छात्र की हत्या के पीछे गढ़ी फिरौती की कहानी
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ग्यारह साल का रवि पाल झूंसी में कसेरुआ खुर्द गांव निवासी बब्बू पाल का इकलौता बेटा था। वह दो माह से थरवई के कोतारी गांव में सुभाषचंद्र कुशवाहा के घर में ट्यूशन पढ़ने जाता था। कांदी गांव निवासी मोहम्मद एराफ उर्फ गुड्डू वहां बच्चों को पढ़ाने जाता था। रवि19 मार्च को दोपहर में यह बताकर निकला कि वह ट्यूशन पढ़ाने वाले सर (एराफ) के घर जा रहा है। वह उसे गियर वाली साइकिल गिफ्ट में देंगे। तब से रवि लापता था। 23 मार्च को सरायइनायत में चंदौहा गांव के खंडहर में बोरे के भीतर उसकी लाश मिली। पिता ने एराफ पर आरोप लगाया कि उसने रवि का कत्ल किया है। वह बालक को एक आतंकी संगठन में शामिल करना चाहता था लेकिन नाकाम रहा।
पुलिस ने एराफ को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो उसने रवि के कत्ल का जुर्म कुबूला लेकिन आतंकी संगठन वाली बात नकारकर नई कहानी पुलिस को सुना दी। थाना प्रभारी झूंसी पीएन मिश्रा के मुताबिक, एराफ ने कहा कि कोतारी गांव आते-जाते उसका परिचय आपराधिक प्रवृत्ति के अब्दुल मलिक से हो गया था। अब्दुल के ही इशारे पर रवि का अपहरण कर 15 लाख रुपये फिरौती उगाहने की योजना बनी। अब्दुल मलिक ने इसमें अपने साथियों कहरा गांव उतरांव निवासी मोहम्मद महमूद, मोहम्मद सलमान और मोहम्मद इरफान को भी शामिल कर लिया। इनमें सलान और इरफान सगे भाई हैं। एराफ गियर वाली साइकिल का प्रलोभन देकर रवि के अपहरण की ताक में लग गया।
19 मार्च को एराफ के झांसे में आकर रवि घर से निकला तो रास्ते में दोपहर करीब एक बजे सहसों चौराहे के पास एराफ ने उसे बाइक पर बैठा लिया। बाकी अपराधी भी साथ थे। रवि को कहरा गांव में अब्दुल मलिक के घर ले जाया गया। पुलिस ने आरोपी एराफ के हवाले से दावा किया है कि रवि चीखने-चिल्लाने लगा तो अपहरण का भेद खुलने पर गिरफ्तारी के डर से रात करीब दस बजे गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी। फिर रस्सी से हाथ, पैर, गला बांधकर रवि का शव बोरे में भरकर सरायइनायत इलाके के खंडहर में फेंक दिया। पुलिस ने एराफ से पूछताछ के बाद महमूद, सलमान और इरफान को पकड़ लिया लेकिन अब्दुल मलिक नहीं मिला। घटना में प्रयुक्त दो बाइक भी बरामद कर ली।
पुलिस भले ही रवि के पिता बब्बू के इस आरोप को खारिज कर रही है कि एराफ ने आतंकी संगठन में नहीं शामिल कर पाने पर उनके बेटे को मारा लेकिन उसकी हरकतों के बारे में दूसरे बच्चों से मिली जानकारी निश्चित तौर पर चौंकाने वाली और गंभीर है। एराफ से ट्यूशन पढ़ने वाले दूसरे बच्चों ने अपने घर में बताया था कि वह उन्हें उर्दू पढ़ाता था। कहता था कि उर्दू सीख लो तो फौजियों जैसी वर्दी पहनाकर विदेश भेजेगा। यहां गौर करने वाली बात यह है कि सीरिया के खूंखार आतंकी संगठन आईएस में शामिल होने के लिए लड़कों को बरगलाने का पहले भी खुलासा हो चुका है।
रवि समेत दूसरे बच्चों के पिता ने बताया कि उनके बेटे घर में भी उर्दू के शब्द बोलने लगे तब उनका माथा ठनका। यह भी हैरानी की बात है कि अगर कोई छात्र ट्यूशन पढ़ने नहीं पहुंच पाता था तो एराफ कई किलोमीटर उस बालक के घर जाकर उसे खुद ले जाता। आमतौर पर शिक्षक ट्यूशन एक या दो घंटे पढ़ाते हैं लेकिन एराफ बच्चों को कई घंटे तक अपने साथ बैठाकर बात करता रहता। बच्चे एक बजे घर से निकलते तो रात आठ बजे वापस पहुंचते। ऐसे में लोगों को शक है कि उनके बच्चों का ब्रेनवॉश किया जा रहा था। पूर्व विधायक प्रवीण सिंह पटेल भी रवि के घर पहुंचे और शोक जताने के साथ ही कहा कि यह गंभीर मसला है। पुलिस को यूं आरोपियों की गढ़ी कहानी सुनाने के बजाय जांच करनी चाहिए।