फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   The plan was to kill the lawyer a day earlier

अधिवक्ता को एक दिन पहले ही मारने की थी योजना

Sat, 26 May 2018 01:40 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Sat, 26 May 2018 01:40 AM IST
विज्ञापन
The plan was to kill the lawyer a day earlier
इलाहाबाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
बदमाश अधिवक्ता राजेश कुमार श्रीवास्तव को नौ मई को ही यानी वारदात से एक दिन पहले ही मारने की फिराक में थे। हालांकि उनकी प्लानिंग फेल हो गई और उन्हें अपना इरादा बदलना पड़ा। यह खुलासा पकड़े गए बदमाशों से पूछताछ के बाद एसटीएफ ने किया है। यह भी पता चला है कि हत्या की योजना एक महीने पहले से बनाई जा रही थी। साथ ही वारदात के चार दिन पहले ही बदमाश शहर आकर रेकी में जुट गए थे।
विज्ञापन


पुलिस के मुताबिक पकड़े गए बदमाशों ने पूछताछ में जो खुलासा किया, उससे साफ है कि वह अधिवक्ता को नौ मई को ही मारना चाहता थे। इस दिन तय समय पर पहले से बनाए गए प्लान के मुताबिक सभी अपनी-अपनी जगह पहुंच भी गए थे, लेकिन थोड़ी सी चूक होने की वजह से वह अपने मंसूबे में कामयाब नहीं हो पाए। दरअसल पकड़े गए बदमाशों ने पुलिस को बताया है कि सात मई यानी वारदात से तीन दिन पहले ही शमशाद और दोनों शूटर विशाल विश्वकर्म व रईस शहर आ गए थे। यहां आकर तीनों जंक्शन के पास स्थित गुरुकृपा होटल में रुके। खास बात यह कि शूटरों ने यहां अपनी मूल आईडी प्रूफ का इस्तेमाल किया। कमरा विशाल की मूल आईडी प्रूफ दिखाकर लिया गया। इसके बाद आठ मई को रेकी करने के बाद तीनों ट्रेन से प्रतापगढ़ चले गए। योजना के मुताबिक नौ मई को ट्रैवेल एजेंसी से अर्टिगा कार बुक कर तीनों शहर पहुंचे और अपनी-अपनी जगह खड़े हो गए। हालांकि देर से पहुंचने के कारण शमशाद, जिसे दोनों शूटरों को लोकेशन देनी थी, अधिवक्ता को घर से निकलते नहीं देख पाया। नतीजतन उन्हें इरादा बदलना पड़ा और फिर तीनों उसी कार से प्रतापगढ़ लौट गए। इसके बाद 10 मई को फिर स्विफ्ट डिजायर कार से शहर आकर वारदात को अंजाम दिया और उसी कार से भाग निकले।
विज्ञापन


तीनों बदमाशों से पूछताछ में पुलिस को पता चला है कि आठ मई को राजेश के घर से लेकर कचहरी तक और वहां से बचकर भागने के रास्तोें की रेकी की गई। शूटरों को राजेश को पहचनवाने की जिम्मेदारी शमशाद पर थी। इस दिन दोनों शूटर विशाल व रईस हनुमान मंदिर और शमशाद अधिवक्ता के घर के पास खड़ा हो गया। हालांकि वह उन्हें घर से निकलते हुए नहीं देख सका। इसके बाद तीनों मिले और कचहरी पहुंच गए।
विज्ञापन
विज्ञापन


एसटीएफ के मुताबिक, कचहरी पहुंचने के बाद शमशाद ने अधिवक्ता की मोटरसाइकिल दोनों शूटरों को दिखाई। वहां उनका बस्ता रखा था लेकिन वह मौजूद नहीं थे। हालांकि सामने ही एक बोर्ड लगा था जिस पर अधिवक्ता का मोबाइल नंबर लिखा था। शातिर शमशाद ने फौरन नंबर को अपने मोबाइल में सेव किया। इससे अधिवक्ता की फोटो उसके मोबाइल में दिखने लगी और यह फोटो दिखाकर ही दोनों शूटरों को अधिवक्ता को पहचनवाया।


एसटीएफ को पूछताछ में बदमाशों ने जो बातें बताई हैं, उसके मुताबिक इस सनसनीखेज वारदात की योजना वारदात से करीब एक महीने पहले बनी थी। 23 मई को अंजनी श्रीवास्तव के बुलाने पर शमशाद प्रतापगढ़ से शहर में रामबाग पहुंचा। वहां अंजनी ने उसे घनश्याम को मिलवाया। इसके बाद घनश्याम व अंजनी ने होटल मालिक प्रदीप जायसवाल का पूरा प्रकरण बताते हुए शमशाद से अधिवक्ता की हत्या करने को कहा। साथ ही इस काम के लिए उसे दो लाख रुपये दिए जाने की बात कही।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed