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90 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलीं हवाएं, गिरे पेड़-खंभे, एक की मौत
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Fri, 04 May 2018 01:12 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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मई के महीने में बदले मौसम के मिजाज ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। बुधवार देर रात करीब 90 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आई आंधी ने कहर ढा दिया। कहीं टिन शेड उड़े तो कहीं-कही बिजली के खंभे और पेड़ उखड़ गए। टीन और छप्पर उड़ने के साथ विभिन्न चौराहों पर लगी होर्डिंग्स फट गईं। किला घाट, गऊघाट में 16 और घूरपुर में नदी किनारे बंधी करीब एक दर्जन नावें नदी में पलटने के बाद डूब गईं। बारिश के कारण जगह-जगह कीचड़-फिसलन की स्थिति रही। कोरांव तहसील के बेलवनियां गांव के रहने वाले संतोष कुमार(42) छप्पर गिरने से मौत हो गई। मेजा के भैंया गांव में सुलग रही पराली से भड़की आग की चपेट में पांच मकान जल गए।
मौसम विभाग और विशेषज्ञों ने जैसी संभावना जताई थी, बुधवार देर रात ठीक वैसा ही हुआ। अचानक तेज हुई हवा धूल भरी आंधी में बदल गई। अचानक आई आंधी के दौरान बिजली गुल हो गई। घंटों बाद कु छ इलाकों में बिजली आपूर्ति बहाल की गई लेकिन बृहस्पतिवार को दिन भर बिजली आती जाती रही। कई जगह तार टूटे तो कहीं-कहीं बिजली के खंभे टेढे़ हो गए। राजकीय मुद्रणालय के पास एक पेड़ धराशायी हो गया। कई अन्य स्थानों पर पेड़ उखड़ने और डालियां टूटने की सूचना है। आंधी में फंसे लोगों की परेशानी का कारण धूल के साथ पेड़ों से टूटकर गिर रहीं सूखी डालियां भी रहीं।
आंधी के दौरान गंगा किनारे किला घाट और यमुना किनारे गऊघाट पर 16 तथा घूरपुर में एक दर्जन नावें पलटने के बाद नदी में डूब गईं। सुबह नाविक नावों को खोजकर निकालने का जतन करते रहे। वहीं शहर में विभिन्न चौराहों पर लगी बड़ी-बड़ी होर्डिंग्स के चीथड़े उड़ गए। सड़कों में खंभों के सहारे प्लास्टिक की डोरी से बंधे बैनर कहां गए पता ही नहीं चला।
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ग्रामीण इलाकों में आंधी-पानी से सर्वाधिक नुकसान आम की फसल को हुआ। साथ ही खलिहानों में पड़े गेहूं के बोझ और भूसा उड़ गया। सरसों, अरहर समेत अन्य दलहनी और तिलहनी फसलों को भारी नुकसान हुआ है। कोरांव तहसील के बेलवनियां गांव के रहने वाले संतोष कुमार(42) छप्पर गिरने से दब गया। सुबह उसकी खोजबीन हुई तो पता चला कि बांस-बल्ली और छप्पर के नीचे दबे संतोष की मौत हो चुकी है। वहीं मेजा के भैंया गांव में खेतों में सुलग रही पराली पांच लोगों के नुकसान का कारण बनी। पराली की चिंगारी से भड़की आग की चपेट में आने से पांच मकान जल गए। यहां जनहानि तो नहीं हुई लेकिन घरेलू सामान समेत अनाज आदि सामान जल गया।
