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जून तक बना रहेगा करेंसी संकट
अमर उजाला ब्यूरो,इलाहाबाद
Updated Fri, 12 May 2017 01:55 AM IST
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स्टेट बैंक एटीएम।
- फोटो : अमर उजाला
इन दिनों शादियों में करेंसी खर्च करने का मौका आया तो बैंकों के कैश चेस्ट खाली हो गए। यही समस्या किसानों के सामने है, उनके खाते में गेहूं का भुगतान आ गया है लेकिन बैंकों ने कैश देने से हाथ खड़े कर दिए हैं। करेंसी की मांग पूरा करने के लिए एसबीआई, बैंक आफ बड़ौदा सहित कई बैंकों ने रिजर्व बैंक आफ इंडिया से कैश मांगा है लेकिन पंद्रह दिन से एक धेला नहीं मिली है। यहां की आधा दर्जन प्रमुख बैकों के सभी 15 कैश चेस्ट खाली हो गए हैं। प्रतिदिन जितनी धनराशि जमा हो रही है, उसी का लोगों को जरूरत के अनुसार भुगतान किया जा रहा है। इन परिस्थि्ितयों में स्टेट बैंक सहित कई बैंकों के एटीएम में कैश डालना बंद कर दिया है। ये बैंक अपने ग्राहकों को चेक के माध्यम से ही जरूरत के अनुसार ही भुगतान कर रहीं हैं।
जिले की 527 बैंक शाखाओं से प्रतिदिन औसतन ढाई करोड़ केश का आदान प्रदान होता है। नगदी की किल्लत के कारण इस समय बमुश्किल 25 करोड़ रुपये प्रतिदिन का ही लेनदेन हो पा रहा है। जबकि हर महीने की पांच से 15 तारीख तक रेलवे, राज्य व केंद्र सरकार के डेढ़ लाख कर्मचारी एटीएम से वेतन की निकासी करते हैं। अधिकांश एटीएम बंद पड़े हैं। कुछ प्राइवेट बैंकों के एटीएम चल रहे हैं, उनसे सीमित मात्रा में ही कैश की निकासी हो रही है। सबसे ज्यादा मुश्किल तो शादी - विवाह वाले परिवारों की है, उनके अधिकांश काम कैश में ही होते हैं। उन्हें शादी के में मैरिज होम से लेकर, खान पान, विवाह केअन्य सामान खरीदने में दिक्कत हो रही है। किसान भी साल भर केलिए इन दिनों घरेलू सामान खरीदते हैं लेकिन बैंक से कैश न मिलने के कारण वह भी परेशान हाल हैं। ‘ 15 दिन से कैश चेस्ट खाली हैं, आरबीआई से कैश मांगा है लेकिन कुछ दिनों तक इंतजार करने के बाद ही नई केंरसी का आश्वासन दिया है।’ शिव बालक, जिला समन्वयक एसबीआई ‘ इन दिनों निकासी ज्यादा हो रही है, जबकि करेंसी कम जमा हो रही है। रुटीन में प्रतिदिन जितनी धनराशि जमा हो रही, उसी का भुगतान किया जा रहा है।’ विजय शर्मा, लीड बैंक प्रबंधक इंसेट बैंकों में कारोबारियों का डिपोजिट घटा इलाहाबाद। फरवरी, मार्च और अप्रैल की तुलना में मई के इन 10 दिनों में कारोबारियों की ओर से करेंसी कम जमा हो रही है। लीड बैंक प्रबंधक विजय शर्मा का कहना है कि इसके क्या कारण हैं, पता नहीं चल रहा है। कारोबारियों की ओर से करेंसी कम जमा होना चिंताजनक है। हो सकता है कि कारोबारी बैंकों में कैश जमा करने के स्थान पर निजी तौर पर करेंसी जमा कर रहे हों या फिर नगद में थोक का कारोबार किया जा रहा हो।
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जिले की 527 बैंक शाखाओं से प्रतिदिन औसतन ढाई करोड़ केश का आदान प्रदान होता है। नगदी की किल्लत के कारण इस समय बमुश्किल 25 करोड़ रुपये प्रतिदिन का ही लेनदेन हो पा रहा है। जबकि हर महीने की पांच से 15 तारीख तक रेलवे, राज्य व केंद्र सरकार के डेढ़ लाख कर्मचारी एटीएम से वेतन की निकासी करते हैं। अधिकांश एटीएम बंद पड़े हैं। कुछ प्राइवेट बैंकों के एटीएम चल रहे हैं, उनसे सीमित मात्रा में ही कैश की निकासी हो रही है। सबसे ज्यादा मुश्किल तो शादी - विवाह वाले परिवारों की है, उनके अधिकांश काम कैश में ही होते हैं। उन्हें शादी के में मैरिज होम से लेकर, खान पान, विवाह केअन्य सामान खरीदने में दिक्कत हो रही है। किसान भी साल भर केलिए इन दिनों घरेलू सामान खरीदते हैं लेकिन बैंक से कैश न मिलने के कारण वह भी परेशान हाल हैं। ‘ 15 दिन से कैश चेस्ट खाली हैं, आरबीआई से कैश मांगा है लेकिन कुछ दिनों तक इंतजार करने के बाद ही नई केंरसी का आश्वासन दिया है।’ शिव बालक, जिला समन्वयक एसबीआई ‘ इन दिनों निकासी ज्यादा हो रही है, जबकि करेंसी कम जमा हो रही है। रुटीन में प्रतिदिन जितनी धनराशि जमा हो रही, उसी का भुगतान किया जा रहा है।’ विजय शर्मा, लीड बैंक प्रबंधक इंसेट बैंकों में कारोबारियों का डिपोजिट घटा इलाहाबाद। फरवरी, मार्च और अप्रैल की तुलना में मई के इन 10 दिनों में कारोबारियों की ओर से करेंसी कम जमा हो रही है। लीड बैंक प्रबंधक विजय शर्मा का कहना है कि इसके क्या कारण हैं, पता नहीं चल रहा है। कारोबारियों की ओर से करेंसी कम जमा होना चिंताजनक है। हो सकता है कि कारोबारी बैंकों में कैश जमा करने के स्थान पर निजी तौर पर करेंसी जमा कर रहे हों या फिर नगद में थोक का कारोबार किया जा रहा हो।
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