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द्वार भवानी आई भक्तों की भीड़
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Fri, 31 Mar 2017 02:04 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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वासंतिक नवरात्र के दूसरे दिन बृहस्पतिवार को शक्तिपीठों में भगवती के तृतीय स्वरूप की पूजा-अर्चना की गई। बहुरंगी फूलों और आभूषणों से देवी चंद्रघंटा के रूप में सजीं तो उनके दर्शन और पूजन के लिए लंबी कतारें भी लगीं। पहले दिन घरों में कलश स्थापना और अन्य अनुष्ठान में व्यस्तता के कारण बड़ी संख्या में लोग शक्तिपीठों तक नहीं पहुंच सके थे लेकिन दूसरे दिन भगवती के चंद्रघंटा स्वरूप के दर्शन और पूजन के लिए शक्तिपीठों में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।
शक्तिपीठ ललिता देवी में महामंगल आरती के बाद आरंभ हुआ दर्शन का क्रम दोपहर तक चला। आभूषणों सहित गेंदा, गुलाब के फूलों से भगवती सजीं। परिसर और प्रवेश द्वार सहित मंदिर का गर्भगृह भी सजा। महिलाओं और पुरुषों ने अलग-अलग कतार में भगवती के भव्य स्वरूप का दर्शन किया। मंदिर के बाहर फूल-माला, नारियल-चुनरी, प्रसाद बेचने वालों के दुकानों की कतारें लंबी हुईं। दोपहर बाद मंदिर परिसर में महिलाओं की टोली ने देवी भजनों से भगवती की महिमा बखानी। देवी को निशान चढ़ाने के लिए भी कई मोहल्लों से श्रद्धालुओं की टोलियां आईं।
शक्तिपीठ कल्याणी देवी में पहले भगवती के ब्रह्मचारिणी, फिर चंद्रघंटा स्वरूप का शृंगार किया गया। वाराणसी और कोलकाता से आए सज्जाकारों ने गर्भगृह और परिसर को भी सजाया। तीसरे दिन अभिषेक के बाद प्रत्यांगिरा स्त्रोत का 108 पाठ करने के बाद देवी को गुड़हल के 108 फूल चढ़ाए गए। देवी के महाशृंगार के दर्शन के लिए भी शाम को दूर तक श्रद्धालुओं की कतारें लगी रहीं।
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अलोपीबाग स्थित शक्तिपीठ अलोपशंकरी में दर्शन और अभिषेक के लिए होड़ मची रही। भोर से ही आरंभ दर्शन का क्रम दोपहर और फिर शाम से लेकर रात तक जारी रहा। मंदिर परिसर में भगवती को निशान चढ़ाने केलिए इलाहाबाद के इर्द-गिर्द क्षेत्रों से भी नाचते-गाते श्रद्धालु पहुंचे। अबूझ मुहूर्त होने से परिसर में बच्चों के मुंडन, कर्णछेदन संस्कार के लिए भी लोग जुटे। चौक गंगादास स्थित शक्तिस्वरूपा खेमामाई मंदिर में भगवती नवदुर्गा स्वरूप में सजीं। परिसर में महिला मंडली की ओर से भजन-कीर्तन किया गया। देवी का दरबार बिजली की रंगीन झालरों और फूलों से सजा।
इसी क्रम में सिविल लाइंस हनुमत निकेतन की देवी दुर्गा, हाईकोर्ट हनुमान मंदिर की अष्टभुजी देवी, पानी टंकी मंदिर की अष्टभुजी देवी, कटरा कालीबाड़ी, कर्नलगंज कालीबाड़ी, मुट्ठीगंज कालीबाड़ी, सिविल लाइंस स्थित सिद्धेश्वरी गुप्त महापीठ सहित अन्य देवी मंदिरों में देवी के दर्शन और पूजन, नारियल-चुनरी चढ़ाने के लिए लोग देर रात तक आते रहे।
0 परिसर से प्रवेश द्वार तक जगमगाया
देवी मंदिरों विशेषकर शक्तिपीठों की ओर आने वाले रास्ते के दोनों ओर बल्लियां लगाकर पताकाएं फहराई गईं। परिसर से लेकर प्रवेश द्वार तक बिजली की रंगीन झालरों से सजावट की गई। मंदिर परिसर के करीब भगवती महिमा के भजन बजते रहे।
0 शक्तिपीठों के इर्द-गिर्द लगा मेला
