Prayagraj : प्रयागराज की बेटी ने छत्तीसगढ़ न्यायिक सेवा परीक्षा में प्रदेश भर में किया टॉप
संगम नगरी की मेधावी बेटी अंजुम आरा ने छत्तीसगढ़ प्रांतीय न्यायिक सेवा परीक्षा में पूरे प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त कर जिले और संस्थान का गौरव बढ़ाया है।
विस्तार
संगम नगरी की मेधावी बेटी अंजुम आरा ने छत्तीसगढ़ प्रांतीय न्यायिक सेवा परीक्षा में पूरे प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त कर जिले और संस्थान का गौरव बढ़ाया है। झूंसी की रहने वाली अंजुम ने अपनी सफलता से साबित कर दिया कि कड़े परिश्रम और सही दिशा में की गई मेहनत से किसी भी शिखर को छुआ जा सकता है। उनके पिता शमीम अहमद स्टेट बैंक में असिस्टेंट मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं और माता अख्तरी बेगम गृहणी हैं।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय की लॉ फैकल्टी ने मजबूत किया आधार
अंजुम ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सेंट्रल एकेडमी, झूंसी से पूरी करने के बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए-एलएलबी की डिग्री हासिल की। अपनी सफलता पर विश्वविद्यालय का आभार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की लॉ फैकल्टी और वहां के प्रोफेसर्स का उनके कॅरिअर में अहम योगदान रहा है। उन्होंने बताया कि शिक्षकों ने उन्हें कानून को रटने के बजाय उसे समझने और पढ़ने का सही तरीका सिखाया। विश्वविद्यालय के मजबूत शैक्षणिक वातावरण ने उनके कानूनी आधार को इतना सशक्त बना दिया कि उन्हें आगे किसी बड़ी कोचिंग की आवश्यकता नहीं पड़ी।
तैयारी की रणनीति
अंजुम की तैयारी पूरी तरह से स्व-अध्ययन पर आधारित थी। वह प्रतिदिन 5-6 घंटे पढ़ाई करती थीं। उन्होंने बताया कि परीक्षा के लिए उन्होंने ''बेयर एक्ट'' की एक-एक धारा और शब्द को बार-बार पढ़ा। मुख्य परीक्षा के लिए उन्होंने रॉबिन जीत सिंह की ''जजमेंट राइटिंग'' पुस्तक और छत्तीसगढ़ के स्थानीय अदालतों के फैसलों का गहन अध्ययन किया। न्यूज़पेपर रीडिंग की शौकीन अंजुम का मानना है कि समसामयिक मुद्दों की जानकारी ने उन्हें साक्षात्कार में काफी मदद दी।
परिवार का सहयोग और समर्पण
अंजुम अपनी कामयाबी का पूरा श्रेय अपने माता-पिता के समर्थन को देती हैं। उनके पिता शमीम अहमद और माता अख्तरी बेगम ने घर में पढ़ाई के लिए ऐसा अनुकूल वातावरण तैयार किया कि उनकी की एकाग्रता न खराब हो। अंजुम बताती हैं कि उनके माता-पिता उनकी पढ़ाई को लेकर इतने संवेदनशील थे कि घर में वाशिंग मशीन चलाने से पहले भी उनसे पूछा जाता था ताकि शोर से उनकी पढ़ाई में कोई बाधा न आए। पूर्व में राजस्थान और दिल्ली न्यायिक सेवाओं में मिली असफलताओं के दौरान भी परिवार ने उनका साहस बनाए रखा और उन्हें निरंतर मेहनत करने के लिए प्रेरित किया, जिसके परिणामस्वरूप आज वह प्रदेश की टॉपर बनी हैं।
भावी अभ्यर्थियों के लिए सफलता के मंत्र
1. कानून की मूल भाषा पर अपनी पकड़ सबसे मजबूत रखें।
2.मेन्स परीक्षा के लिए उत्तर लिखने का लगातार अभ्यास करें।3.प्रतिदिन 5-6 घंटे की नियमित पढ़ाई को अपनी आदत बनाएं।
4. कोर्ट के फैसलों को पढ़ने और लिखने की बारीकियां जरूर सीखें।
5.असफलताओं से निराश न हों, निरंतर प्रयास ही सफलता की कुंजी है।
अंजुम ने अपने भविष्य के लिए स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किए हैं। अपनी सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि अब उनका एकमात्र लक्ष्य अपने न्यायिक कर्तव्यों का पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ निर्वहन करना है। वह न्यायपालिका में रहते हुए समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को पूरी प्राथमिकता के साथ पूरा करना चाहती हैं।
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