते हैं, जब इन जोड़ों को अपने बच्चों और मरीज में से किसी एक को चुनना होता है। फिर भी अपने काम के प्रति समर्पण से यह चिकित्सक समाज के सामने कर्तव्य निष्ठा की एक अनोखी मिसाल प्रस्तुत कर रहे हैं। कुछ ऐसे ही चिकित्सक जोड़े नजीर के तौर पर हैं।
डॉ. वत्सला मिश्रा और डॉ. एसपी मिश्रा
मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ. वत्सला मिश्रा और उनके पति डॉ. एसपी मिश्रा शहर के जाने माने गैस्टोलॉजिस्ट हैं। वर्तमान में वह स्वरूप रानी नेहरू चिकित्साल में गैस्ट्रो के विभागाध्यक्ष हैं। इनके दो बच्चे हैं, जिसमें एक बेटा और एक बेटी है। चिकित्सा के क्षेत्र में कई बड़ी उपलब्धियां हासिल करने वाले इस जोड़े ने अपने परिवार से ज्यादा अपने काम को महत्व दिया। डॉ. एसपी मिश्रा को काम के सिलसिले में हमेशा घर के बाहर रहना पड़ता था। वहीं डॉ. वत्सला मिश्रा भी व्यस्तता के कारण अपने बच्चों को समय नहीं दे पाती थी। मगर यह कभी अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटे।
डॉ. मोहित जैन व डॉ. रितु जैन
एमएलएन मेडिकल कॉलेज में प्लास्टिक सर्जरी विभाग के अध्यक्ष डॉ. मोहित जैन व उनकी कमला नेहरू मेमोरियल हॉस्पिटल में बाल रोग विशेषज्ञ पत्नी डॉ. रितु जैन पिछले 20 वर्षों से चिकित्सा के क्षेत्र में हैं। डॉ. मोहित जैन बताते हैं, कि अगर उनकी पत्नी का सपोर्ट न होता, तो वह कोरोना संक्रमण के दौरान अपनी सेवाएं न दे पाते। उनकी पत्नी दिन में तीन बजे हॉस्पिटल से लौटने के बाद सिर्फ बच्चों और परिवार को समय देती थीं। ऐसे में डॉ. मोहित जैन कई-कई दिनों तक घर से दूर रहकर कोरोना संक्रमित मरीजों की देखभाल करने में लगे रहते थे।
डॉ. अमित कुमार सिंह व डॉ. विभा सिंह
एमएलएन मेडिकल कॉलेज में न्यूरो सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ. अमित कुमार सिंह व पत्नी डॉ. विभा सिंह जो कि मनोहर दास नेत्र चिकित्सालय में नेत्र रोग विशेषज्ञ हैं। इनका मानना है, कि अगर पति-पत्नी एक ही फील्ड के हों, तो तालमेल मजबूत होता है और कई परेशानियां हल होती हैं। डॉ. अमित सिंह ने ऐसा ही एक वाकया बताया कि करीब दो वर्ष पहले एक बच्ची अस्पताल में लाई गई, जिसके सिंर पर गोली मारी गई थी। गोली बांई आंख से होते हुए दाई आंख के पास अटकी थी। ऐसे में यह ऑपरेशन काफी कठिन था। इस दौरान पत्नी डॉ. विभा सिंह के सहयोग से ऑपरेशन सफल हो सका।