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प्रभु राम की अयोध्या वापसी पर पहली बार मनी थी घर-घर दिवाली, इलाहाबाद संग्रहालय में सुरक्षित है साक्ष्य

Sat, 14 Nov 2020 02:15 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 14 Nov 2020 02:15 AM IST
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Diwali was the first money on the return of Lord Rama to Ayodhya, the evidence is safe in the Allahabad Museum
prayagraj news : इलाहाबाद संग्रहालय में सुरक्षित अयोध्या लौटने की श्रीराम, लक्ष्मण, सीता और हनुमान जी की मूर्ति। - फोटो : prayagraj
लंका विजय के बाद प्रभु श्रीराम की सीता समेत अयोध्या वापसी पर दिवाली मनाने के प्रमाण मिले हैं। रावण का वध कर माता सीता को मुक्त कराने के बाद भगवान राम की अयोध्या वापसी से जुड़ी एक दुर्लभ प्रतिमा इलाहाबाद संग्रहालय में इसके साक्ष्य के तौर पर सहेज कर रखी गई है। 1500 वर्ष पुरानी पांचवीं शताब्दी की इस प्रतिमा में भगवान राम के साथ लक्ष्मण, सीता, हनुमान और वानरों को दिखाया गया है। जानकारों के मुताबिक यह उस समय की प्रतीक प्रतिमा है, जब 14वर्ष के वनवास के बाद राम की वापसी की खबर मिलने पर अयोध्या को दीपमालाओं से सजाया गया था और घर-घर दिवाली मनाई गई थी।
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धनुष वाण धारण किए प्रभु श्रीराम, सीता और लक्ष्मण की इस प्रतिमा को कार्बन डेटिंग के आधार पर गुप्तकालीन बताया गया है। भगवान राम की अभय मुद्रा होने की वजह से भी इस प्रतिमा को अयोध्या वापसी के मूर्तिशिल्प केतौर पर जाना जाता है। सीता का पता लगाने और लंका पर विजय प्राप्त करने में अहम भूमिका निभाने वाले राम भक्त हनुमान की प्रतिमा भी अभयमुद्रा में है। आसपास पेड़, पौधे और फूलों के शिल्प भी दर्शाए गए हैं।
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इससे पता चलता है कि भगवान राम लंका को जीतने के बाद इसी वन शृंखला से होकर अयोध्या पहुंचे थे। इलाहाबाद संग्रहालय के प्रभारी शिक्षा राजेश कुमार मिश्र बताते हैं कि शृंगवेरपुर के पुरातात्विक स्थल से प्राप्त भगवान राम की यह इकलौती और दुर्लभ प्रतिमा है। इस प्रतिमा में लंका विजय के बाद भगवान राम की वापसी का दृश्य उकेरा गया है।
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वह बताते हैं कि राम की वापसी की पहली सूचना जब नंदीग्राम में रह रहे भरत को दी गई थी, तब के प्रसंगों को तुलसी दास ने भी रामचरित मानस की चौपाई में लिपिबद्ध किया है। इस प्रतिमा के संदर्भ में वह उत्तरकांड की उस चौपाई का भी उल्लेख करते हैं। रिपु रन जीति सुरन्ह जस गावत/सीता अनुज सहित प्रभु आवत...। उनका कहना है कि शत्रु को जीतने के बाद सीता और भाई लक्ष्मण के साथ भगवान राम की वापसी के सबसे दुर्लभ और खुशी के क्षणों के भावों को इस प्रतिमा में अभिव्यक्त किया गया है।

संग्रहालय के निदेशक डॉ सुनील गुप्ता के मुताबिक शृंगवेरपुर पुरातात्विक स्थल से प्राप्त इस प्रतिमा में भगवान राम की वापसी के प्रमाण मिलते हैं। भगवान राम की वापसी की जानकारी मिलने के बाद ही अयोध्या को फूलों, लताओं, रंगोलियों, अल्पनाओं और दीपमालिकाओं से सजाने के भी उल्लेख मिलते हैं। वर्ष 1921 संग्रहालय की स्थापना करने वाले पं बृजमोहन व्यास को यह प्रतिमा शृंगवेरपुर से प्राप्त हुई थी।
  • प्रभु श्रीराम की अयोध्या वापसी की घटना कितनी बड़ी खुशी की प्रतीक थी, उसका अंदाजा इस प्रतिमा से लगाया जा सकता है। यही वजह है कि राम की वापसी के दृश्यों को मूर्तिशिल्प के जरिए स्मृतियों में सहेजने और यादगार बनाने की कोशिश की गई थी। भगवान राम की यह प्रतिमा चंद्रगुप्त विक्रमादित्य मौर्य के काल की मानी जाती है। डॉ सुनील गुप्ता, निदेशक -इलाहाबाद संग्रहालय।
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