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Global Warming : जीवन पर खतरा, समुद्र की गहराइयों में पनप रही हाईड्रोजन सल्फाइड गैस

Thu, 08 Feb 2024 12:41 PM IST
विनोद सिंह अमर उजला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 08 Feb 2024 12:41 PM IST
सार

प्रयोगशाला में परीक्षण के दौरान पता चला कि उसमें हाईड्रोजन सल्फाइड की मौजूदगी थी। हाइड्रोजन सल्फाइड मनुष्य सहित सभी जीवों एवं वनस्पतियों के लिए अत्यंत जहरीली गैस है, लेकिन कुछ बैक्टीरिया (प्रोटियस, कैम्पिलोबैक्टर, स्यूडोमोनास और साल्मोनेला) के लिए यह जीवनदायी गैस है और ऑक्सीजन जानलेवा है।

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Danger to life, hydrogen sulphide gas growing in the depths of the sea
पद्मश्री डॉ.अजय सोनकर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ग्लोबल वार्मिंग के कारण समुद्र की गहराइयों में भी हाईड्रोजन सल्फाइड गैस पनप रही है। यह इतनी खतरनाक है कि हवा के 10 लाख अणुओं में इसके मात्र 500 अणु (पीपीएम) मिल जाएं तो यह किसी व्यक्ति को पांच मिनट के भीतर मार सकती है और 700 पीपीएम से अधिक सांद्रता के कारण बड़े से बड़े जीव की मौत एक सेकेंड से भी कम समय में हो सकती है।

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स्विटरलैंड की जूरिक यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ फोरेंसिक जेनेटिक मेडिसन के साथ ज्वाइंट रिसर्च प्रोजेक्ट पर काम कर रहे प्रयागराज के वैज्ञानिक एवं पद्मश्री डॉ.अजय सोनकर ने बताया कि हाल ही में दक्षिणी अंडमान के समुद्र में जीवों की प्रजातीय विविधता के अध्ययन के दौरान समुद्र के तकरीबन 150 फिट गहरे तल के रेत के तीन फिट नीचे से जांच के लिए नमूने इकट्ठा किए गए थे।
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प्रयोगशाला में परीक्षण के दौरान पता चला कि उसमें हाईड्रोजन सल्फाइड की मौजूदगी थी। हाइड्रोजन सल्फाइड मनुष्य सहित सभी जीवों एवं वनस्पतियों के लिए अत्यंत जहरीली गैस है, लेकिन कुछ बैक्टीरिया (प्रोटियस, कैम्पिलोबैक्टर, स्यूडोमोनास और साल्मोनेला) के लिए यह जीवनदायी गैस है और ऑक्सीजन जानलेवा है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण ये बैक्टीरिया समुद्र की गहराइयों में पनप रहे हैं और हाइड्रोजन सल्फाइड बना रहे हैं।

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समुद्र का एक सर्कुलेटरी सिस्टम है

ग्लोबलवार्मिंग को नहीं रोका गया तो आने वाले वक्त में समुद्र की गहराइयों में हाईड्रोजन सल्फाइड का बादल बन सकता है, जो समुद्री जीव-जंतुओं एवं वनस्पतियों को तो खत्म करेगा ही, हवा से संपर्क में आने के बाद मनुष्यों के साथ पृथ्वी के अन्य जीव-जंतुओं और वनस्पतियों के लिए भी विनाशकारी साबित होगा।

डाॅ.अजय ने बताया कि समुद्र का एक सर्कुलेटरी सिस्टम है, जिसके तहत साउथ और नॉर्थ पोल पर पानी आर्कटिक और अंटार्टिक से बहने वाली ठंडी हवाओं से ऑक्सीजन जमा करता है। ठंडा पानी भारी होने के कारण महासागर के अंधेरे तल में चला जाता है। वह ऑक्सीजन भी अपने साथ तल में ले जाता है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण पानी का तापमान धीमी गति से बढ़ रहा है।

इसे नियंत्रित नहीं किया गया तो एक वक्त ऐसा आएगा जब पानी का तापमान बढ़ने के कारण वह समुद्र के तल तक ऑक्सीजन को अपने साथ नहीं ले जा सकेगा, तब जिन बैक्टीरिया के लिए ऑक्सीजन जानलेवा है, वे हाईड्रोजन सल्फाइड का उत्पादन तेजी से करने लगेंगे और इससे बनने वाला बादल मनुष्यों के साथ सभी जीव-जंतुओं और वनस्पतियों के लिए जानलेवा बन जाएगा।  

सीवर में भी बनती है हाईड्रोजन सल्फाइड

हाईड्रोजन सल्फाइड गैस ऑक्सीजन की अनुपस्थिति से तो बनती ही है, साथ ही कार्बनिक पदार्थों के विघटित होने, जीवों के मरकर सड़ने, कच्चे पेट्रोलियम पदार्थाों, प्राकृतिक गैस, ज्वालामुखीय गैसों, तरल खाद्य और सीवेज से भी बनती है। अक्सर ऐसी घटनाएं देखने को मिलती हैं, जब सीवेज की सफाई के लिए मैनहोल में उतरने वाले सफाई कर्मी जहरीली गैस का शिकार हो जाते हैं और उनकी मौत तक हो जाती है। यह जहरीली गैस हाईड्रोजन सल्फाइड ही होती है।

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