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Prayagraj News: विदेशी बाजार में बेदम हुआ दोआबा का लाल सुर्खा

Mon, 27 Jul 2026 01:52 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज Updated Mon, 27 Jul 2026 01:52 AM IST
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Doabas Lal Surkha loses steam in foreign markets.
दोआबा की शान जीआई टैग प्राप्त इलाहाबादी लाल सुर्खा अमरूद अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। पैदावार कम होने से अब यह विदेशी बाजारों में बेदम हो चुका है। कभी अपनी खास मिठास, गुलाबी गूदे, बड़े आकार और कम बीज के कारण खाड़ी देशों और यूरोप के बाजारों में इसकी अलग पहचान थी।
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प्रयागराज की मंडियों से विदेश तक जाने वाला लाल सूर्खा का निर्यात पिछले दो साल से ठप है। कृषि विपणन विभाग के अनुसार, वर्ष 2024-25 और 2025-26 में लाल सुर्खा का निर्यात नहीं हुआ। वर्ष 2023-24 में 17.25 मीट्रिक टन अमरूद विदेश भेजा गया था। एक समय प्रयागराज और कौशाम्बी के बागों से निकला लाल सुर्खा ओमान, संयुक्त अरब अमीरात (दुबई), कतर, बहरीन, सऊदी अरब, इंग्लैंड और नेपाल तक पहुंचता था।
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वर्ष 2005 से 2015 के बीच हर सीजन में इसकी खेप विदेश भेजी जाती थी। पिछले दो दशक से पैदावार लगातार घटने से अब निर्यात पूरी तरह थम गया है। अमरूद की जगह चावल, मूंगफली और हरी मिर्च ने विदेशी बाजार में पकड़ मजबूत की है। पिछले वर्ष दोआबा के चावल (19,172.86 मीट्रिक टन), मूंगफली (398 मीट्रिक टन) और हरी मिर्च (86.10 मीट्रिक टन) का दुबई, कतर, ओमान और नेपाल में निर्यात किया गया था।
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इस कारण घटी सुर्खा अमरूद पैदावार
कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, पुराने बागों का नवीनीकरण नहीं होना, तेजी से बढ़ता शहरीकरण, किसानों का अधिक लाभ देने वाली फसलों की ओर रुख, जलवायु परिवर्तन, अनियमित बारिश, कीट एवं रोगों का बढ़ता प्रकोप, कोल्ड चेन और आधुनिक पैक हाउस जैसी सुविधाओं का अभाव इस संकट की बड़ी वजह हैं। प्रयागराज और कौशाम्बी में बड़ी संख्या में अमरूद के बाग खत्म हो गए हैं। इसका रकबा लगातार कम होता जा रहा है।

पिछले दो वर्षों में पैदावार में कमी और निर्यात योग्य गुणवत्ता वाले फलों की उपलब्धता घटने से लाल सुर्खा का निर्यात नहीं हो सका। विभाग किसानों को गुणवत्तापूर्ण उत्पादन, वैज्ञानिक बागवानी और निर्यात मानकों के प्रति जागरूक कर रहा है।
-दिनेश चंद्र, सहायक कृषि विपणन अधिकारी

लाल सुर्खा का गिरता निर्यात
2023-24 : 17.25 मीट्रिक टन
2024-25 : शून्य
2025-26 : शून्य
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