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लग्जरी गाड़ी के शौकीनों को सरकार ने दिया जोर का झटका
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Mon, 09 May 2016 01:57 AM IST
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शहर की सड़कों पर ऑडी, मर्सडीज, इंडीवर, फॉर्चूनर जैसे कीमतों गाड़ियों में फर्राटा भरने वालों की बड़ी संख्या है लेकिन यह आश्चर्य ही है कि लग्जरी महंगी गाड़ियों में घूमने वाले आयकर अदा करने में काफी पीछे हैं। साफ है कि इन महंगी गाड़ियों में घूमने वाले बड़े पैमाने पर काली कमाई कर रहे हैं। केंद्र सरकार अब ऐसे लोगों पर शिकंजा कसने जा रही है सो 10 लाख रुपये से अधिक कीमत की सिडान और एसयूवी सेग्मेंट की गाड़ियां खरीदने वालों को गाड़ी की कुल कीमत पर एक प्रतिशत अतिरिक्त टैक्स भरना होगा। यह रकम शोरूमों संचालकों के जरिए सरकार के खाते में जाएगी। एक जून से गाड़ी के लिए एक प्रतिशत अतिरिक्त रकम अदा करने के बाद ऐसे लोग सीधे आयकर के निशाने पर आ जाएंगे।
गाड़ियों के सिडान सेग्मेंट में ऑडी, मर्सडीज, होंडा सिटी, होंडा सिविक, होंडा एकॉर्ड, सेवेरर्ले क्रूज, टोयटा कैमरी, टोयटा कोरोला, हुंडई वर्ना, हुंडई इलेट्रा आदि 15 लाख और उससे अधिक कीमत की हैं। इसी तरह एसयूवी सेग्मेंट में ऑडी क्यू, मारुति सुजुकी फ्रीटा ब्रिजा, रेनॉल्ड डस्टर, टाटा सफारी, फोर्ड इंडीवर, टोयटा इनोवा, टोयटा फार्चूनर, महेंद्रा एक्सयूवी 500 जैसे गाड़ियां 20 से 40 लाख रुपये या उससे अधिक कीमत की हैं। इसमें ऑडी और मर्सडीज कंपनी की कारें तो 50-70 लाख रुपये तक हैं। शहर में काफी डॉक्टर, अधिवक्ता, बिल्डर, ठेकेदार और व्यापारी ऐसे हैं, जिनके पास ऐसे कीमती गाड़ियां हैं। सिविल लाइंस, अशोक नगर, लूकरगंज, जार्जटाउन, टैगोर टाउन, दरभंगा कॉलोनी, एलनगंज आदि पॉश इलाकों में घरों में इस तरह की गाड़ियां काफी लोगों के पास हैं।
काली कमाई करने वाले लोगों को इन कीमती लग्जरी गाड़ियों पर मोटी रकम खर्च करने में जरा भी नहीं सोचना पड़ता। महंगी लग्जरी गाड़ियों में घूमने वाले शहर के ऐसे ज्यादातर लोग बड़े पैमाने पर आयकर की चोरी में लिप्त हैं। इस काली कमाई का पता लगाने के लिए ही केंद्र सरकार ने लग्जरी गाड़ियों के शौकीनों पर शिकंजा कसने की तैयारी की है। सरकार के इस निर्णय के बाद महंगी गाड़ी खरीदने के तुरंत बाद पता चल जाएगा कि ऐसे लोग कितना आयकर दे रहे हैं।
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इससे सरकार को काली कमाई का भी पता चल सकेगा। जनरल मोटर्स सर्वेरले शोरूम के सीईओ विकास अग्रवाल का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में लग्जरी गाड़ियां खरीदने वालों की संख्या बढ़ी है। सरकार के इस निर्णय से इसमें कमी आ सकती है, क्योंकि यह मामला सीधे काली कमाई और आयकर से जुड़ा है। वैसे ग्राहकों से कैसे एक प्रतिशत टैक्स लेना है और कैसे सरकार के खाते में जमा करना है, कंपनियों की ओर से निर्देश मिलने पर ही इसके लिए काम होगा।
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गाड़ियों के सिडान सेग्मेंट में ऑडी, मर्सडीज, होंडा सिटी, होंडा सिविक, होंडा एकॉर्ड, सेवेरर्ले क्रूज, टोयटा कैमरी, टोयटा कोरोला, हुंडई वर्ना, हुंडई इलेट्रा आदि 15 लाख और उससे अधिक कीमत की हैं। इसी तरह एसयूवी सेग्मेंट में ऑडी क्यू, मारुति सुजुकी फ्रीटा ब्रिजा, रेनॉल्ड डस्टर, टाटा सफारी, फोर्ड इंडीवर, टोयटा इनोवा, टोयटा फार्चूनर, महेंद्रा एक्सयूवी 500 जैसे गाड़ियां 20 से 40 लाख रुपये या उससे अधिक कीमत की हैं। इसमें ऑडी और मर्सडीज कंपनी की कारें तो 50-70 लाख रुपये तक हैं। शहर में काफी डॉक्टर, अधिवक्ता, बिल्डर, ठेकेदार और व्यापारी ऐसे हैं, जिनके पास ऐसे कीमती गाड़ियां हैं। सिविल लाइंस, अशोक नगर, लूकरगंज, जार्जटाउन, टैगोर टाउन, दरभंगा कॉलोनी, एलनगंज आदि पॉश इलाकों में घरों में इस तरह की गाड़ियां काफी लोगों के पास हैं।
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काली कमाई करने वाले लोगों को इन कीमती लग्जरी गाड़ियों पर मोटी रकम खर्च करने में जरा भी नहीं सोचना पड़ता। महंगी लग्जरी गाड़ियों में घूमने वाले शहर के ऐसे ज्यादातर लोग बड़े पैमाने पर आयकर की चोरी में लिप्त हैं। इस काली कमाई का पता लगाने के लिए ही केंद्र सरकार ने लग्जरी गाड़ियों के शौकीनों पर शिकंजा कसने की तैयारी की है। सरकार के इस निर्णय के बाद महंगी गाड़ी खरीदने के तुरंत बाद पता चल जाएगा कि ऐसे लोग कितना आयकर दे रहे हैं।
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इससे सरकार को काली कमाई का भी पता चल सकेगा। जनरल मोटर्स सर्वेरले शोरूम के सीईओ विकास अग्रवाल का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में लग्जरी गाड़ियां खरीदने वालों की संख्या बढ़ी है। सरकार के इस निर्णय से इसमें कमी आ सकती है, क्योंकि यह मामला सीधे काली कमाई और आयकर से जुड़ा है। वैसे ग्राहकों से कैसे एक प्रतिशत टैक्स लेना है और कैसे सरकार के खाते में जमा करना है, कंपनियों की ओर से निर्देश मिलने पर ही इसके लिए काम होगा।