धूमनगंज हत्याकांडः कांपते हाथों से भाइयों, भतीजों ने दिया अर्थी को कंधा
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धूमनगंज में बेरहमी से मौत के घाट उतारे गए कारोबारी तुलसीदास व उनके परिवार के तीन अन्य लोगों का अंतिम संस्कार शुक्रवार को रसूलाबाद घाट पर हुआ। उनके तीन भाइयों व भतीजों ने चिताओं को मुखाग्नि दी। इससे पहले पोस्टमार्टम के बाद शव को घाट पर ले जाने के दौरान अर्थी को कंधा देते वक्त उनके हाथ कांप गए।
मृतक कारोबारी व उनकी पत्नी, बेटी व बहू के शवों का पोस्टमार्टम दोपहर दो बजे के करीब शुरू हुआ। इस दौरान उनके तीन भाइयों संतदास, मोहनलाल व राज किशोर केशरवानी के अलावा भतीजा अभय व भांजा राकेश केशरवानी मर्चरी पर मौजूद रहे। भाई मोहनलाल ने बताया कि बेटे से खटपट की बात तो सुनाई पड़ती थी लेकिन वह इस तरह का कदम उठाएगा, ऐसा कभी सपने में भी नहीं सोचा था।
शाम पांच बजे के करीब पोस्टमार्टम के बाद चारों शव परिजनों को सौंप दिए गए। परिजन शवों को प्रीतमनगर स्थित घर ले जाना चाहते थे लेकिन पुलिस ने एहतियातन उन्हें ऐसा करने से मना किया। जिसके बाद परिजन भी मान गए और रसूलाबाद घाट पर अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया।
शवों को एंबुलेंस से लेकर परिजन रसूलाबाद पहुंचे। एंबुलेंस से शव उतारकर घाट पर ले जाने के दौरान कारोबारी की अर्थी को कंधा देते वक्त तीनों भाइयों की आंखें डबडबा गईं। कांपते हाथों से अर्थी लेकर वह घाट पर पहुंचे जहां शवों का अंतिम संस्कार किया गया। भाइयों व भतीजों ने चिताओं को मुखाग्नि दी। शात सात बजे के करीब अंतिम संस्कार के बाद परिजन घर लौट गए।