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Judicial Transparency : बर्खास्तगी और निलंबन ने बढ़ाया भरोसा, पांच माह में चार बर्खास्त, तेरह निलंबित

Thu, 29 Sep 2022 08:59 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 29 Sep 2022 08:59 PM IST
सार

न्यायिक अफसर उस सांचे में हैं, जो पदों के निर्वहन में ईमानदारी, कर्तव्य निष्ठा और भ्रष्टाचार से कोसों दूर हैं। अगर इस सांचे को भ्रष्टाचार अपनी आगोश में लेने की कोशिश करेगा तो हाईकोर्ट प्रशासन ऐसे ठोस कदम उठाएगा।

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Dismissal and suspension boost confidence four dismissed in five months
न्यायालय। - फोटो : amar ujala

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट प्रशासनिक कमेटी की ओर से इलाहाबाद जिला न्यायालय के एडीजे प्रथम राम किशोर शुक्ला के खिलाफ  की गई कार्रवाई कई मायनों में अहम मानी जा रही है । यह कार्रवाई ऐतिहासिक होने के साथ ही न्याय व्यवस्था में सुधार के संकल्प को और सुदृढ़ करती है। इलाहाबाद हाईकोर्ट प्रशासन की इस कार्रवाई से स्पष्ट संकेत है कि व्यवस्था के शीर्ष पर बैठे लोगों की नजर नीचे तक के न्यायिक अफसरों पर बनी हुई है।

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न्यायिक अफसर उस सांचे में हैं, जो पदों के निर्वहन में ईमानदारी, कर्तव्य निष्ठा और भ्रष्टाचार से कोसों दूर हैं। अगर इस सांचे को भ्रष्टाचार अपनी आगोश में लेने की कोशिश करेगा तो हाईकोर्ट प्रशासन ऐसे ठोस कदम उठाएगा, जिससे न्याय व्यवस्था की मजबूती के साथ ही इसके प्रति लोगों की आस्था बनी रहे।
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यह पहली बार नहीं हुआ है कि हाईकोर्ट प्रशासन ने किसी न्यायिक अफसर के खिलाफ  कार्रवाई की है। हाईकोर्ट प्रशासन पांच माह पहले भी तीन न्यायिक अफसरों को भ्रष्टाचार का दोषी पाने पर बर्खास्त कर चुका है। इसमें बदायूं में तैनात एडीजे अशोक कुमार सिंह, बलिया में तैनात एडीजे हिमांशु भटनागर, सिद्धार्थनगर में तैनात डॉ.राकेश कुमार के नाम शामिल है। 

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हाईकोर्ट प्रशासन ने इसके पूर्व फैजाबाद में तैनात एक डीजे को जेसीबी के सामने प्रदर्शन करने पर कदाचार का दोषी मानते हुए उन्हें इसके लिए निलंबित कर दिया था। इसके अलावा एक रेस्तरां में 11 ट्रेनी न्यायिक अफसरों की ओर से मारपीट तथा तोड़फोड़ करने पर उन्हें सेवा से निलंबित किया गया था। हाईकोर्ट प्रशासन की यह कार्रवाई न्यायिक अफसरों के इतर न्यायिक व्यवस्था से जुड़े कर्मचारियों के खिलाफ  भी हुई है। 


हाईकोर्ट प्रशासन मंगलवार को ही नौकरी दिलाने के नाम पर घूस लेने वाली सेक्शन अफसर कुसुम मिश्रा की सेवा समाप्त कर चुका है। हाईकोर्ट प्रशासन की इस कार्रवाई पर इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष राकेश पांडे और अमरेंद्र नाथ सिंह कहते हैं, ऐसी कार्रवाइयों से निश्चित ही न्यायिक व्यवस्था में नया बदलाव आएगा और उसे कमजोर करने वाली कड़ियां टूट जाएंगी। 


हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के महासचिव एसडी सिंह जादौन कहते हैं, यह कार्रवाई न्याय व्यवस्था को कमजोर करने वालों के लिए कड़ा संदेश है। भ्रष्टाचार में लिप्त लोगों को यह नहीं लगना चाहिए ति उन पर निगाह नहीं है। हाईकोर्ट प्रशासन ने जता दिया है कि भ्रष्टाचार कदाचार सहित न्याय व्यवस्था को कमजोर करने वाली गतिविधियां बर्दाश्त नहीं की जाएंगी।

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