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प्राइवेट आईटाअई के छात्रों का डाटा अपलोड करने की मांग
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demand of private ITI students data upload
- फोटो : amar ujala
प्राइवेट आईटीआई के छात्रों का डाटा अपलोड करने की मांग
परीक्षा से पूर्व प्रक्रिया पूरी करने के लिए याचिका दाखिल, 10 को होगी सुनवाई
तय समय में डाटा अपलोड न होने से हजारों छात्रों का भविष्य अधर में
प्रयागराज। प्रदेश के निजी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में फिटर, इलेक्ट्रिशियन और अन्य कोर्स के छात्रों का डाटा राज्य व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद् लखनऊ के पोर्टल पर अपलोड करने की मांग में हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। याचिका दर्जनों कॉलेजों और सैकड़ों छात्रों की ओर से दाखिल की गई है। हाईकोर्ट ने इन याचिकाओं पर 10 जुलाई को सुनवाई करेगा। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अजय भनोट कर रहे हैं।
कानपुर के डॉ वीरेंद्र स्वरूप, प्राइवेट आईटीआई उन्नाव, राजेंद्र स्वरूप नॉलेज सिटी कानपुर सहित दर्जनों याचिकाओं में मांग की गई है कि 22 जुलाई से होने वाली परीक्षा से पहले पोर्टल पर अपलोड होने से छूटे छात्रों को शामिल कर लिया जाए। कहा गया है कि राष्ट्रीय व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद नई दिल्ली ने गाइड लाइन जारी कर छात्रों के प्रवेश की प्रक्रिया तय की है।
गाइड लाइन के अनुसार राज्य व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद में पंजीकृत छात्रों को ही आईटीआई कालेजों में प्रवेश मिल सकेगा। प्रथम काउंसलिंग के बाद द्वितीय और तृतीय काउंसलिंग स्थगित कर चौथी काउंसलिंग के जरिए कालेजों को पंजीकृत छात्रों का प्रवेश लेने की अनुमति दी गई है। सभी आईटीआई संस्थानों को खाली सीटों को 22 सितंबर 18 तक भरने की छूट दी गई थी। 24 सितंबर तक छात्रों का डाटा राज्य व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद में अपलोड करना था। यह अवधि 28 सितंबर तक बढ़ाई गई। इसके बाद पांच अक्तूबर 18 तक सभी संस्थानों को प्रवेश लिए छात्रों का डाटा अपलोड करने का आखिरी मौका दिया गया। तथा राज्य परिषद को संस्थानों से प्राप्त डाटा राष्ट्रीय परिषद् को 11 अक्तूबर 18 तक भेजना अनिवार्य था। राज्य परिषद द्वारा भेजे गए डाटा में त्रुटियों को सभी संस्थानों को 30 अक्तूबर तक दुरुस्त करने का मौका दिया गया। जब पोर्टल पर अपलोडेड डाटा राष्ट्रीय परिषद को पूरी तरह से नहीं मिला तो राज्य परिषद को एक से आठ दिसंबर 18 तक डाटा राष्ट्रीय परिषद को भेजने का समय दिया। यह समय 29 मार्च 19 तक दिया गया था। एक जुलाई से परीक्षा होनी थी, डाटा न मिल पाने और याचिकाएं दाखिल होने के कारण परीक्षा 22 जुलाई से शुरू करने का निर्णय किया गया।
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संस्थानों का कहना है कि हजारों छात्रों का डाटा 5 अक्टूबर 18 तक अपलोड नही हो सका। उनका भविष्य अधर में है। याचिका की सुनवाई 10 जुलाई को भी होगी। कोर्ट ने केंद्र सरकार और राज्य परिषद तथा याचियों के अधिवक्ताओं से सिलसिलेवार संक्षिप्त तथ्य तैयार कर देने को कहा है।
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परीक्षा से पूर्व प्रक्रिया पूरी करने के लिए याचिका दाखिल, 10 को होगी सुनवाई
तय समय में डाटा अपलोड न होने से हजारों छात्रों का भविष्य अधर में
प्रयागराज। प्रदेश के निजी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में फिटर, इलेक्ट्रिशियन और अन्य कोर्स के छात्रों का डाटा राज्य व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद् लखनऊ के पोर्टल पर अपलोड करने की मांग में हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। याचिका दर्जनों कॉलेजों और सैकड़ों छात्रों की ओर से दाखिल की गई है। हाईकोर्ट ने इन याचिकाओं पर 10 जुलाई को सुनवाई करेगा। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अजय भनोट कर रहे हैं।
कानपुर के डॉ वीरेंद्र स्वरूप, प्राइवेट आईटीआई उन्नाव, राजेंद्र स्वरूप नॉलेज सिटी कानपुर सहित दर्जनों याचिकाओं में मांग की गई है कि 22 जुलाई से होने वाली परीक्षा से पहले पोर्टल पर अपलोड होने से छूटे छात्रों को शामिल कर लिया जाए। कहा गया है कि राष्ट्रीय व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद नई दिल्ली ने गाइड लाइन जारी कर छात्रों के प्रवेश की प्रक्रिया तय की है।
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गाइड लाइन के अनुसार राज्य व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद में पंजीकृत छात्रों को ही आईटीआई कालेजों में प्रवेश मिल सकेगा। प्रथम काउंसलिंग के बाद द्वितीय और तृतीय काउंसलिंग स्थगित कर चौथी काउंसलिंग के जरिए कालेजों को पंजीकृत छात्रों का प्रवेश लेने की अनुमति दी गई है। सभी आईटीआई संस्थानों को खाली सीटों को 22 सितंबर 18 तक भरने की छूट दी गई थी। 24 सितंबर तक छात्रों का डाटा राज्य व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद में अपलोड करना था। यह अवधि 28 सितंबर तक बढ़ाई गई। इसके बाद पांच अक्तूबर 18 तक सभी संस्थानों को प्रवेश लिए छात्रों का डाटा अपलोड करने का आखिरी मौका दिया गया। तथा राज्य परिषद को संस्थानों से प्राप्त डाटा राष्ट्रीय परिषद् को 11 अक्तूबर 18 तक भेजना अनिवार्य था। राज्य परिषद द्वारा भेजे गए डाटा में त्रुटियों को सभी संस्थानों को 30 अक्तूबर तक दुरुस्त करने का मौका दिया गया। जब पोर्टल पर अपलोडेड डाटा राष्ट्रीय परिषद को पूरी तरह से नहीं मिला तो राज्य परिषद को एक से आठ दिसंबर 18 तक डाटा राष्ट्रीय परिषद को भेजने का समय दिया। यह समय 29 मार्च 19 तक दिया गया था। एक जुलाई से परीक्षा होनी थी, डाटा न मिल पाने और याचिकाएं दाखिल होने के कारण परीक्षा 22 जुलाई से शुरू करने का निर्णय किया गया।
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संस्थानों का कहना है कि हजारों छात्रों का डाटा 5 अक्टूबर 18 तक अपलोड नही हो सका। उनका भविष्य अधर में है। याचिका की सुनवाई 10 जुलाई को भी होगी। कोर्ट ने केंद्र सरकार और राज्य परिषद तथा याचियों के अधिवक्ताओं से सिलसिलेवार संक्षिप्त तथ्य तैयार कर देने को कहा है।