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खिली धूप में खूब लगी संगम में डुबकी
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Mon, 15 Jan 2018 01:14 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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माघ मेलेे के दूसरे मुख्य स्नानपर्व मकर संक्रांति पर रविवार को श्रद्धालुओं ने संगम सहित गंगा और यमुना के विभिन्न घाटों पर स्नान किया। खिली धूप में खूब डुबकी लगी। उदयातिथि के मुताबिक बड़ी संख्या में श्रद्धालु सोमवार को संक्रांति की डुबकी लगाएंगे लेकिन मेला प्रशासन के कैलेंडर और संक्रांति की प्रचलित तिथि के मुताबिक कल्पवासियों संग देश के कोने-कोने से आए लाखों श्रद्धालुओं ने रविवार को ही संक्रांति का स्नान किया। हालांकि मेला प्रशासन का दावा फिर कई गुना आगे रहा। इसके मुताबिक 75 लाख श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई। बैरिकेडिंग के बाहर स्नानार्थियों की सुरक्षा केलिए जल पुलिस की नावों की कतार लगी रही।
संक्रांति पर गंगा और यमुना पट्टी से इतर संगम नोज पर डुबकी के लिए जल में लगाई गई बैरिकेडिंग का दायरा बढ़ा दिया गया था। इससे स्नानार्थियों को संगम घाट और संगम नोज के बीच डुबकी लगाने के लिए काफी जगह मिल गई थी। बेदिंग एरिया में घुटने भर से कम ही जल रहा, जिससे स्नानार्थियों को सहूलियत रही। सुबह कोहरा जरूर रहा लेकिन कोहरे की ओट से सूरज निकला तो स्नानार्थियों की संख्या में बढ़ोतरी हुई। यह सिलसिला देर शाम तक जारी रहा। रविवार की रात 7.39 बजे सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के बाद भी श्रद्धालुओं ने स्नान किया। महिलाओं के कपड़े बदलने के लिए ‘चेंजिंग रूम’ की व्यवस्था की गई थी।
बच्चों, महिलाओं, बूढ़ों ने डुबकी लगाई तो युवाओं की टोलियां भी श्रद्धा और उल्लास के संगम के साथ संगम तट पर पहुंचती रहीं। ज्यादातर कल्पवासियों ने अपने शिविरों के पास बने घाटों पर ही रोज की तरह डुबकी लगाई और लौटकर शिविरों में पूजा की। संगम नोज सहित गंगा-यमुना के अन्य घाटों पर पुण्य की दूसरी डुबकी के बाद श्रद्धालुओं ने पहले तो घाट किनारे ही पूजा-अर्चना की, अंजलि से ही सूर्य को अर्घ्य दिया, फिर गंगापुत्र घाटियों के यहां तिलक-चंदन लगवाया और यथाशक्ति दान-दक्षिणा भी दिया। कई श्रद्धालुओं ने रेती पर ही जरूरतमंदों और घाटियों के यहां खिचड़ी और पूछ पकड़कर गौदान भी किया।
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स्नान-दान के बाद खिली धूप में ही कासे पर बैठकर लोगों ने घर से लाया गया लड्डू, चूड़ा, लाई या पूड़ी-सब्जी खाई। ग्रामीण क्षेत्रों से आई महिलाओं क ी टोलियों ने गंगा गीत गाए। फिर गंगा की पूजा की और परिवार की कुशलता के लिए आशीष मांगा। गंगागीत गाते हुए ही लौटी श्रद्धालुओं की टोलियों ने घर के लिए लाई, इलाइची दाना, माला, सिंदूर, कलावा आदि का प्रसाद खरीदा। व्यवस्था में पुलिस और प्रशासन के अधिकारी, कर्मचारी जुटे रहे।
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संक्रांति पर गंगा और यमुना पट्टी से इतर संगम नोज पर डुबकी के लिए जल में लगाई गई बैरिकेडिंग का दायरा बढ़ा दिया गया था। इससे स्नानार्थियों को संगम घाट और संगम नोज के बीच डुबकी लगाने के लिए काफी जगह मिल गई थी। बेदिंग एरिया में घुटने भर से कम ही जल रहा, जिससे स्नानार्थियों को सहूलियत रही। सुबह कोहरा जरूर रहा लेकिन कोहरे की ओट से सूरज निकला तो स्नानार्थियों की संख्या में बढ़ोतरी हुई। यह सिलसिला देर शाम तक जारी रहा। रविवार की रात 7.39 बजे सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के बाद भी श्रद्धालुओं ने स्नान किया। महिलाओं के कपड़े बदलने के लिए ‘चेंजिंग रूम’ की व्यवस्था की गई थी।
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बच्चों, महिलाओं, बूढ़ों ने डुबकी लगाई तो युवाओं की टोलियां भी श्रद्धा और उल्लास के संगम के साथ संगम तट पर पहुंचती रहीं। ज्यादातर कल्पवासियों ने अपने शिविरों के पास बने घाटों पर ही रोज की तरह डुबकी लगाई और लौटकर शिविरों में पूजा की। संगम नोज सहित गंगा-यमुना के अन्य घाटों पर पुण्य की दूसरी डुबकी के बाद श्रद्धालुओं ने पहले तो घाट किनारे ही पूजा-अर्चना की, अंजलि से ही सूर्य को अर्घ्य दिया, फिर गंगापुत्र घाटियों के यहां तिलक-चंदन लगवाया और यथाशक्ति दान-दक्षिणा भी दिया। कई श्रद्धालुओं ने रेती पर ही जरूरतमंदों और घाटियों के यहां खिचड़ी और पूछ पकड़कर गौदान भी किया।
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स्नान-दान के बाद खिली धूप में ही कासे पर बैठकर लोगों ने घर से लाया गया लड्डू, चूड़ा, लाई या पूड़ी-सब्जी खाई। ग्रामीण क्षेत्रों से आई महिलाओं क ी टोलियों ने गंगा गीत गाए। फिर गंगा की पूजा की और परिवार की कुशलता के लिए आशीष मांगा। गंगागीत गाते हुए ही लौटी श्रद्धालुओं की टोलियों ने घर के लिए लाई, इलाइची दाना, माला, सिंदूर, कलावा आदि का प्रसाद खरीदा। व्यवस्था में पुलिस और प्रशासन के अधिकारी, कर्मचारी जुटे रहे।