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कर्मचारी की मृत्यु के बाद नहीं चल सकती आपराधिक या विभागीय कार्यवाही, तीन माह में करें बकाया भुगतान- हाईकोर्ट

Mon, 13 Sep 2021 09:27 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 13 Sep 2021 09:27 PM IST
सार

कोर्ट ने भुगतान से इनकार करने के तीन दिसंबर 19 व चार जनवरी 19 के आदेश को रद्द कर दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति पंकज भाटिया ने सुमित्रा सिंह की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है।

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Criminal or departmental proceedings cannot go on after the death of the employee, pay the arrears in three months - High Court
allahabad high court - फोटो : social media

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि कर्मचारी की मृत्यु के बाद उसके खिलाफ कोई विभागीय या आपराधिक कार्यवाही नहीं चल सकती है। कोर्ट ने सेवा काल में निलंबित चल रहे मृतक कर्मचारी के बकाया देयों और पेंशन आदि के भुगतान पर निर्णय लेने का सीएमओ जौनपुर व निदेशक पेंशन लखनऊ को आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि तीन माह में याची को पारिवारिक पेंशन व उसके पति का बकाया वेतन का भुगतान किया जाए। 

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कोर्ट ने भुगतान से इनकार करने के तीन दिसंबर 19 व चार जनवरी 19 के आदेश को रद्द कर दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति पंकज भाटिया ने सुमित्रा सिंह की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है। याचिका पर अधिवक्ता बी एन सिंह राठौर ने बहस की। अधिवक्ता का कहना था कि याची के पति खाद्य निरीक्षक थे। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप में एफआईआर दर्ज कराई गई।

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कोर्ट ने याची के पति को माना निलंबन काल का बकाया वेतन पाने का हकदार


आठ सितंबर 93 को उनको  निलंबित कर दिया गया। कोई चार्जशीट नहीं दी गई। इसी दौरान वह 31 मार्च 94 को सेवानिवृत्त हो गए। इसके बाद उनकी अंतरिम पेंशन तय की गई। याची के पति की 19 फरवरी 16 को मृत्यु हो गई। इसके बाद याची ने निलंबन काल का बकाया वेतन, बकाया पूरी पेंशन और पति की मृत्यु के बाद पारिवारिक पेंशन का दावा किया। कोर्ट ने याची के पति को निलंबन काल का बकाया वेतन पाने का हकदार माना और कहा एससीआर रेग्यूलेशन 351 के तहत मौत के बाद कोई आपराधिक या विभागीय कार्यवाही नहीं चल सकती। इसलिए बकाया वेतन, पेंशन आदि पाने का हकदार हैं। कोर्ट ने कहा कि भुगतान की गई राशि की कटौती कर बकाये का भुगतान किया जाए।

 

सहायक अभियंता के वेतन से वसूली पर रोक


इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अधिशासी अभियंता विद्युत पीलीपोखर आगरा को सहायक अभियंता के वेतन से 5 लाख रुपये से अधिक की वसूली के आदेश पर रोक लगा दी है और राज्य सरकार व विद्युत निगम से 6 हफ्ते में जवाब मांगा है। यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र ने सहायक अभियंता शरद कुमार चतुर्वेदी की याचिका पर दिया है। याची का कहना था कि  2011 में जब याची पीलीपोखर में तैनात था तो भंडार में सामग्री की चोरी को विविध अग्रिम के रूप में 514270 रुपये दर्ज किया गया। चोरी की जांच में याची निर्दोष करार दिया गया है। इसके बावजूद उसके वेतन से कटौती करने का आदेश जारी किया गया, जिसे चुनौती दी गई।

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