High Court : गोतस्करी से जुड़े वाहनों की जब्ती के खिलाफ सुनवाई का अधिकार मंडलायुक्त को
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश गोवध निवारण अधिनियम के तहत गोतस्करी से जुड़े वाहनों की जब्ती कार्रवाई के खिलाफ संभागीय आयुक्त (मंडलायुक्त) के समक्ष आपराधिक पुनरीक्षण पोषणीय है। भ्रमवश आरोपी सत्र अदालत या हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाते हैं।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश गोवध निवारण अधिनियम के तहत गोतस्करी से जुड़े वाहनों की जब्ती कार्रवाई के खिलाफ संभागीय आयुक्त (मंडलायुक्त) के समक्ष आपराधिक पुनरीक्षण पोषणीय है। भ्रमवश आरोपी सत्र अदालत या हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाते हैं। कोर्ट ने इस आदेश की प्रतियां सभी जिला अदालतों व न्यायिक प्रशिक्षण संस्थान को भेजने का आदेश दिया है, ताकि भविष्य में विधिक भ्रम की स्थिति न रहे।
यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति अनिल कुमार दशम की खंडपीठ ने नितेश कुमार की याचिका निस्तारित करते हुए दिया है। कोर्ट ने याची को संभागीय आयुक्त के समक्ष पुनरीक्षण दाखिल करने की छूट दी है। साथ ही आयुक्त को निर्देश दिया है कि याची की ओर से दाखिल पुनरीक्षण अर्जी को परिसीमा के प्रश्न को नजर अंदाज करते हुए गुण-दोष के आधार पर निस्तारित करें। क्योंकि, कोई भी न्यायिक या अर्ध-न्यायिक आदेश व्यक्ति को असहाय नहीं छोड़ सकता।
मामला बलिया का है। गोजातीय पशुओं के अवैध परिवहन के आरोप में याची के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी। बलिया के डीएम ने नोटिस जारी किया, लेकिन याची के जवाब को असंतोषजनक मानते हुए 22 मार्च 2025 के आदेश से उसका वाहन जब्त कर लिया गया। इस आदेश के खिलाफ याची ने हाईकोर्ट का रुख किया।
याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि याची दूध व्यवसायी है। वाहन का उपयोग दूध को लाने व ले जाने में होता है। पुलिसकर्मी अवैध वसूली के प्रयास में उसे परेशान करते हैं। मौजूदा कार्रवाई प्रतिशोध की भावना से की गई है और वाहन की जब्ती अवैध है। हालांकि, याचिका की पोषणीयता पर सवाल उठाते हुए अपर शासकीय अधिवक्ता ने सरकार की ओर से 15 अक्तूबर 2024 को जारी अधिसूचना का हवाला दिया।
कहा कि अब जब्ती आदेश के खिलाफ संभागीय आयुक्त के समक्ष पुनरीक्षण दायर किया जा सकता है। यह याचिका रिट क्षेत्राधिकार में पोषणीय नहीं है। कोर्ट ने कहा कि 15 अक्तूबर 2024 की अधिसूचना से पूर्व ऐसी कोई व्यवस्था नहीं थी, जिसे अब सुधार लिया गया है।