शक्तिपीठों के इर्द-गिर्द मेले जैसा माहौल रहा। माला-फूल, नारियल-चुनरी, फल-इलाइची दाना, शृंगार की वस्तुओं के अतिरिक्त देवी देवताओं की तस्वीरें, कैलेंडर, पोस्टर आदि भी खूब बिके। मंदिर की ओर जाने वाले रास्ते के दोनों ओर बच्चों के खेल-खिलौने, घर-गृहस्थी, सजावट की चीजों की दुकानें भी सजीं। वहीं फलों के अतिरिक्त खाने-पीने के ठेले-खोमचे भी लगे।
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शक्तिपीठ ललिता देवी में महामंगल आरती के बाद आरंभ हुआ दर्शन का क्रम दोपहर तक चला। आभूषणों सहित गेंदा, गुलाब के फूलों से भगवती सजीं। परिसर और प्रवेश द्वार सहित मंदिर का गर्भगृह भी सजा। महिलाओं और पुरुषों ने अलग-अलग कतार में भगवती के भव्य स्वरूप का दर्शन किया। मंदिर के बाहर फूल-माला, नारियल-चुनरी, प्रसाद बेचने वालों के दुकानों की कतारें लंबी हुईं। दोपहर बाद मंदिर परिसर में महिलाओं की टोली ने देवी भजनों से भगवती की महिमा बखानी। देवी को निशान चढ़ाने के लिए भी कई मोहल्लों से श्रद्धालुओं की टोलियां आईं।
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शक्तिपीठ कल्याणी देवी में पहले भगवती के ब्रह्मचारिणी, फिर चंद्रघंटा स्वरूप का शृंगार किया गया। वाराणसी और कोलकाता से आए सज्जाकारों ने गर्भगृह और परिसर को भी सजाया। तीसरे दिन अभिषेक के बाद प्रत्यांगिरा स्त्रोत का 108 पाठ करने के बाद देवी को गुड़हल के 108 फूल चढ़ाए गए। देवी के महाशृंगार के दर्शन के लिए भी शाम को दूर तक श्रद्धालुओं की कतारें लगी रहीं।
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अलोपीबाग स्थित शक्तिपीठ अलोपशंकरी में दर्शन और अभिषेक के लिए होड़ मची रही। भोर से ही आरंभ दर्शन का क्रम दोपहर और फिर शाम से लेकर रात तक जारी रहा। मंदिर परिसर में भगवती को निशान चढ़ाने केलिए इलाहाबाद के इर्द-गिर्द क्षेत्रों से भी नाचते-गाते श्रद्धालु पहुंचे। अबूझ मुहूर्त होने से परिसर में बच्चों के मुंडन, कर्णछेदन संस्कार के लिए भी लोग जुटे। चौक गंगादास स्थित शक्तिस्वरूपा खेमामाई मंदिर में भगवती नवदुर्गा स्वरूप में सजीं। परिसर में महिला मंडली की ओर से भजन-कीर्तन किया गया। देवी का दरबार बिजली की रंगीन झालरों और फूलों से सजा।
इसी क्रम में सिविल लाइंस हनुमत निकेतन की देवी दुर्गा, हाईकोर्ट हनुमान मंदिर की अष्टभुजी देवी, पानी टंकी मंदिर की अष्टभुजी देवी, कटरा कालीबाड़ी, कर्नलगंज कालीबाड़ी, मुट्ठीगंज कालीबाड़ी, सिविल लाइंस स्थित सिद्धेश्वरी गुप्त महापीठ सहित अन्य देवी मंदिरों में देवी के दर्शन और पूजन, नारियल-चुनरी चढ़ाने के लिए लोग देर रात तक आते रहे।
0 परिसर से प्रवेश द्वार तक जगमगाया
देवी मंदिरों विशेषकर शक्तिपीठों की ओर आने वाले रास्ते के दोनों ओर बल्लियां लगाकर पताकाएं फहराई गईं। परिसर से लेकर प्रवेश द्वार तक बिजली की रंगीन झालरों से सजावट की गई। मंदिर परिसर के करीब भगवती महिमा के भजन बजते रहे।
0 शक्तिपीठों के इर्द-गिर्द लगा मेला
शक्तिपीठों के इर्द-गिर्द मेले जैसा माहौल रहा। माला-फूल, नारियल-चुनरी, फल-इलाइची दाना, शृंगार की वस्तुओं के अतिरिक्त देवी देवताओं की तस्वीरें, कैलेंडर, पोस्टर आदि भी खूब बिके। मंदिर की ओर जाने वाले रास्ते के दोनों ओर बच्चों के खेल-खिलौने, घर-गृहस्थी, सजावट की चीजों की दुकानें भी सजीं। वहीं फलों के अतिरिक्त खाने-पीने के ठेले-खोमचे भी लगे।