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सॉल्वरों के लिए बिहार में चल रहे ‘ट्रेनिंग सेंटर’

Tue, 31 Jul 2018 01:33 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Tue, 31 Jul 2018 01:33 AM IST
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'Training Center' running in Bihar for solvers
इलाहाबाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
लाखों रुपये लेकर प्रतियोगी परीक्षाएं पास कराने का ठेका लेने वाले ओम सहाय के पकड़े जाने के बाद एसटीएफ अब उसे सॉल्वर उपलब्ध कराने वाले विक्कू पंडित की खोजबीन में जुट गई है। उसकी तलाश के दौरान पुलिस को कुछ अहम जानकारी हाथ लगी है। पता चला है कि सॉल्वरों के लिए बिहार में बाकायदा ट्रेनिंग सेंटर चलाए जा रहे हैं।
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एसटीएफ सूत्रों की मानेें तो सरगना ओम सहाय ने बताया था कि बिहार निवासी विक्कू ने ही उसे सॉल्वर उपलब्ध कराए थे। विक्कू से उसकी लंबे समय से जान पहचान है। विक्कू की बिहार में चल रहे कई कोचिंग संस्थानों में अच्छी पकड़ है। ओम ने बताया है कि इससे पहले भी वह प्रतियोगी परीक्षाओं में सॉल्वर बैठाने का ठेका ले चुका है और तब भी सॉल्वर उसे विक्कू ने ही उपलब्ध कराए थे। एसटीएफ का कहना है कि सॉल्वरों ने पूछताछ में बताया कि सॉल्वरों को परीक्षा में किसी और के स्थान पर बैठने के लिए उन सभी एक कोचिंग में बुलाकार बाकायदा तीन दिन पहले से ट्रेनिंग दी जा रही थी। उस अभ्यर्थी का पूरा विवरण जैसे नाम, पता, माता-पिता का नाम, रोल नंबर आदि रटाया गया। यहां तक कि आधार कार्ड, पैन कार्ड नंबर भी रटाया गया।    पहले बढ़ाता है मेलजोल, फिर देता है लालच
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सॉल्वर उपलब्ध कराने वाले विक्कू पंडित के बारे में एसटीएफ को यह पता चला कि कोचिंग संस्थानों में जाकर वह पहले ऐसे छात्र-छात्राओं को चिह्नित करता है, जो प्रतियोगी परीक्षा पास करने में सक्षम हों। इसके बाद वह इनमेें से ऐसे लोगों से दोस्ती करता है जो आर्थिक रूप से बहुत मजबूत न हों। मेलजोल बढ़ाने के बाद वह उन्हें दूसरे की जगह परीक्षा में बैठने का लालच देता है।
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सॉल्वर गैंग सिर्फ ऐसी भर्ती परीक्षाओं को पास कराने का ठेका लेता था, जिसका आयोजन एक चरण में होना हो। एसटीएफ डिप्टी एसपी नवेंदु सिंह ने बताया कि दो या तीन चरण यानी प्रारंभिक-मुख्य या प्र्री-मेंस-इंटरव्यू वाली परीक्षाओं में यह गैंग खेल नहीं करता था, क्योंकि उसमें रिस्क भी होती और एक से ज्यादा बार सॉल्वरों को बुलाने पर खर्चा भी होता।

सूत्रों की मानें सरगना ओम ने अभ्यर्थियों से दो-दो लाख रुपये एडवांस में लिए थे। एक अभ्यर्थी कविता यादव को छोड़कर उसने बाकी सभी से एडवांस में रुपये लेने की बात कबूली है। हालांकि, एसटीएफ को उसके पास से महज 15 हजार रुपये ही बरामद हो सके हैं। एसटीएफ का कहना है कि उसने लाखों रुपये ठिकाने लगाए हैं, जिसकी जांच की जा रही है।

उप्र लोक सेवा आयोग की ओर से आयोजित एलटी ग्रेड भर्ती परीक्षा से पहले रविवार सुबह एसटीएफ ने सॉल्वर गिरोह का भंडाफोड़ किया था। गैंग का सरगना ओम सहाय पुत्र अवध बिहारी मूल रूप से यमुनापार के लालापुर का रहने वाला है, जो इन दिनों राजरूपपुर में रह रहा था। गिरोह का भंडाफोड़ करने वाली टीम में शामिल इंस्पेक्टर केशव चंद राय, अतुल सिंह ने बताया कि ओम खुद इस परीक्षा में अभ्यर्थी था। एसटीएफ के हाथ उसके आवेदन पत्र की सॉफ्ट कॉपी भी लगी है। एसटीएफ इलाहाबाद इकाई के डिप्टी एसपी नवेंदु सिंह ने बताया कि यह जानकारी मिली है कि सॉल्वरों को सेंटर पर पहुंचाने के बाद वह वाराणसी जाने वाला था। वह किस केंद्र पर और किसके साथ जाने वाला था, इसका पता नहीं चल सका है।

ओम सहाय तकनीकी का अच्छा जानकार है। शिक्षक की नौकरी पाने से पहले ओम ने करीब सात सालों तक नामी दूरसंचार कंपनी में टेक्नीशियन के पद पर काम किया था। 2006 से 2013 तक वह कंपनी मेें अलग-अलग जिलों में रहकर नौकरी करता रहा। बताया जा रहा है कि उसके झांसे में आए कई अभ्यर्थी उन्हीं जिलों के रहने वाले हैं जिन जिलों में टेक्नीशियन रहते हुए उसने काम किया।


पकड़े गए सॉल्वरों ने पूछताछ में बताया है कि उन्हें किसी और की जगह परीक्षा देने के लिए 50 हजार रुपये दिए जाने की बात कही गई थी। यह रकम दो किश्तों में दी जानी थी। पहली किश्त परीक्षा देकर बाहर निकलने और दूसरी किश्त तब दिए जाने को कहा गया था जब परीक्षा उत्तीर्ण कर ली जाती।
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