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गन्ना किसानों को भुगतान की मांग पर फैसला सुरक्षित
Wed, 16 Sep 2020 07:21 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 16 Sep 2020 07:21 PM IST
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sugarcane farmers
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गन्ना किसानों को गन्ना मूल्य के भुगतान के मामले में निर्णय सुरक्षित कर लिया है। बस्ती रुदौली के दर्जनों किसानों ने बजाज सुगर मिल द्वारा भुगतान न किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। कनिक राम और दर्जनों अन्य किसानों की याचिका पर न्यायमूर्ति एसपी केसरवानी और न्यायमूर्ति जयंत बनर्जी की पीठ ने सुनवाई कर रही है।
याची किसानों का कहना है कि उनका गन्ना क्षेत्र बजाज सुगर मिल के लिए सुरक्षित है। उन्होंने वर्ष 2019- 20 के पेराई सत्र के लिए मिल को गन्ना आपूर्ति की थी। मगर इसका मिल ने इसका आज तक भुगतान नहीं किया है। पेराई मार्च 2020 तक चली। किसानों ने इस संबंध में गन्ना आयुक्त को चार फरवरी, 19 मई और 13 जुलाई 2020 को पत्र भी लिखा मगर कोई कार्यवाही नहीं की गई।
किसानों का कहना है कि कुल 28086 किसानों ने गन्ना सप्लाई किया था। जिसका मूल्य 132.5194 करोड़ रुपये होता है। मगर मिल ने अब तक सिर्फ 7639 किसानों को 18.635 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। 20447 किसानों को एक पाई का भुगतान नहीं किया गया। मिल पर किसानों का 113.9159 करोड़ रुपये बकाया है। जबकि नियमानुसार गन्ना सप्लाई के 15 दिनों के भीतर भुगतान हो जाना चाहिए। ऐसा नहीं करने पर 12 प्रतिशत की दर से ब्याज का भुगतान भी करना होगा।
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प्रदेश सरकार का कहना था कि चीनी मिल ने किसानों का भुगतान न करके गंभीर गलती की है। इसके लिए मिल को रिकवरी सार्टिफिकेट जारी किया गया है। जबकि चीनी मिलों का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता एमडी सिंह शेखर का कहना था कि किसानों को व्यक्तिगत रूप से याचिका दाखिल करने का अधिकार नहीं है। मिल को रिकवरी सार्टिफिकेट जारी हो चुका है। मिल ने गन्ना आयुक्त को भुगतान का शेड्यूल दे दिया है जिसके मुताबिक फरवरी 2021 तक किसानों का भुगतान कर दिया जाएगा। ऐसी स्थिति में याचिका पोषणीय नहीं है और खारिज किए जाने योग्य है। कोर्ट ने मुद्दे को विचारणीय मानते हुए निर्णय सुरक्षित कर लिया है।
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याची किसानों का कहना है कि उनका गन्ना क्षेत्र बजाज सुगर मिल के लिए सुरक्षित है। उन्होंने वर्ष 2019- 20 के पेराई सत्र के लिए मिल को गन्ना आपूर्ति की थी। मगर इसका मिल ने इसका आज तक भुगतान नहीं किया है। पेराई मार्च 2020 तक चली। किसानों ने इस संबंध में गन्ना आयुक्त को चार फरवरी, 19 मई और 13 जुलाई 2020 को पत्र भी लिखा मगर कोई कार्यवाही नहीं की गई।
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किसानों का कहना है कि कुल 28086 किसानों ने गन्ना सप्लाई किया था। जिसका मूल्य 132.5194 करोड़ रुपये होता है। मगर मिल ने अब तक सिर्फ 7639 किसानों को 18.635 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। 20447 किसानों को एक पाई का भुगतान नहीं किया गया। मिल पर किसानों का 113.9159 करोड़ रुपये बकाया है। जबकि नियमानुसार गन्ना सप्लाई के 15 दिनों के भीतर भुगतान हो जाना चाहिए। ऐसा नहीं करने पर 12 प्रतिशत की दर से ब्याज का भुगतान भी करना होगा।
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प्रदेश सरकार का कहना था कि चीनी मिल ने किसानों का भुगतान न करके गंभीर गलती की है। इसके लिए मिल को रिकवरी सार्टिफिकेट जारी किया गया है। जबकि चीनी मिलों का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता एमडी सिंह शेखर का कहना था कि किसानों को व्यक्तिगत रूप से याचिका दाखिल करने का अधिकार नहीं है। मिल को रिकवरी सार्टिफिकेट जारी हो चुका है। मिल ने गन्ना आयुक्त को भुगतान का शेड्यूल दे दिया है जिसके मुताबिक फरवरी 2021 तक किसानों का भुगतान कर दिया जाएगा। ऐसी स्थिति में याचिका पोषणीय नहीं है और खारिज किए जाने योग्य है। कोर्ट ने मुद्दे को विचारणीय मानते हुए निर्णय सुरक्षित कर लिया है।