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दो बार रेकी के बाद अधिवक्ता पर किया गया अटैक
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Thu, 24 May 2018 01:22 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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अधिवक्ता राजेश श्रीवास्तव हत्याकांड की पहेली आखिरकार सुलझ गई। प्रतापगढ़ के शातिरों ने दो बार रेकी करने के बाद अधिवक्ता पर अटैक किया। शातिर अपराधी अंजनी घटना से तीन पहले राजेश की गली में रेकी करने गया था। वहां कुछ लोगों ने उसे देखा भी था। पुलिस अब उसकी और घनश्याम की तलाश में छापेमारी कर रही है।
अधिवक्ता राजेश श्रीवास्तव हत्याकांड की जांच में जुुटी पुलिस ने भले होटल मालिक प्रदीप जायसवाल को जेल भेज दिया था लेकिन, कोई क्लू मिल नहीं रहा था। उसी समय वाराणसी एसटीएफ की टीम को शमशाद के बारे में पता चला। दरअसल, शमशाद भाड़े पर हत्याएं कराने का एक्सपर्ट है। एसटीएफ ने जब शमशाद को सर्विलांस पर लिया तो एक के बाद एक कड़ियां जुड़ती चली गईं। एसटीएफ ने सोमवार को शमशाद को पकड़ लिया। उसके बाद खुलासा हो गया कि उसी ने प्रतापगढ़ के विशाल प्रजापति और रईस को हायर कर अधिवक्ता का मर्डर कराया है। एसटीएफ ने विशाल प्रजापति को पकड़ा तो सारे मामले का खुलासा हो गया।
एसटीएफ सूत्रों के मुताबिक नाले के विवाद में अधिवक्ता राजेश श्रीवास्तव ने होटल मालिक प्रदीप जायसवाल का जीना हराम कर दिया था। उन्होंने नगर निगम के छोटे से अफसर से लेकर मुख्यमंत्री तक इसकी शिकायत की थी। उसमें एडीए और नगर निगम के कुछ अफसर भी फंस रहे थे। उन लोगों ने प्रदीप से हाथ खड़े कर दिए थे कि अगर मामला हाईकोर्ट गया तो होटल को कोई बचा नहीं पाएगा। इसी के बाद उसने अधिवक्ता को रास्ते से हटाने के निश्चय कर लिया था। उसने अपने दोस्त घनश्याम से बात की। घनश्याम का पूरा कारोबार होटल के ही बूते चलता था। होटल में जो भी कार्यक्रम होता, डीजे तथा अन्य कार्यक्रम वही आयोजित करता था।
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अधिवक्ता के कारण उसका भी धंधा चौपट हो रहा था। उसने अपने पुराने दोस्त अंजनी श्रीवास्तव को लगाया। अंजनी शातिर अपराधी रहा है। कई हत्याओं और डाकघर लूट में भी उसका नाम सामने आया था। उसी ने प्रतापगढ़ के अपने परिचित शमशाद को सुपारी पहुंचाई। शमशाद ने अपने गुर्गों विशाल और रईस को पैसे दिए और इलाहाबाद भेज दिया। यहां अंजनी और घनश्याम की मदद से दो बार अधिवक्ता की रेकी कराई गई। उन्हें अधिवक्ता का घर से लेकर कचहरी तक जाने का रूट भी समझाया। शूटरों से पहले अंजनी ने खुद ही गली में जाकर राजेश के घर की रेकी की थी। एसटीएफ वाराणसी शमशाद और विशाल से पूछताछ कर रही है। रईस की तलाश में छापेमारी की जा रही है। संभव है कि बुधवार रात तक उसे भी गिरफ्तार कर लिया जाय।
जांच में पता चला है कि शमशाद ने पहले अपने दोनों शूटरों को भेज दिया था लेकिन, घटना वाले दिन वह खुद इलाहाबाद आया था। एक बाइक से राजेश की गली के बाहर वह खड़ा हो गया था। जैसे ही राजेश गली से बाहर निकले, उसने शूटर विशाल को फोन कर बता दिया कि राजेश निकल रहे हैँ। जहां मौका मिले, उन्हें मार दो।
होटल मालिक प्रदीप जायसवाल का दोस्त घनश्याम घटना वाले दिन से ही घर से गायब है। उसके घर पर पुलिस ने डेरा जमा रखा है। उसकी तलाश में लखनऊ तक दबिश दी जा रही है। उसके परिवार के कुछ लोगों को पकड़ा गया है। उसके सभी संभावित ठिकानों पर पुलिस नजर रखे हुए हैं। उधर अंजनी श्रीवास्तव की भी तलाश की जा रही है।
अधिवक्ता राजेश श्रीवास्तव की हत्या के बाद पुलिस को कचहरी के पास से एक लावारिस काली पल्सर मिली थी। बाद में पता चला था कि वह प्रतापगढ़ में एक बैंक परिसर से चुराई गई है। खुलासा हुआ है कि उसी बाइक पर सवार होकर शूटरों ने राजेश को गोली मारी थी। दरअसल, प्रतापगढ़ से चोरी बाइक का इंतजाम शमशाद ने ही अपने गुर्गों से कराया था। उसने बाइक को इलाहाबाद भेजने से पहले उस पर छात्रसंघ लिखवा दिया था, ताकि किसी को शक न हो। इसी बाइक से कातिलों ने रेकी की और हत्या के बाद उसे कचहरी के पास खड़ी कर भाग निकले।