बेमौसम की बारिश में शहर में हर तरफ हुए जलजमाव से लोग चिंतित हैं। सर्वाधिक परेशान अल्लापुर के विभिन्न मोहल्लों में रहने वाले हैं। यहां तीन करोड़ से अधिक की लागत से निर्माणाधीन पपिंग स्टेशन का काम बेहद सुस्त गति से किया जा रहा है। न भवन और पाइप लाइन का काम पूरा है और न ही यहां डीजल के नए पंप मंगाए गए हैं। यही स्थिति रही तो इस बारिश में जलजमाव से अल्लापुर का डूबना तय है। पूर्व पार्षद विनय मिश्रा सिंटू का कहना है कि कई बार कार्यदायी संस्था गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के अफसरों को पत्र दिया जा चुका है। बातचीत बेनतीजा रही है। हर बार आश्वासन दिया जाता है। अमर उजाला ने यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया तो अफसरों ने 30 मई तक काम पूरा करने का दावा किया है। उन्होंने मौजूदा स्थिति देखकर नहीं लगता कि मई महीने काम पूरा होगा।
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मौसम विभाग और विशेषज्ञों ने जैसी संभावना जताई थी, बुधवार देर रात ठीक वैसा ही हुआ। अचानक तेज हुई हवा धूल भरी आंधी में बदल गई। अचानक आई आंधी के दौरान बिजली गुल हो गई। घंटों बाद कु छ इलाकों में बिजली आपूर्ति बहाल की गई लेकिन बृहस्पतिवार को दिन भर बिजली आती जाती रही। कई जगह तार टूटे तो कहीं-कहीं बिजली के खंभे टेढे़ हो गए। राजकीय मुद्रणालय के पास एक पेड़ धराशायी हो गया। कई अन्य स्थानों पर पेड़ उखड़ने और डालियां टूटने की सूचना है। आंधी में फंसे लोगों की परेशानी का कारण धूल के साथ पेड़ों से टूटकर गिर रहीं सूखी डालियां भी रहीं।
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आंधी के दौरान गंगा किनारे किला घाट और यमुना किनारे गऊघाट पर 16 तथा घूरपुर में एक दर्जन नावें पलटने के बाद नदी में डूब गईं। सुबह नाविक नावों को खोजकर निकालने का जतन करते रहे। वहीं शहर में विभिन्न चौराहों पर लगी बड़ी-बड़ी होर्डिंग्स के चीथड़े उड़ गए। सड़कों में खंभों के सहारे प्लास्टिक की डोरी से बंधे बैनर कहां गए पता ही नहीं चला।
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ग्रामीण इलाकों में आंधी-पानी से सर्वाधिक नुकसान आम की फसल को हुआ। साथ ही खलिहानों में पड़े गेहूं के बोझ और भूसा उड़ गया। सरसों, अरहर समेत अन्य दलहनी और तिलहनी फसलों को भारी नुकसान हुआ है। कोरांव तहसील के बेलवनियां गांव के रहने वाले संतोष कुमार(42) छप्पर गिरने से दब गया। सुबह उसकी खोजबीन हुई तो पता चला कि बांस-बल्ली और छप्पर के नीचे दबे संतोष की मौत हो चुकी है। वहीं मेजा के भैंया गांव में खेतों में सुलग रही पराली पांच लोगों के नुकसान का कारण बनी। पराली की चिंगारी से भड़की आग की चपेट में आने से पांच मकान जल गए। यहां जनहानि तो नहीं हुई लेकिन घरेलू सामान समेत अनाज आदि सामान जल गया।
बेमौसम की बारिश में शहर में हर तरफ हुए जलजमाव से लोग चिंतित हैं। सर्वाधिक परेशान अल्लापुर के विभिन्न मोहल्लों में रहने वाले हैं। यहां तीन करोड़ से अधिक की लागत से निर्माणाधीन पपिंग स्टेशन का काम बेहद सुस्त गति से किया जा रहा है। न भवन और पाइप लाइन का काम पूरा है और न ही यहां डीजल के नए पंप मंगाए गए हैं। यही स्थिति रही तो इस बारिश में जलजमाव से अल्लापुर का डूबना तय है। पूर्व पार्षद विनय मिश्रा सिंटू का कहना है कि कई बार कार्यदायी संस्था गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के अफसरों को पत्र दिया जा चुका है। बातचीत बेनतीजा रही है। हर बार आश्वासन दिया जाता है। अमर उजाला ने यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया तो अफसरों ने 30 मई तक काम पूरा करने का दावा किया है। उन्होंने मौजूदा स्थिति देखकर नहीं लगता कि मई महीने काम पूरा होगा।