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वेदों में न्याय व्यवस्था की है विस्तृत व्याख्या: बीएस चौहान 

Mon, 21 Mar 2016 12:29 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Mon, 21 Mar 2016 12:29 AM IST
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Detailed explanation of the judicial system in the Vedas : BS Chauhan
कालेज - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति एवं विधि आयोग के अध्यक्ष बीएस चौहान ने कहा है कि हमारे वेदों में न्याय व्यवस्था की विस्तृत व्याख्या की गई है। नारी के बारे में मनु ने अपने तीसरे अध्याय में बहुत कुछ अच्छी बातें लिखी हैं। यूनेस्को धरोहर घोषित किए जा चुके वैदिक मंत्रोच्चार और इसके अध्ययन की विधा को बढ़ावा देने की पहल के बीच कानून एवं न्याय शास्त्र में वैदिक दृष्टि की संकल्पना विषय पर तीन दिवसीय सम्मेलन का आयोजन रविवार से नई झूंसी स्थित श्री राधाकृष्ण वेद विद्यालय में किया गया है। सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए न्यायमूर्ति श्री चौहान ने कहा कि मनु स्मृति के नौवें अध्याय में अपने पहले के कथनों से विमुख होकर स्त्रियों को पुरूष की संपत्ति बताया गया है। 
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मानव संसाधन विकास मंत्रालय से संबद्ध महर्षि संदीपनी राष्ट्रीय वेद विद्यालय तथा नई झूंसी के श्री राधाकृष्ण वेद विद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में सम्मेलन का आयोजन किया गया है। इसमें कानून एवं न्याय शास्त्र में वैदिक दृष्टि की संकल्पना, वेद और स्मृतियों के कानूनी सिद्धांत पर चर्चा की गई। हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुधीर नारायण ने कहा कि वेदों में नारी के अधिकार की बातें कही गई हैं। उन्हें पुरूष के साथ समानता का अधिकार दिया गया। उत्तर वैदिक काल में स्वरूप बदल दिया गया। नारी को संपत्ति माना गया जो वैदिक सिद्धांतों के विपरीत है।

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धन्यवाद ज्ञापन देते हुए सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता ईश्वरचंद्र अग्रवाल ने कहा कि कहा कि वैदिक शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए श्री राधाकृष्ण वेद विद्यालय की स्थापना की गई है। इसमें बच्चों को वेद आधारित नि:शुल्क शिक्षा प्रदान की जाती है। कहा कि केंद्र सरकार ने भी यूनेस्को धरोहर घोषित किए जा चुके वैदिक मंत्रोच्चार और अध्ययन की विधा को संरक्षण देने की पहल की है। इस मौके पर जस्टिस एमके शर्मा, शेखर जाफड़े, बलदेव अत्रेय आदि ने भी अपने विचार रखे। तीन दिवसीय सम्मेलन में देश के विभिन्न प्रांतो से अधिवक्ता एवं अन्य वरिष्ठ लोग शामिल हुए हैं। सोमवार को सम्मेलन का समापन होगा।

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