पुलिस को अब तक की जांच में जो पता चला है कि होटल मालिक प्रदीप जायसवाल ने राजेश श्रीवास्तव को रास्ते से हटाने के लिए घनश्याम को पांच लाख रुपये दिए थे। सुपारी में भी कमीशनखोरी हो गई। यह रकम शमशाद तक पहुंचते-पहुंचते दो लाख हो गई। बीच में किसने पैसा खाया, इस बात का खुलासा घनश्याम और अंजनी के मिलने के बाद होगा।
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अधिवक्ता राजेश श्रीवास्तव हत्याकांड की जांच में जुुटी पुलिस ने भले होटल मालिक प्रदीप जायसवाल को जेल भेज दिया था लेकिन, कोई क्लू मिल नहीं रहा था। उसी समय वाराणसी एसटीएफ की टीम को शमशाद के बारे में पता चला। दरअसल, शमशाद भाड़े पर हत्याएं कराने का एक्सपर्ट है। एसटीएफ ने जब शमशाद को सर्विलांस पर लिया तो एक के बाद एक कड़ियां जुड़ती चली गईं। एसटीएफ ने सोमवार को शमशाद को पकड़ लिया। उसके बाद खुलासा हो गया कि उसी ने प्रतापगढ़ के विशाल प्रजापति और रईस को हायर कर अधिवक्ता का मर्डर कराया है। एसटीएफ ने विशाल प्रजापति को पकड़ा तो सारे मामले का खुलासा हो गया।
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एसटीएफ सूत्रों के मुताबिक नाले के विवाद में अधिवक्ता राजेश श्रीवास्तव ने होटल मालिक प्रदीप जायसवाल का जीना हराम कर दिया था। उन्होंने नगर निगम के छोटे से अफसर से लेकर मुख्यमंत्री तक इसकी शिकायत की थी। उसमें एडीए और नगर निगम के कुछ अफसर भी फंस रहे थे। उन लोगों ने प्रदीप से हाथ खड़े कर दिए थे कि अगर मामला हाईकोर्ट गया तो होटल को कोई बचा नहीं पाएगा। इसी के बाद उसने अधिवक्ता को रास्ते से हटाने के निश्चय कर लिया था। उसने अपने दोस्त घनश्याम से बात की। घनश्याम का पूरा कारोबार होटल के ही बूते चलता था। होटल में जो भी कार्यक्रम होता, डीजे तथा अन्य कार्यक्रम वही आयोजित करता था।
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अधिवक्ता के कारण उसका भी धंधा चौपट हो रहा था। उसने अपने पुराने दोस्त अंजनी श्रीवास्तव को लगाया। अंजनी शातिर अपराधी रहा है। कई हत्याओं और डाकघर लूट में भी उसका नाम सामने आया था। उसी ने प्रतापगढ़ के अपने परिचित शमशाद को सुपारी पहुंचाई। शमशाद ने अपने गुर्गों विशाल और रईस को पैसे दिए और इलाहाबाद भेज दिया। यहां अंजनी और घनश्याम की मदद से दो बार अधिवक्ता की रेकी कराई गई। उन्हें अधिवक्ता का घर से लेकर कचहरी तक जाने का रूट भी समझाया। शूटरों से पहले अंजनी ने खुद ही गली में जाकर राजेश के घर की रेकी की थी। एसटीएफ वाराणसी शमशाद और विशाल से पूछताछ कर रही है। रईस की तलाश में छापेमारी की जा रही है। संभव है कि बुधवार रात तक उसे भी गिरफ्तार कर लिया जाय।
जांच में पता चला है कि शमशाद ने पहले अपने दोनों शूटरों को भेज दिया था लेकिन, घटना वाले दिन वह खुद इलाहाबाद आया था। एक बाइक से राजेश की गली के बाहर वह खड़ा हो गया था। जैसे ही राजेश गली से बाहर निकले, उसने शूटर विशाल को फोन कर बता दिया कि राजेश निकल रहे हैँ। जहां मौका मिले, उन्हें मार दो।
होटल मालिक प्रदीप जायसवाल का दोस्त घनश्याम घटना वाले दिन से ही घर से गायब है। उसके घर पर पुलिस ने डेरा जमा रखा है। उसकी तलाश में लखनऊ तक दबिश दी जा रही है। उसके परिवार के कुछ लोगों को पकड़ा गया है। उसके सभी संभावित ठिकानों पर पुलिस नजर रखे हुए हैं। उधर अंजनी श्रीवास्तव की भी तलाश की जा रही है।
अधिवक्ता राजेश श्रीवास्तव की हत्या के बाद पुलिस को कचहरी के पास से एक लावारिस काली पल्सर मिली थी। बाद में पता चला था कि वह प्रतापगढ़ में एक बैंक परिसर से चुराई गई है। खुलासा हुआ है कि उसी बाइक पर सवार होकर शूटरों ने राजेश को गोली मारी थी। दरअसल, प्रतापगढ़ से चोरी बाइक का इंतजाम शमशाद ने ही अपने गुर्गों से कराया था। उसने बाइक को इलाहाबाद भेजने से पहले उस पर छात्रसंघ लिखवा दिया था, ताकि किसी को शक न हो। इसी बाइक से कातिलों ने रेकी की और हत्या के बाद उसे कचहरी के पास खड़ी कर भाग निकले।
पुलिस को अब तक की जांच में जो पता चला है कि होटल मालिक प्रदीप जायसवाल ने राजेश श्रीवास्तव को रास्ते से हटाने के लिए घनश्याम को पांच लाख रुपये दिए थे। सुपारी में भी कमीशनखोरी हो गई। यह रकम शमशाद तक पहुंचते-पहुंचते दो लाख हो गई। बीच में किसने पैसा खाया, इस बात का खुलासा घनश्याम और अंजनी के मिलने के बाद होगा।