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हाईकोर्ट : ध्वनि नियमों का पालन हो तो पांचों वक्त अजान में बाधा न डालें, हाईकोर्ट ने दिया आदेश

Wed, 07 Oct 2026 04:24 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 07 Oct 2026 04:24 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सहारनपुर की आयशा मस्जिद में पांचों वक्त अजान अदा करने के अधिकार में पुलिस और जिला प्रशासन को अनावश्यक हस्तक्षेप न करने का निर्देश दिया है। 

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Do not obstruct Azaan five prayer times if noise regulations being followed; High Court issues order.
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सहारनपुर की आयशा मस्जिद में पांचों वक्त अजान अदा करने के अधिकार में पुलिस और जिला प्रशासन को अनावश्यक हस्तक्षेप न करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अजान के दौरान लाउडस्पीकर का इस्तेमाल ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 और हाईकोर्ट के पूर्व के फैसले में निर्धारित शर्तों के अनुसार ही किया जा सकता है। नियमों का पालन करने का आश्वासन देने पर प्रशासन अजान में बाधा नहीं डालेगा।

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यह आदेश न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने शानवाज खान और पांच अन्य की ओर से दाखिल याचिका का निस्तारण करते हुए यह आदेश दिया। याचिकाकर्ताओं ने आयशा मस्जिद में दिन में पांच बार अजान देने और इसके लिए लाउडस्पीकर के इस्तेमाल की अनुमति मांगी थी। उनका कहना था कि लाउडस्पीकर के इस्तेमाल की अनुमति से संबंधित न्यायिक आदेशों के बावजूद अधिकारी उन्हें अजान के लिए इसका इस्तेमाल नहीं करने दे रहे हैं।
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राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि याचिकाकर्ताओं को अजान देने से नहीं रोका जा रहा है। प्रतिबंध केवल लाउडस्पीकर के इस्तेमाल के तरीके को लेकर है। ध्वनि प्रदूषण नियमों में लाउडस्पीकर के लिए अनुमन्य ध्वनि स्तर तथा उसके इस्तेमाल की समय सीमा निर्धारित है, जिसका पालन करना आवश्यक है।
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राज्य ने 2020 में अफजल अंसारी व अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व अन्य मामले में हाईकोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि अजान इस्लाम का अनिवार्य और अभिन्न हिस्सा हो सकती है, लेकिन लाउडस्पीकर या अन्य ध्वनि विस्तारक उपकरण से अजान देना धर्म का अभिन्न हिस्सा नहीं माना गया है। अदालत ने उस फैसले में यह भी स्पष्ट किया था कि ध्वनि विस्तारक उपकरणों का इस्तेमाल सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य से संबंधित संवैधानिक प्रावधानों तथा ध्वनि प्रदूषण नियमों के अधीन है।


रात दस बजे से सुबह छह बजे तक इनके इस्तेमाल की अनुमति नहीं दी जा सकती। वर्तमान मामले में याचिकाकर्ताओं ने नियमों और पूर्व के न्यायिक निर्देशों का उल्लंघन नहीं करने का आश्वासन दिया। कोर्ट ने उन्हें अपने हस्ताक्षरयुक्त नोटरीकृत हलफनामे के साथ आवेदन दाखिल करने को कहा। इसके बाद पुलिस और जिला प्रशासन को पांचों वक्त अजान में हस्तक्षेप नहीं करने का निर्देश दिया गया। हालांकि, नियमों या हलफनामे में दिए आश्वासन का उल्लंघन होने पर अधिकारियों को कानून के अनुसार कार्रवाई करने की स्वतंत्रता रहेगी।

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