Navratri : महाशक्ति के कात्यायनी स्वरूप के दर्शन के लिए उमड़े भक्त, दिनभर लगा है भक्तों का तांता
कात्यायनी महामाये, महायोगिन्यधीश्वरी/नंदगोपसुतं देवी, पतिं मे कुरु ते नमः
कात्यायनौमुख पातु कां स्वाहास्वरूपिणी/ ललाटे विजया पातु मालिनी नित्य सुंदरी/कल्याणी हृदयम् पातु जया भगमालिनी। कञ्चनाभां वराभयं पद्मधरा मुकटोज्जवलांय स्मेरमुखी शिवपत्नी कात्यायनेसुते नमोऽस्तुते।।
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कात्यायनी महामाये, महायोगिन्यधीश्वरी/नंदगोपसुतं देवी, पतिं मे कुरु ते नमः। कात्यायनौमुख पातु कां स्वाहास्वरूपिणी/ ललाटे विजया पातु मालिनी नित्य सुंदरी/कल्याणी हृदयम् पातु जया भगमालिनी
कञ्चनाभां वराभयं पद्मधरा मुकटोज्जवलांय स्मेरमुखी शिवपत्नी कात्यायनेसुते नमोऽस्तुते।
इस श्लोक में नवरात्र की षष्ठी देवी मां कात्यायनी के स्वरूप और महिमा का वर्णन किया गया है। हे महामाया कात्यायनी, महायोगिनी की अधिष्ठात्री देवी, हे देवी, नंदगोप के पुत्र (श्री कृष्ण) को मेरा पति बनाओ, मैं तुम्हें प्रणाम करता हूं। छठे दिन मां ललिता देवी और मां कल्याणी देवी का भव्य शृंगार किया गया। इन देवी मंदिरों में भोर से लेकर रात तक जयकारे गूंजते रहे।
बृहस्पतिवार को मां कात्यायनी सविधि आराधना की गई। मां के दर्शन के लिए आधी रात से ही नारियल-चुनरी के साथ श्रद्धालु अपनी बारी का इंतजार करने लगे। मंगला आरती के बाद सुबह पांच बजे ही मां ललिता देवी के दरबार में भक्तों का तांता लग गया। नवरात्र के छठे दिन आदिशक्ति मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की आराधना के लिए भक्तों में होड़ सी मची रही। मां ललिता देवी मंदिर समिति के अध्यक्ष अजीत श्रीवास्तव और पूर्व अध्यक्ष हरि मोहन वर्मा स्वयंसेवकों के साथ श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन कराने के लिए परिसर में व्यवस्था संभाले रहे।
घरों में विधि-विधान से पूजन-अर्चन कर भक्तों ने सुख-समृद्धि की कामना की। अलोपीबाग में सिद्धपीठ अलोपशंकरी देवी के दरबार में आधी रात के बाद ही कतार लग गई। मंदिर का पट मंगला आरती के बाद सुबह चार बजे खुला तो श्रद्धालु बारी-बारी से आगे बढ़ने लगे। यहां दर्शन-पूजन का क्रम मध्यरात्रि तक चलता रहा। सिद्धपीठ कल्याणी देवी में मंगला आरती के बाद सुबह 4:30 बजे पट खुलते ही दर्शन-पूजन के लिए कतार लग लग गई। मंदिर के अध्यक्ष पं. सुशील कुमार पाठक की मौजूदगी में कात्यायनी माता के स्वरूप का भव्य शृंगार किया गया। इसी तरह शहर के अन्य देवी मंदिरों में भक्तों ने फल, पुष्प, नारियल, चुनरी, नैवेद्य अर्पित कर मां का भोग लगाया। आचार्यों के सानिध्य में भक्तों ने श्री दुर्गा सप्तशती का पाठ कर मंगल कामना की।